हरियाणा राज्य से सतरोहन साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि इंटरनेट सेवा बंद हूँ जाने की वजह से लोग बहुत परेशां है।
हरियाणा से रवि की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कुलदीप से हुई। कुलदीप ने बताया कि वो राधा पोलीमर में कार्य करते है। माल का खरीद बिक्री नहीं होने के कारण वर्करों को बैठा दिया जा रहा है साथ ही कुछ कुछ को निकाल दिया जा रहा है। साथ ही वेतन तो मिलता है परन्तु पेमेंट स्लिप नहीं दिया जाता है। पीएफ की भी जानकारी नहीं है कि पैसे कितना कटता है। साथ ही यूएएन नंबर भी नहीं मिला है
हरियाणा राज्य से रवि की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से एक श्रमिक से हुई। श्रमिक ने बताया कि उनका दो महीने से काम छूटा हुआ है। रोजी रोटी के लिए कोई काम नहीं है तो जीवन बसर के लिए गांव से क़र्ज़ में पैसे मंगवाते है।
दिल्ली हरियाणा से राधेशयं साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि कोरोना बीमारी से लोगों की जान जा रही थी और अब देश में बेरोजगारी के कारण मजदूरों की स्थिति बहुत खराब हो गयी है
हरियाणा राज्य से हमारे श्रोता साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि आज भी बहादुरगढ़ में इंटरनेट की सेवा बंद है
हरियाणा राज्य से रवि साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि मजदूरों के साथ बहुत अत्याचार किया जा रहा है। कि पहले कंपनी वाले मजदूरों को काम पर बुलाते है तथा बाद में काम नहीं है कह कर बाहर निकाल देते हैं
हरियाणा से रुपाली साझा मंच के माध्यम से बताती हैं कि कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े किसानों ने 26 जनवरी के दिन दिल्ली बॉर्डर पर इक्क्ठा हुए
हरियाणा से रवि की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से श्रमिक विकास से हुई। विकास ने बताया कि कासन में बिजली की समस्या होती है। बिजली एक बार कटती है तो फिर जल्दी नहीं आती है। इससे रोजमर्रे के कार्य में बाधा आती है
हरियाणा से रवि की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से भोला से हुई। भोला ने बताया कि वो झारखण्ड से आये है। वो टेलर है लेकिन वो 20 दिन से बैठे हुए है अभी तक काम नहीं मिला। वो गांव से पैसे माँगा कर मकान का आधा किराया चुकाए साथ ही भरण पोषण किये। अब वो वापस अपने गांव जा रहे है ।
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बताना चाहेंगे कि सैलरी स्लिप एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है, जिसकी मांग करना हर मज़दूर का कानूनी अधिकार है, और न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 के अंतर्गत कंपनियों को अपने मज़दूरों को सैलरी स्लिप देना अनिवार्य है, भले ही मज़दूर पीस रेट या कॉन्ट्रैक्ट में काम करते हों। सैलरी देने के एक दिन पहले कंपनी को सैलरी स्लिप देना होता है, जिसमे उनकी कुल सैलरी और कटौतियों का विवरण बताया जाता है। कंपनी चाहे छोटी हो या बड़ी, सैलरी हफ्ते कि दर से दी जाती हो या फिर हर महीने कि देर से, कंपनियां सैलरी स्लिप देने से नहीं मना कर सकती। एक सैलरी स्लिप में आपका नाम, आई.डी कार्ड नंबर, आपकी कुल सैलरी और डी.ऐ, काम किए हुए दिन, आपके दुवारा ली गई छुट्टियाँ, ओवर टाइम और उसकी सैलरी, आपकी सैलरी से कि गई कटौतियां जैसे कि ईएसआई, पी.एफ, होस्टल, और मुख्यतः सैलरी स्लिप पर कंपनी के नाम सहित, किसी अधिकारी के हस्ताक्षर भी होने चाहिए। अगर कंपनी या कांट्रेक्टर आपको सैलरी स्लिप नहीं देते तो आप इसकी एक लिखी शिकायत लेबर ऑफिस में किसी यूनियन और या फिर अपने अन्य मज़दूर साथियों के साथ मिलकर कर सकते हैं, इस शिकायत पत्र के साथ उन सभी दस्तावेजों का ज़ेरॉक्स भी लगाएँ जिससे यह सभी हो कि आप उसी कंपनी में काम करते हैं। बहुत सी कम्पनियाँ मज़दूरों कि सैलरी से कटोत्ती तो करती है, मगर उन्हें उसका सही विवरण नहीं देती, यह एक प्रकार कि चोरी है, जिसका विरोध मज़दूरों को करना चाहिए, नहीं तो कंपनी इसी तरह मज़दूरों कि मेहनत के पैसा कि चोरी करते रहेंगे।
Feb. 1, 2021, 5:43 p.m. | Tags: govt entitlements int-PAJ industrial work workplace entitlements