दिल्ली के उद्योग विहार से सतीश जी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि ये जिस कंपनी में काम करते थे , उस कंपनी का मालिक अचनाक से कम्पनी को ब्वन्द करके कहीं चला गया। उक्त कम्पनी पर पहले गुरुग्राम के मज़दूर विभाग में भी केस चल रहा था। इस कंपनी में पिछले 20 साल से 1200 से ज्यादा कामगार मज़दूर काम कर रहे थे। कंपनी के अचानक बंद होने से आज इन सभी मज़दूरों पर आजीविका का संकट आ गया है
हमारे एक श्रोता साझा मंच के माध्यम से बताते हैं कि इनके कम्पनी में मजदूरों को एक वर्ष तक काम करने के बाद ही बोनस दिया जाता है साथ ही ठेकेदार के द्वारा बहुत 18 से 19 तारीख तक वेतन दिया जाता है
दिल्ली एनसीआर के उद्योग विहार से हमारे एक श्रोता सांझा मंच के माध्यम से यह बताते हैं कि इनके कम्पनी में 80 प्रतिशत मजदूरों को सही समय पर वेतन नहीं मिलता है साथ ही अतिरिक्त लाभ भी एक वर्ष तक कार्य करने के बाद नहीं मिलता है।
दिल्ली एनसीआर के उधोग बिहार से संजीत कुमार जी बताते हैं कि ये 274 ग्लोबल श्रम ग्लोबल कम्पनी में काम करते थे जंहा पुरे दिन बेरोजगार मजदूरों को काम पर लगाया जाता है और काम करवा कर शाम में निकाल दिया जाता है। वेतन भी नहीं मिलता है
बिहार महराजगंज से अब्दुल रहीम बताते हैं कि ये दिल्ली एनसीआर के उद्योग बिहार में कार्य करते थे। इस कम्पनी में पीएफ फॉर्म में सेलरी गलत दिखाया जाता है अब कार्य की तलाश में है जिस भी कम्पनी में जाते हैं वंहा के सुपरवाइजर नौकरी नहीं देते हैं
दिल्ली एनसीआर के उद्योग विहार से हमारे संवाददाता रफ़ी ने शबाना जी और कई महिलाओं के साथ बातचीत की। जिसमें शबाना जी ने बताया कि एक गारमेंट कंपनी में वो चार साल से काम कर रही है वहाँ वो धागा कटिंग करने का काम करती है। उस कंपनी में वह ठेकेदारी के माध्यम से काम कर रही है और दस घंटे काम कराकर उन्हें 200 रुपये दिए जाते हैं। अगर कोई पुरुष काम करता है तो उन्हें 260 रुपये दिए जाते है। जहाँ वो रहती हैं वहाँ और उनके फैक्टरी में उनके साथ हमेशा भेदभाव किया जाता है। पुरे कानून को लोगो ने मजाक बना दिया है
दिल्ली से सटे हुए उधोग बिहार जो हरियाणा गुड़गांव के क्षेत्र में आता है और लाखो करोड़ो लोगो की संख्या होते हुए भी कई सारे लोग फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं। लेकिन आए दिन जब मजदुर वेतन लेकर आते हैं तो रास्ते में गुंडे बदमाश चाकू लेकर डरा धमका सारा पैसा लूट लेते हैं। इस क्षेत्र में पुलिस प्रशासन होते हुए भी आए दिन ऐसी घटना होती रहती है
दिल्ली एनसीआर के कापसहेड़ा से हमारे संवाददाता रफ़ी ने कुछ मजदुर भाइयो से बातचीत की। जिसमे मज़दूरों ने बताया कि उन्हें काम से निकाल दिया गया है। इनसे ठेकेदारी पर काम कराया जाता था और वेतन का भी भुगतान नहीं किया गया। कम्पनी 494 मजदूरों को काम से निकाल दिए। कम्पनी के खिलाफ मज़दूरों ने रैली भी निकाली साथ ही कोर्ट में भी शिकायत किए। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई
दिल्ली-एनसीआर के उद्योग विहार से रफ़ी है और इनके साथ समरजीत जी हैं जो बताते हैं की ये वेयर हाउस में काम करते हैं जहाँ लोगो से अधिक काम लिया जाता है। लेकिन उस हिसाब से पैसे नहीं दिए जाते हैं। मजदूरों को अस्थाई रूप में ही 10-15 दिनों के लिए रखा जाता है। और बाद में निकाल दिया जाता है।
