उद्योग विहार फेज-5,से संजय कुमार साझा मंच के माध्यम से बता रहे है कि इनके यहाँ एक महीने पंद्रह दिन हो गए है और कम्पनी ने गैरकानूनी तरीके से ताला बंदी कर रखी है।और प्रबंधक में इनलोगों की कोई बात नहीं सुन रही है।प्रबंधक का कहना है की 300 से काम कर्मचारी रहेंगे तो कम्पनी को बंद किया जा सकता है और ये मोदी सरकार का फैसला है।यहाँ पर जो श्रमिक बीस साल से काम कर रहे थे वो आज बेरोजगार हो गए है और अपनी रोजी-रोटी के लिए परेशान है।साथ ही इनके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी बर्बाद हो रही है। कोई भी कम्पनी पचास-पैंतालीस साल के हुए वर्कर को काम पर नहीं रखेगी।और इस समय रोड़ पर सारे 145 मजदुर बैठे है। लेकिन प्रबंधक ना तो कोई सुनवाई कर रहे है और ना ही समझने की कोशिश कर रहे है।लेबर कोर्ट में भी इनकी कोई सुनने को तैयार नहीं है।इसके लिए इन्होने डीसी को भी ज्ञापन दिया लेकिन डीसी भी सुनने को तैयार नहीं है।जिस कारण सारे मजदुर सड़क पर आ गए है।इनका कहना है की अगर यही स्थिति रही तो ये लोग बहुत बड़ा आंदोलन करने को तैयार है

उद्योग विहार,से पंकज कुमार साझा मंच के माध्यम से बता रहे है जिस समय इनके काम पर रखा गया था उस समय उन्हें 11 हजार रुपये देने की बात कही गयी थी।लेकिन जब एक माह काम पूरा हुआ तो उन्हें 11 हजार की जगह 9 हजार 5 सौ रुपये दिए गए।जब उन्होंने इस बारे पूछा तो उन्हें ये कहा गया की आपका 15 सौ रुपया और कम्पनी की तरफ से 1 हजार रुपया पीएफ़ जमा हो रहा है। तीन-चार माह बीत जाने के बाद जब कम्पनी से पीएफ़ और आईकार्ड की मांग पंकज जी ने कही तो उनसे एक माह और रुकने के लिए कहा गया।और इसी तरह 6 माह बीत जाने के बाद पंकज जी को बोला गया की अपना हिसाब ले लो पीएफ़ और आईकार्ड नहीं मिलेगा।उससे पहले सुपर वाईजर ने वर्दी के नाम पर 2 हजार रूपये लिया और उन्हें वर्दी भी नहीं दिया गया

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रफ़ी जी साझा मंच मोबाईल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि उद्योग विहार फेज-5 के कंपनी में एक ही रात में 145 लोग को नौकरी से निकल दिया गया और निकाले गए लग अपने हक़ और नौकरी के लिए लड़ाई कर रहे है।इसी विषय पर रफ़ी जी ने यूनियन के सचिव गजेंद्र सिंह जी से बातचीत की। बातचीत के दौरान गजेंद्र जी ने बताया कि ये जिस प्लांट में काम करते है वो 1997 ई. में शुरू हुआ है।और इसी प्लांट के मालिक ने इसी प्लांट के जरिये तरक्की करके पांच-छः प्लांट खड़े कर दिए है। प्लांट में ऐसे-ऐसे लोग है जो इस प्लांट के मालिक के साथ शुरू से ही काम कर रहे है और आज उनकी उम्र जिस कगार पर है उस हिसाब से वे यहाँ के अलावे और कही काम नहीं कर सकते है।ये लोग 40 दिन से कंपनी के आगे धरना प्रदर्शन कर रहे है और आज उनलोगों के जेब में खाने के लिए पैसे भी नहीं है।मैनेजमेंट ने इस कंपनी को पहले से ही अपने टारगेट में रखा हुआ है क्योंकि इस कंपनी में सारे पुराने लोग है कोई 2 साल तो कोई 5 साल में रिटायर होने वाला है । और इन लोगो का जो सेटलमेंट था वो 22 महीने पहले से ही देर से चल रहा था और इनका जो मांग पत्र है वो इनके सर के पास ही पड़ा हुआ है।सेटलमेंट में इनकी मुख्य मांगे ये थी की इनकी सैलरी पैकेज तीन साल में बढ़ना चाहिए लेकिन मालिक ने ये कह दिया की कंपनी घाटे में चल रही है।हालांकि मालिक सिर्फ एक बहाना बना रहा है क्योंकि ये कम्पनी घाटे में कभी नहीं है।इसी प्लांट की बदौलत मालिक ने कई सारे प्लांट खोले है। और जब भी ये लोग मालिक को बोलते है की मदर प्लांट के साथ के साथ अपने ऐसा क्यों किया ?तो मालिक का कहना है की कोई भी मदर प्लांट नहीं है।और ये बात इनलोगो ने लेबर डिपार्टमेंट में उठाई थी लेकिन इन्हे यही जवाब मिला की कोई मदर प्लांट नहीं है।और सरेआम गुंडागर्दी और झूठ बोलै जाता है।आज आज इनलोगों की स्थिति ऐसी हो गई की ये रोड़ पर आ गए है।इसकी शिकायत इनलोगों ने श्रम विभाग में की है

