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मुंगेर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में शुक्रवार को 3416 लोगों का कोरोना जांच कराया गया नहीं मिले एक भी व्यक्ति संक्रमित इसकी जानकारी सिविल सर्जन डॉक्टर हरेंद्र कुमार आलोक ने दिए उन्होंने कहा कि यह सब टीका का असर है लोग टीका लगा रहे हैं कोरोना को दूर भगा रहे हैं

मुंगेर से अबोध ठाकुर की रिपोर्ट

बिहार राज्य के जिला मुंगेर से विपिन कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से प्राइवेट टीचर रंजीत कुमार निराला से साक्षात्कार लिए है।जिसमे रंजीत कुमार निराला का कहना है कि इस वैश्विक महामारी कोरोना काल ने शिक्षा तंत्र को पूरी तरह से बंद कर दिया है।इस कोरोना काल में प्राइवेट टीचर की जो बदहाली हुई है वह किसी से छुपा नहीं है। इस कोरोना काल में शिक्षा का स्तर काफी गिरा है।स्कूलों में शिक्षा का स्तर में विद्यार्थी की उपस्थिति 30 - 50% ही हो पा रही है। जिस कारण से पहले की आर्थिक मार से उबर पाने का कोई मौका नहीं मिल पा रहा है। इस महामारी में लाख प्रयास करने के बावजूद भी माहमारी से उभारना बहुत मुश्किल पड़ रहा है। इस परेशानी की वजह से बहुत सारे शिक्षक अपने प्रोफेशन को बदलकर और भी दूसरे काम को करने में लग गए हैं। कुछ ही लोग किसी प्रकार अपने आप को बचा कर रख पाए है और फिर से इस प्रोफेशन को अपना कर जीवन शुरू करने का प्रयास कर रहे हैं। वही कहते है कि शिक्षक के साथ-साथ और भी लोग फिर चाहे वह मजदूर हो या एक राजमिस्त्री सभी की स्थिति प्रतिदिन बिगड़ती ही जा रही है।

बिहार राज्य के मुंगेर जिला के नौवागढ़ी उत्तरी पंचायत के महादेवपुर गांव से विकास कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से एक निवासी चंदा देवी से साक्षात्कार लिए है जिसमे उनका कहना है कि बेटी को शिक्षा इसलिए करना चाहिए क्योकि अगर उनकी पढ़ी-लिखी होने पर वह आगे अपने परिवार को अच्छी तरह चला सके तथा पढ़ लिखकर अफसर बन सके जिससे देश का नाम रौशन हो, इसीलिए बेटी की शिक्षा जरूरी है.

बिहार राज्य के जिला मुंगेर के चौखंडी गाँव से विपिन कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से महिला आशा देवी से साक्षात्कार लिए है,जिसमे उनका कहना है कि वह लोगो को बताती है कि बेटा बेटी में किसी भी तरह का कोई अंतर नहीं है। बेटी को इसलिए पढ़ाना बहुत जरूरी है क्योकि बेटी अगर शिक्षित हो तो समाज शिक्षित होता है तथा घर का परिवार भी शिक्षित होता है। वही वह कहती है कि वह गर्भवती महिला का प्रसव कराती है तो उससे उनकी कुछ आमदनी हो जाती है है उसके साथ ही वह गाँव के लोगो को जागरूक भी करती है की बेटी को पढ़ाना चाहिए।

बिहार राज्य के जिला मुंगेर से विपिन कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से रघुनाथ शाह से साक्षात्कार लिए है।जिसमे रघुनाथ शाह का कहना है कि वह भूंजा बेचने का काम करते हैं।वह कहते है कि लॉकडॉन के कारण ठेला बंद हो गया था जिससे उन्हें अपने परिवार का भरण पोषण करने में दिक्कत आ रही थी। उन्हें सरकारी योजनाओ का लाभ नहीं मिलता है जिससे उन्हें जीवन यापन करने में परेशानी होती है।उनके घर का काम उनके बच्चे काम करते है, सरकार के द्वारा वैसा कुछ सहयोग नहीं मिला।इसलिए वह झालमुड़ी बेचकर किसी तरह से अपने परिवार का जीवन यापन करते हैं।

जिला भर में 01 से 30 सितंबर तक मनाए जा रहे राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान गर्भवती महिलाओं, बच्चों को स्तनपान कराने वाली माताओं, छोटे- छोटे बच्चों की माताओं सहित अन्य लोगों को पोषाहार के साथ - साथ योगाभ्यास के लिए भी प्रेरित कर रही हैं कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर अर्चना कुमारी। जिला के नौवागढ़ी क्षेत्र अंतर्गत इटहरी गांव स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर कार्यरत कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर अर्चना कुमारी लोगों को पोषक तत्वों से युक्त संतुलित आहार लेने के लिए प्रेरित कर रही हैं ताकि गर्भवती महिलाओं, धातृ माताओं के साथ-साथ छोटे- छोटे बच्चों का सही और संतुलित शारीरिक और मानसिक विकास हो सके।

गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से बचाने और सही पोषण के लिए जागरूक करने के उद्देश्य से मंगलवार को जिला भर के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों पर गोद भराई की रस्म की गई । धरहरा प्रखण्ड के सुदूर ग्रामीण जनजातीय गांव बंगलवा में समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) वंदना पांडेय ने स्वयं अपने हाथों से जनजातीय महिला की गोद भराई की रस्म निभायी । इस अवसर पर सीडीपीओ पूनम कुमारी, राष्ट्रीय पोषण मिशन कि जिला समन्वयक मुक्ता कुमारी, लेडी सुपरवाइजर माधवी शाह सहित की कई अधिकारी और आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका उपस्थित थी।

मंगलवार को सदर प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों पर सेविकाओं द्वारा प्रथम गर्भवती महिलाओं को फल ,चूड़ी ,बिंदी इत्यादि सामग्री देकर महिलाओं को गोद भराई की रस्म निभाई गई वही बाल विकास परियोजना पदाधिकारी मुंगेर ग्रामीण सुषमा सुष्मिता कुमारी द्वारा बताया गया कि यह रस्म हर माह सेविका द्वारा गर्भवती महिलाओं गोद भराई कर निभाई जाती है इस माह पोषण पखवाड़ा के तहत सभी आंगनवाड़ी सेविका अपने केंद्रों पर अच्छे ढंग से गोद भराई रस्म निभाई