दिल्ली एनसीआर के कापसहेड़ा गाँव से महेंद्र पासवान साझा मंच के माध्यम से बताते हैं, कि उधोग बिहार फेज-3/403 में ये काम करते हैं। इस कम्पनी में कार्य करने वाले मजदूरों की एक ही समस्या है, कि मालिक ना ही समय पर वेतन देते हैं और ना ही ओवरटाइम का पैसा। पहले हर माह सात तारीख को वेतन मिल जाया करता था। परन्तु अब माह के अंत में वेतन दिया जाने लगा। तंग आ कर जब मजदुर काम बंद कर दिए, तो माह की शुरुआत में वेतन मिलने लगा। काम करने के बाद दुबारा मजदूरों के साथ समय पर वेतन ना मिलने की समस्या होने लगी। जब मजदुर मैनेजर से बात किए तो उन्होंने बताया कि मालिक पैसे नहीं दे रहे हैं।
दिल्ली एनसीआर के उद्योग विहार से नरेश कुमार वर्मा साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि उनके एक मज़दूर साथी है ,जो एक कंपनी में काम करते है। इस कम्पनी में कई तरह से मजदूरों के साथ शोषण किया जाता है। जब कम्पनी ठेकेदार के माध्यम से अपने यहाँ नौकरी देती है , तो कुछ भी गलत होने पर उक्त ठेकेदार के विरुद्ध पूरा एक्शन भी लेना चाहिए । परन्तु कम्पनी ऐसा नहीं करती है ,क्योंकि कम्पनी को केवल कार्य से मतलब होता है। कम्पनी द्वारा प्रत्येक मजदूरों का खाता खुलाया गया फिर भी ठेकेदार के द्वारा कैश में वेतन दिया जाता है। ताकि सरकार को यह ज्ञात ना हो सके कि मजदूरों को कितना वेतन दिया जा रहा ह। अधिकतर ठेकेदार छः हजार से अधिक किसी भी मजदुर को वेतन नहीं देती है लेकिन जब सरकार द्वारा जाँच कि जाती है तो मजदूरों को यह समझा दिया जाता है कि वे किसी से भी यह ना कहें कि उन्हें छः हजार रूपए मिलता है। इस मुददे पर यदि कोई मजदुर आवाज उठाते हैं तो उन्हें नौकरीसे निकाल देने की धमकी दी जाती है। साथ ही मजदूरों को पीएफ का भी लाभ नहीं मिलता है। अतः इस समस्या पर जल्द से जल्द करवाई किया जाए।
दिल्ली एनसीआर के उद्योग विहार से पवन कुमार साझा मंच के माध्यम से बताते हैं, कि वे नापिनो ऑटो लिमिटेड फेज-5 753 में कार्य करते हैं। चार अक्टूबर को कम्पनी ने अंदर से ताला बंद कर दिया था। जिस कारण मजदुर आज सड़क पर आ गए हैं। इस बात को मानने वाला आज कोई नहीं है लेकिन कोर्ट का यह कहना है कि कम्पनी गैर तरीके से ताला बंदी की है। परन्तु मालिक इस बात को मानने से इंकार कर रहे हैं। इस बात को लेकर नापिनो ऑटो लिमिटेड हेड ऑफिस जो मानेसर में स्थित है जहाँ धरना दिया जा रहा है। लेकिन कोई मदद नहीं की जा रही है। जबकि कोर्ट ने यह कहा है कि कम्पनी ताला खोल कर मजदूरों को पुनः काम में शामिल करें।
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दिल्ली उद्योग बिहार से राज कुमार साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं, कि वे प्लॉट नंबर-165 में स्थित एक कम्पनी में लगभग डेढ़ माह से काम कर रहे हैं। लेकिन कम्पनी द्वारा ना ही वर्करों का पीएफ काटा जाता है और ना ही किसी तरह की सुविधा मुहैया की जाती है। साथ कम्पनी के नाम का कोई बोर्ड भी नहीं लगाया गया जिससे लोग जान सकें की कौन सी कम्पनी है। कम्पनी में कार्यरत वर्करों को आईकार्ड भी नहीं दिया गया है। साथ ही यदि काम पर दस मिनट देरी से आते हैं, तो 4 घंटे का पैसा काट लिया जाता है। जब कोई वर्कर इसका विरोध करता हैं, तो उसे काम से निकाल देने की धमकी दी जाती है।
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दिल्ली उद्योग बिहार से एस.के आजाद साझ मंच मोबाइल वाणी के माधजीम से बताते हैं कि वे उद्योग बिहार फेज-1/193 रिचा में काम करते थे। नौकरी छोड़ देने के बाद पीएफ का पास बूक किसी दुर्घटना में जल गया अब एस.के आजाद के पास कोई साबुत नहीं की वे अपना पीएफ का पैसा निकाल सकें। केवल कम्पनी का पीसी नुम्बे हैं तो क्या इसके माध्यम से पीएफ का पैसा निकाला जा सकता है कोई सुझा दिया जाए
इंटरनेशनल प्लॉट नंबर-115
दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम से हमारे संवाददाता राम कारण ने धर्मेंद्र जी के साथ बातचीत की जंहा धर्मेंद्र जी ने बताया कि वे एक कम्पनी में एक साल दो माह से काम कर रहे थे।कम्पनी बंद होने के बाद कर्मियों को निकालने के लिए नोटिस दिया गया। लेकिन अब नोटिस पूरा होने के बाद कर्मियों को पैसा नहीं मिला।एक माह बाद चेक देने के लिए कर्मियों को बुलाया गया जिसमे बीस हजार रूपए का चेक दिया जा रहा है। लेकिन कर्मियों ने चेक लेने से इंकार कर दिया क्योंकि ने पूरा पैसा कैश में लेने की मांग की है
