त्योहारी सीजन में मिठाई का स्वाद लोगों को महंगा पड़ सकता है। हानिकारक व नकली सामग्री से बनी मिठाई खपाने की तैयारी दिवाली पर कई दुकानदारों ने कर रखी है। हालांकि कई दुकानदारों के यहां शुद्धता की पूरी गारंटी भी है। शहर में छोटी-बड़ी मिला कर करीब पांच दर्जन मिठाई की दुकाने है। इनमें से कई दुकानों में खोआ से बनी मिठाई नकली है। इन दुकानों पर नकली मिठाई विक्रेता 60 से 90 रुपये प्रति किलो की दर से बर्फी, मिल्ककेक आदि होलसेल में उपलब्ध कराते है जिसे दुकानदार 200 से 250 रुपये किलों की दर से ग्राहकों को उपलब्ध कराते है। इन नकली मिठाईयो के साथ ही नकली खोवा और छेना भी बाजार में भारी मात्रा में उपलब्ध है। दुकानदारों ने बताया कि मूल रूप से मिठाई बनाने के लिए खोया, घी, तेल, दूध, आर्टिफिशियल फ्लेवर और कलर का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन मिलावट करने वाले अधिक मिठाई बना पैसे कमाने की लालसा में इसमें चॉक, यूरिया, साबुन और व्हाइटनर मिलाका मिठाई तैयार करते हैं। जो सेहत को कई तरह के नुकसान पहुंचाते हैं। मिठाई की दुकानों पर वैधता तिथि लिखने व निरीक्षण करने के लिए भले ही शासन ने निर्देश जारी कर रखा है। लेकिन जिले के अधिकारियों पर इसका कोई असर नहीं पड़ रहा है। दीपावली नजदीक आते ही मिठाई सहित अन्य खाद्य पदार्थों की मांग काफी बढ़ जाती है। इस खबर को सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
INNOVATORS IN HEALTH (INDIAN) भारत देश के बिहार राज्य के दलसिंहसराय में एक व्यापक सामुदायिक-स्वास्थ्य कार्यक्रम का निर्माण कर रहे हैं, जो 220,000 ग्रामीण निवासियों का समुदाय है। IIH 2010 में तपेदिक (टीबी) के साथ शुरुआत की और 2015 में मातृ और नवजात स्वास्थ्य को शामिल करने के लिए विस्तार किया। नियोजित विस्तार में मानसिक स्वास्थ्य और बच्चे का अस्तित्व शामिल है।खबर सुनने के लिए ऑडियो क्लिक करें।
बिहार राज्य के समस्तीपुर जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता जानकारी दे रहे हैं की तमाम प्रयास के बावजूद समेकित बाल विकास परियोजना अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन में कोई सुधार नहीं हो रहा है। इस कारण आंगनबाड़ी केंद्रों से गर्भवती, धात्री माताओं सहित बच्चों को किसी भी प्रकार का कोई लाभ नहीं मिल रहा है। बताया जाता है कि अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्र समय पर नही खुलते हैं। कुछ खुलते भी हैं तो उस पर बच्चों की किलकारियां सुनाई नहीं देती है। वहीं कई आंगनबाड़ी केंद्र का सरकारी भवन रहने के बावजूद सेविकाओं द्वारा अपने-अपने घरों पर आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन किया जाता है। जहां उनके द्वारा जम कर मनमानी की जाती है। गढसिसई पंचायत के आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 141 पर बच्चों की उपस्थिति बहुत कम थी। सेविका सहायिका का कोई अता पता नहीं नहीं था। स्थानीय लोगों ने बताया कि केन्द्र कब खुलती और कब बंद होती है। किसी को कोई पता नहीं चलता है। बताया कि केंद्र से लाभुकों को किसी भी प्रकार का कोई लाभ नहीं मिलता है। ग्रामीणों ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन नियमानुसार नहीं होने से बच्चों को नाश्ता व भोजन नहीं मिल रहा हैं। ग्रामीणों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जब आंगनवाड़ी केंद्र से उन्हें कोई लाभ मिलता ही नहीं है तो इसे बंद ही कर देना चाहिए।
लोक आस्था का महापर्व छठ को महज एक सप्ताह शेष रह गये हैं, लेकिन प्रखंड स्थित छठ घाटों की साफ-सफाई अभी तक शुरू नहीं की जा सकी है। मुख्यालय स्थित शिवगंगा पोखर, धमनी पोखर समेत विभिन्न घाटों की साफ-सफाई अभी तक शुरू नहीं की गयी है। रोशनी एवं छठ व्रतियों की सुविधाओं के लिये आवश्यक इंतजाम नहीं किये गये है। छठ घाटों पर कचरा एवं गन्दगी का अम्बार लगा हुआ है। पोखर भिंडा पर घास पतवार का साम्राज्य फैला हुआ है। इतना ही नहीं कचरा व कांच के टुकड़े फेंके जाने से पोखर की स्थिति दयनीय हो गयी है।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
