दिल्ली एनसीआर के उद्योग विहार से हमारे संवाददाता रफ़ी ने शबाना जी और कई महिलाओं के साथ बातचीत की। जिसमें शबाना जी ने बताया कि एक गारमेंट कंपनी में वो चार साल से काम कर रही है वहाँ वो धागा कटिंग करने का काम करती है। उस कंपनी में वह ठेकेदारी के माध्यम से काम कर रही है और दस घंटे काम कराकर उन्हें 200 रुपये दिए जाते हैं। अगर कोई पुरुष काम करता है तो उन्हें 260 रुपये दिए जाते है। जहाँ वो रहती हैं वहाँ और उनके फैक्टरी में उनके साथ हमेशा भेदभाव किया जाता है। पुरे कानून को लोगो ने मजाक बना दिया है
