हरियाणा से रवि की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कुलदीप से हुई। कुलदीप ने बताया कि वो राधा पोलीमर में कार्य करते है। माल का खरीद बिक्री नहीं होने के कारण वर्करों को बैठा दिया जा रहा है साथ ही कुछ कुछ को निकाल दिया जा रहा है। साथ ही वेतन तो मिलता है परन्तु पेमेंट स्लिप नहीं दिया जाता है। पीएफ की भी जानकारी नहीं है कि पैसे कितना कटता है। साथ ही यूएएन नंबर भी नहीं मिला है

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बताना चाहेंगे कि सैलरी स्लिप एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है, जिसकी मांग करना हर मज़दूर का कानूनी अधिकार है, और न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 के अंतर्गत कंपनियों को अपने मज़दूरों को सैलरी स्लिप देना अनिवार्य है, भले ही मज़दूर पीस रेट या कॉन्ट्रैक्ट में काम करते हों। सैलरी देने के एक दिन पहले कंपनी को सैलरी स्लिप देना होता है, जिसमे उनकी कुल सैलरी और कटौतियों का विवरण बताया जाता है। कंपनी चाहे छोटी हो या बड़ी, सैलरी हफ्ते कि दर से दी जाती हो या फिर हर महीने कि देर से, कंपनियां सैलरी स्लिप देने से नहीं मना कर सकती। एक सैलरी स्लिप में आपका नाम, आई.डी कार्ड नंबर, आपकी कुल सैलरी और डी.ऐ, काम किए हुए दिन, आपके दुवारा ली गई छुट्टियाँ, ओवर टाइम और उसकी सैलरी, आपकी सैलरी से कि गई कटौतियां जैसे कि ईएसआई, पी.एफ, होस्टल, और मुख्यतः सैलरी स्लिप पर कंपनी के नाम सहित, किसी अधिकारी के हस्ताक्षर भी होने चाहिए। अगर कंपनी या कांट्रेक्टर आपको सैलरी स्लिप नहीं देते तो आप इसकी एक लिखी शिकायत लेबर ऑफिस में किसी यूनियन और या फिर अपने अन्य मज़दूर साथियों के साथ मिलकर कर सकते हैं, इस शिकायत पत्र के साथ उन सभी दस्तावेजों का ज़ेरॉक्स भी लगाएँ जिससे यह सभी हो कि आप उसी कंपनी में काम करते हैं। बहुत सी कम्पनियाँ मज़दूरों कि सैलरी से कटोत्ती तो करती है, मगर उन्हें उसका सही विवरण नहीं देती, यह एक प्रकार कि चोरी है, जिसका विरोध मज़दूरों को करना चाहिए, नहीं तो कंपनी इसी तरह मज़दूरों कि मेहनत के पैसा कि चोरी करते रहेंगे।
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Feb. 1, 2021, 5:43 p.m. | Tags: govt entitlements   int-PAJ   industrial work   workplace entitlements