नीतीश सरकार ने किसानों के लिए खजाना खोल दिया है। सरकार ने किसानों को 3500 रुपये देना का फैसला किया है। बिहार सरकार वैसे किसानों को 3500 रुपये देगी, जिनके इलाके को सरकार ने सुखा ग्रस्त घोषित किया है। दरअसल, गुरुवार को बिहार कैबिनेट की बैठक हुई थी। नीतीश कैबिनेट ने कुल 21 एजेंडों पर मुहर लगाई है। कैबिनेट ने बिहार के 11 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। सरकार इन प्रभावित जिलों में हरेक परिवार के खाते में 3500 रुपये भेजने का फैसला किया है। बारिश के दगा देने से इलाके के किसान आफत में फंस गए हैं। बारिश नहीं होने से कृषि कार्य के ऐन मौके पर खेतों की मिट्टी की परत सूखने लगी है। थोड़ा बहुत खेतों में रोपनी करने वाले किसान अब फसल बचाने को जद्दोजहद कर रहें हैं। खेती के लिए लगाए गए बिचड़ा वाली खेत में मोटी दरारें पड़ गई है। ऐसी स्थिति में इलाके के किसानों में जिले को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की मांग उठने लगी है। ऐसे में निजी संसाधनों की बूते सिचाई करना संभव नहीं है। फिलहाल किसानों की सभी उम्मीदें बारिश पर ही निर्भर है। अगर बारिश हुई तो थोड़ी बहुत खेतों में जो रोपनी हुई है फसल बच जाएगी, नहीं तो किसानों को खेतों में धान के उत्पादन की जगह कुछ हाथ आएगा।खबर सुनने के लिए ऑडियो क्लिक करें।
चौबीस अक्टूबर को दीपावली का पर्व है। जिले व प्रखंड वासी इस पर्व को पूरी धूमधाम से मनाते है। विशेषकर बच्चों को दीपावली को लेकर खासा उत्साह रहता है। रंग बिरंगे मोमबती, दिए, फुलझड़ी और फटाकों से देर रात तक आतिशबाजी होती है। मगर इस बार बढ़ते कीमतों से हर कोई परेशान नजर आ रहा है। लोग सीमित खर्चो के बीच दीपावली मनाने की तैयारी कर रहे है।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
विद्यापतिनगर । लोक आस्था के महापर्व छठ को लेकर बीडीओ प्रकृति नयनम ने विभिन्न छठ घाटों का निरीक्षण किया। उन्होंने सर्वप्रथम पंचायत सचिवों से नदी व पोखरों के घाटों की स्थिति की जानकारी ली। इसके बाद गंगा की सहायक नदी वाया नदी के बालकृष्णपुर मड़वा, मऊ धनेशपुर दक्षिण, शेरपुर, बजिदपुर पंचायतों सहित अलग-अलग गांवों के छठ घाटों का जायजा लिया। इस दौरान छठ घाट स्थल की साफ-सफाई, बिजली व्यवस्था व छठ व्रतियों के सुविधाओं की भी जानकारी ली। बीडीओ ने बताया कि वाया नदी के जलस्तर में लगातार दूसरी बार बढ़ोतरी के कारण छठ घाट की स्थिति काफी निराशाजनक है। हालांकि अब जलस्तर काफी तेजी से घट रहा है। आगामी चार-पाँच दिनों में स्थिति पूर्णतया स्पष्ट हो पायेगा। आस्था के चार दिवसीय छठ महापर्व पर व्रतियों को छठ घाटों पर किसी तरह की परेशानी न हो इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने वर्तमान स्थिति को देखते हुए एहतियातन यथा संभव अपने- अपने घरों में अथवा गड्ढा खुदाई कर कुछ समूहों में छठ पर्व मनाने हेतु अनुरोध किया हैं। साथ ही घाट की स्थिति पूजा योग्य होने पर सुरक्षित बैरिकेडिंग के साथ सावधानी पूर्वक मनाने की निर्देश दिया है। मौके पर मुखिया संजीत कुमार साहनी, दिनेश सिंह,रामप्रवेश राय, मुकेश कुमार, पंचायत सचिव सत्यनारायण झा आदि मौजूद रहे।
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के द्वारा सेफ स्विम कार्यक्रम के तहत गोताखोर का प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया यह प्रशिक्षण शिविर विद्यापतिनगर प्रखंड अंतर्गत वाया नदी में की गई जहां तकरीबन 25 गोताखोर को इस नदी में उतारा गया और वहां पर गोताखोर को प्रशिक्षण दी गई ताकि किसी भी आपदा के समय में नदी में डूबने वाले लोगों को कैसे बचाया जा सके उसको लेकर ट्रेनिंग दिया गया जिला आपदा प्रबंधन के पदाधिकारी ने बताया कि हर एक लोगों को इसकी जानकारी होनी चाहिए हरे के व्यक्तियों को ट्रेनिंग लेनी चाहिए ताकि बगल के पोखर में अगर कोई व्यक्ति डूब जाए तो उसे ससमय रहते बचाया जा सके वही एसडीआरएफ भी वहां पर मौजूद थे अधिकारी ने बताया कि छठ पर्व को लेकर विशेष रूप से लोगों को ट्रेनिंग दी जा रही है छठ के समय में अधिकतर लोगों की मौत डूबने से हो जाती है और उसे रोकने के लिए यह ट्रेनिंग दिया जा रहा है ।ज़्यादा जानने के लिए इस ऑडियो को क्लिक करें।
बिहार राज्य के समस्तीपुर जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता राजकुमार ठाकुर ने बताया की एक अधूरा दो से पूरा नारों के साथ बूस्टर डोज लगवाना बहुत जरूरी है। खुद लगाएं एवं आस-पड़ोस के लोगों को भी टीका लगाने के लिए प्रेरित करें क्योंकि आस पड़ोस के साथ हम सभी लोग टीका ले लेंगे तो कोरोना वायरस के गाइडलाइन फॉलोअप करते हुए कोरोना वायरस से बच सकते हैं।
बिहार राज्य के समस्तीपुर जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता राजकुमार ठाकुर ने बताया की कोविड-19 से बचाव के लिए बार बार हाथ धोते रहना चाहिए। जब हाथ स्पष्ट रूप से गंदे न हो तब भी साबुन और सेनेटाइजर से हाथ हो धोना चाहिए। अगर बुख़ार,खासी है तो डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर से मिलने के दौरान अपने मुँह और नाक को ढकें। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
