झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग से गीता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि किसानों का शहरों की ओर पलायन  कम आय, शिक्षा और  स्वास्थ्य समस्याओं  से उपजी समस्या है, जबकि गाँव में ही कृषि का विकल्प,जैसे- फूड प्रोसेसिंग, जैविक खेती, पशुपालन,इत्यादि खोजना एक दीर्घकालिक और बेहतर समाधान है। लेकिन,अचानक खर्चे के लिए पैसे चाहिए और इस जरूरत के लिए मौसमी पलायन भी जरूरी हो जाता है। कृषि का विकल्प गाँव में खोजना एक स्थायी समाधान हो सकता है। कम पानी वाली फसलों को लगाया जा सकता है। गाँव के पास ही कृषि से जुड़े छोटे उद्योग (जैसे- दूध डेयरी, अचार-पापड़, जूट लगा सकते हैं। मछली पालन, मधुमक्खी पालन, या जैविक खेती भी किसानों के लिए एक उत्तम विकल्प है।

इस आख़िरी कड़ी में पानी बचाने और ज़मीन को सँभालने के आसान तरीकों पर बात होती है। खेती और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की समझ इस एपिसोड का मुख्य संदेश है |

अधिकांश व्यक्तिगत पट्टे पुरुषों के नाम पर होते हैं. सामुदायिक अधिकारों में भी महिलाओं को भी कम प्रतिनिधित्व दिया जाता है. इसके चलते महिलाएं केवल खेत मजदूर बनकर रह जाती हैं. महिलाओं को इसका नुकसान यह होता है कि बैंक, बीमा तथा दूसरी सरकारी सहायता का लाभ नहीं उठा पाती है, जो उनके लिए चलाई जा रही हैं.

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विष्णुगढ़ प्रखंड के मडमो अंतर्गत लोकनाथ महतो एवं दुखन महतो का बैल वज्रपात से मौत हो गई वहीं पूरन महतो का एक बकरा भी वज्रपात की चपेट में आने से घटना स्थल पर मौत हो गई। किसानों ने सरकार से उचित मुआवजा की मांग प्रशासन से किया जा रहे हैं। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

झारखंड राज्य के हजारीबाग जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता गीता सिंह जानकारी दे रही हैं कि बिजली का करंट लगने से एक गाय की मौत हो गई। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

विष्णुगढ़ प्रखंड के अचलजामू में शुक्रवार दोपहर को वज्रपात की चपेट में आने से किसान नंदकिशोर महतो के तीन व कैलाश महतो का एक मवेशी की मौत घटनास्थल पर हो गई। आपदा प्रबंधन विभाग से उचित मुआवजा की मांग को लेकर अंचल में आवेदन दिए जाने की कोशिश की जा रही है।

दोस्तों, फसले बिना केमिकल के जी जाती हैं पर पानी के बिना तो जमीन बेजान ही है! मवेशियों में भी कहां इतनी जान होगी कि वो खेत जोत पाएं, हमें दूध दे पाएं! पानी तो सबको चाहिए , पर... साथियों, हमें बताएं कि पानी के प्राकृतिक स्त्रोत खत्म होने से आपको किस तरह की दिक्कतें हो रही हैं? क्षेत्र के कुएं, पोखर और तालाब प्रशासन ने खत्म कर दिए हैं या फिर वे सूख रहे हैं? क्या इन्हें बचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं? अगर स्त्रोत सूख रहे हैं तो आपके पास पीने के पानी का क्या विकल्प है? क्या खेतों में पानी नहीं पहुंचने से फसलों को नुकसान हो रहा है? पानी की कमी के कारण किसानों और पशुपालकों को किस तरह की दिक्कतें हो रही हैं? खेतों में पानी पहुंचाने के लिए आपने क्या व्यवस्था की है और क्या यह पर्याप्त है? दोस्तों, पानी अहम है क्योंकि ये हमें जीवन देता है और आप तो जानते ही हैं.... जिंदगी जरूरी है!