उत्तरप्रदेश राज्य के ग़ाज़ियाबाद जिला से तिलक राम श्रमिक वाणी के माध्यम से यह पूछ रहे है की इनका शुगर लेबल माइनस की तरफ है ,नापने पर 49 है ,इसके उपचार के लिए इन्हे क्या करना होगा ?क्या डाइट लेना होगा ?

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गाज़ियाबाद राज्य के हाजीपुर भेटा से दिनेश कुमार ने श्रमिक वाणी के माध्यम से बताया कि उनके क्षेत्र में नगर पालिका द्वारा सफ़ाई नहीं हो पा रही है।

उत्तर प्रदेश राज्य के ग़ाज़ियाबाद से नागेंदर श्रमिक वाणी के माध्यम से कह रहें हैं कि, सादियाबाद ग्राम सभा के कुछ लोगों का कहना है की वे लोग कोरोना वैक्सीन ले चुके हैं तथा वे लोग मास्क नहीं लगाते हैं। उनका कहना है की कोरोना शहरी क्षेत्र में होता है वे तो ग्रामीण क्षेत्र में रहते हैं इसी लिए उन्हें कोरोना नहीं होगा

उत्तरप्रदेश राज्य के गाज़ियाबाद के लोनी के अशोक विहार कॉलोनी से हस्मत अली की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से अखिल भारतीय मज़दूर कल्याण संघ के राष्ट्रीय महासचिव नौशाद अली सिद्दीकी से हुई। नौशाद अली सिद्दीकी कहते है कि नगर पंचायत के कर्मचारी सही से काम नहीं करते है।गन्दगी का ढ़ेर लगा रहता है। नाली में कचड़ा जमा रहता है ,इसकी सफ़ाई नहीं होती है। राशन व रसोई गैस सम्बन्धी की कोई शिकायत नहीं है। वहीं पानी को लेकर लोगों को समस्या होती है। सड़कों पर धूल मिटटी उड़ती रहती है।मच्छरों का भी समस्या बना रहता है जिस पर नगर पालिका का कोई काम नहीं होता।

उत्तरप्रदेश राज्य के गाज़ियाबाद के लोनी से संवाददाता सुल्तान अहमद की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से मोहम्मद शौकीन से हुई। मोहम्मद शौकीन ने बताया कि उन्हें फैक्टशाला का कार्यक्रम अच्छा लगा। कार्यशाला में बहुत सी बातें बताई गई। दिनेश कुमार ने बताया कि फेक न्यूज़ जो आजकल प्रचलन में है ,इससे लोगों में बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। लोग बिन सोचे ही आगे फॉरवर्ड कर देते है। जो भी ख़बर रहता है ,उसे सोच समझ कर ही आगे फॉरवर्ड करना चाहिए। आज के कार्यशाला में जितने भी जानकारी मिली ,उसमें बदलाव करने की ज़रूरत नहीं है। ऑडियो पर क्लिक कर सुने पूरी साक्षात्कार..

ग्रामवाणी के श्रोता ने साझा मंच के माध्यम से बताया कि उनका राशन कार्ड नहीं बना है। उनके 4 बच्चे है और इस महंगाई में काफी दिक्क्त हो रही है।

दिल्ली से रफ़ी साझा मंच के माध्यम से एक निर्माण मज़दूर से बात कर रहें हैं। इनका कहना है की इन्हें कभी कभी ही काम मिल पाता है और उसपे भी कभी दिहाड़ी पूरी मिलती है तो कभी कुछ कम और इन्हें किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलता है। इन्हें मज़दूर कार्ड या ई श्रम कार्ड की जानकारी नहीं है. इनका कहना है की ये शिक्षित नहीं हैं ये भी एक कारण ही की किसी योजना से अवगत नहीं हैं. और इनका कहना है की कोरोना के समय में इन्हें काफी समस्या हुई जैसे खाने के लिए लोगों से उधार लेना पड़ा किराया भी देने में समस्या हो रही थी. ये कह रहें हैं की निर्माण चैत्र में सुरक्षा की कोई भी सुविधा नहीं होती है.

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विकास साझा मंच के माध्यम से कह रहें हैं की, कंपनियों में काम की कमी होने की वजह से कंपनियां खुद को शडाउन हैं.