नंद किशोर जी साझा मंच मोबाईल वाणी के माध्यम से उद्योग विहार फेज-1 के एक श्रमिक से बातचीत कर रहे है।बातचीत के दौरान एक श्रमिक ने बताया की ये इस कम्पनी में सैम्पलिंग करते है है फैशन का पीस बनाते है और येसामान विदेश में ऑनलाइन बिकता है। इस काम के कंपनी ने ओवरटाइम काम के लिए नए कारीगरों की बहाली की।और जो पुराने कारीगर है उनका वेतन एक महीने पहले से रोक कर दिया जा रहा है।और ये सब बिना बताये कारीगरों को भर्ती कर लिया गया और अब कहा जा रहा है की ये कंपनी की समस्या है।इन्हे काम करते हुए दो महीने बीत गए ये तीसरा महीना चल रहा है।और इनलोगों को दो महीने का ओवरटाइम का पैसा नहीं मिला है।कंपनी इनलोगों को तरह हजार रुपये तनख्वाह देती है।और सैलरी स्लीप भी इनलोगों को दी जाती है।लेकिन ईएसआई कार्ड कार्ड अभी तक नहीं मिला है और मांगने पर बोलै जाता है की मिल जायेगा।इनका कहना है की अगर काम करने के दौरान कोई दुर्घटना वाश अगर इनका पेअर टूट जायेगा तो उसके इलाज के लिए उन्हें खुद का पैसा लगाना पड़ेगा।कारीगरों का कहना है की कंपनी समय से इनलोगों को वेतन दे क्योंकि इन्हे घर का किराया भी देना पड़ता है। और इनका कहना है की ये मेहनत मजदूरी करते है और अपने परिवार का भरण-पोषण करते है। इनके लिए ये संभव नहीं है की ये अपना दस-बारह हजार फँसा कर रख सके।

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साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से नन्द किशोर ने एक श्रमिक से बातचीत किये और श्रमिक भाई ने बताया कि, नापिनो ऑटो एंड इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड 753/754 उद्योग बिहार फेज-5 में काम करते थे। जहाँ, 22 महीने से सेटलमेंट का पेपर कोर्ट में दर्ज किया गया था लेकिन 4 अक्टूबर को बिना किसी कारण कम्पनी बंद कर दिया गया।

साझा मंच के नंद किशोर से बात करके अच्छा लगा। एक श्रोता कहते हैं कि जो भी मजदुर काम करते है तो उन्हें हर परेशानियों का सामना करना पड़ेगा क्योकि मजदूरों का सुनने वाला आज कोई भी नहीं है।

दिल्ली एनसीआर के उद्योग विहार से हमारे संवाददाता नन्द किशोर ने साझा मंच के माध्यम से बताया कि अब श्रमिक राशन के लिए भी हो रहे हैं प्रताड़ित हो रहे है। देश के कोने कोने से आये सभी श्रमिक दिल्ली और उसके आस-पास के इलाको में रहते है। वे श्रमिक अपनी ज़िन्दगी काफी कष्टमय तरीके से बिता रहे है। जो भी श्रमिक बंधू जिस भी मकान में रह रहे है , मकान मालिक उन्हें अपने यहाँ से ही राशन लेने को मज़बूर करते है। और अगर कोई भी श्रमिक बाहर से राशन लेकर आता है , तो उसके साथ मारपीट की जाती है। मकान मालिकों के यहाँ मिलने वाला राशन भी बाजार भाव से काफी मॅहगा होता है। इस तरह श्रमिक दोनों तरह से लुटे जा रहे है

दिल्ली एनसीआर के उद्योग विहार से हमारे संवाददाता नन्द किशोर ने साझा मंच के माध्यम राम प्रसाद जी के साथ बातचीत की।इस बातचीत में राम प्रसाद जी ने बताया कि कोई भी व्यक्ति अगर किसी कम्पनी में नई नौकरी को ज्वाइन करना चाहता है , तो उसे पहले यह आश्वस्त कर लेना चाहिए कि वहां मासिक वेतन सरकार द्वारा निर्धारित मानक के अनुसार ही मिलना चाहिए। साथ ही महीने का वेतन समय पर मिलता हो। उस कम्पनी में पीएफ और ईएसआई की सुविधा की जानकारी भी पहले से ही ले लेनी चाहिए। इस सब बातो को ध्यान में रखकर कोई भी श्रमिक अपने जीवन को बेहतर बना सकते है