विश्व कैंसर दिवस पर सदर अस्पताल स्थित एनसीडी सेल में बुधवार को एक विशेष कैम्प का आयोजन किया गया। इस कैम्प में करीब 70 मरीजों के दांत का इलाज किया गया।जिसमें 5 मरीजों में तम्बाकू सेवन का खतरनाक असर देखा गया। जिसे एक बार बाहर से जांच कराने की सलाह दी गयी। बताया जाता है कि जिले में 15 प्रतिशत महिला व 30 प्रतिशत व्यस्क पुरुष व 22 प्रतिशत युवा तम्बाकू से लेकर सिगरेट और बीड़ी का सेवन करते हैं। इसका खुलासा पिछले साल एक सर्वे रिपोर्ट में हुआ था। जिले में करीब सौ व्यक्ति कैंसर के मरीज हैं जिसमे 20 से अधिक मरीज को मुंह का कैंसर है। इसकी पुष्टि आईएमए अध्यक्ष डॉ आशुतोष शरण ने की। उन्होंने बताया कि तम्बाकू का सेवन जिले में 50 प्रतिशत लोग करते हैं। सबसे अधिक कैंसर मुंह का मिल रहा है जो तम्बाकू व तम्बाकू निर्मित सिगरेट व गुटका खाने पीने से हो रहा है। बताया कि स्कूली बच्चे भी नशा के लिये केमिकल निर्मित ह्वाइटनर सूंघ रहे हैं। इससे भी कैंसर होने का खतरा है। एनसीडी सेल के नोडल अधिकारी डॉ पीके सिन्हा ने बताया कि कैंसर से बचाव के लिये तम्बाकू छोड़ना होगा। मुंह का कैंसर तम्बाकू सेवन से ही होता है। इस मौके पर भाभा कैंसर संस्थान के डॉ. शालनी चौधरी, उत्कर्ष उज्वल, मधु कुमारी थीं। 5 आठ दिव्यांगों को मिली बैटरी चालित ट्राइसाइकिल मुख्यमंत्री दिव्यांगजन सशक्तीकरण छात्र योजना अंतर्गत बुधवार को 8 दिव्यांगजनों को बैटरी चालित ट्राइसाइकिल हेलमेट के साथ प्रदान की गई। इन लाभुकों में बनकटवा, ढाका, कल्याणपुर, फेनहरा, रामगढ़वा व तुरकौलिया के 1-1 व मधुबन प्रखंड के दो लाभुक शामिल हैं। प्रभारी सहायक निदेशक ममता झा के द्वारा लाभुकों को हरी झंडी दिखा विदा किया गया। इस योजना अंतर्गत जिले को 2022- 23 में 353 बैट्री चालित ट्राइसाइकिल आवंटित करने का लक्ष्य प्राप्त था। वितरण समारोह का आयोजन जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण कोषांग के द्वारा किया गया।
धान का उन्नत प्रभेद राजेन्द्र नीलम कम पानी में भी अधिक उत्पादन देकर किसानों की अनिश्चय वर्षा की स्थिति में आमदनी बढ़ायेगा। इस प्रभेद के साथ-साथ छह अन्य उच्च गुणवत्ता के धान के प्रभेद केविके द्वारा उपलब्ध कराया गया है। जलवायु परिवर्तन के कारण भारत समेत दुनिया के अधिकांश देशों में कम बारिश हो रही है। इससे कृषि पर पड़ रहे प्रभावों को कम करने के लिए कृषि विज्ञानियों ने कम पानी में उगने वाली फसलों की नई प्रजातियों की खोज शुरू कर दी है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के विज्ञानियों ने कम पानी में अच्छी उपज देने वाली धान की नई प्रजाति विकसित की है। नई प्रजाति का नाम ह्यराजेंद्र नीलमह्ण दिया गया है। इसे सेंट्रल वेरायटी रिलीज कमेटी ने पूरे देशभर के लिए जारी भी कर दिया है।कृषि विवि की ओर से बीज तैयार करने के लिए इसे बिहार राज्य बीज निगम को मुहैया करा दिया गया है। अब प्रत्येक साल निगम किसानों को बीज उपलब्ध करा रहा है। बिहार के साथ इस प्रजाति का ट्रायल झारखंड, कर्नाटक एवं गुजरात में हुआ था।
अपशिष्ट पदार्थों से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का निर्माण कर विद्यालय परिवार के समक्ष प्रस्तुत कर छात्रों ने सबको हैरत में डाल दिया है। वर्ग आठ के तीन छात्रों ने घर के अनुपयोगी सामग्री को संकलित कर उपकरण को तैयार किया है। राजकीय मध्यविद्यालय विद्यालय अरेराज बालक के एचएम अरविंद कुमार दुबे ने बताया कि वर्ग आठ की छात्रा श्रेया कुमारी ने कार्ड बोर्ड व घर के बेकार सामग्रियों के सहयोग से एक छोटे कूलर का निर्माण किया है जो मानक स्तर खरा उतर रहा है। वर्ग आठ का ही एक छात्र शिवम कुमार ने वाटर डिस्पेंसर का निर्माण किया है तो दूसरी ओर वर्ग आठ के ही एक और छात्र रामप्रकाश कुमार ने टेसला क्वायल का निर्माण कर विद्यालय परिवार को आश्चर्यचकित कर दिया है।
सीमाई शहर रक्सौल को विद्युत की अनियमित आपूर्ति की समस्या से अब निजात मिलनेवाली है। इसके लिए विभागीय स्तर पर कवायद शुरू कर दी गई है। विद्युत विभाग ने इसके लिए रक्सौल शहर में दो और सब स्टेशन बनाने का निर्णय लिया है। विभाग ने इसके निर्माण के लिए अंचल प्रशासन को एक पत्र देकर भूमि को चिन्हित करने का आग्रह किया है। अंचल प्रशासन ने भूमि को चिन्हित करने की कवायद भी शुरू कर दी है। भूमि को चिन्हित करने के साथ ही इसका निर्माण कार्य भी आरंभ कर दिया जाएगा।इसके निर्माण होने से जहां रक्सौल शहर को विद्युत की अनियमित आपूर्ति की समस्या से निजात मिल जाएगी।शहर समेत आसपास के औधोगिक इकाइयों के सफल संचालन में बिजली की समस्या आड़े नहीं आएगी। सात- सात हजार स्क्वायर फीट में बनेगा सब स्टेशनरक्सौल शहर में बनने वाले दो नये पावर सब स्टेशन सात - सात हजार स्क्वायर वर्ग फीट जमीन में बनेगा। जो 18 मीटर लंबा व 15 मीटर चौड़ा जमीन में बनेगा। जिसके निर्माण पर करीब 9-9 करोड़ रुपये सहित कुल 18 करोड़ खर्च आएगी। 20-20एमवीए क्षमता का होगा सब स्टेशनरक्सौल शहर में बनने वाले दो नये पावर सब स्टेशन 20-20 एमवीए क्षमता का होगा। जिसकी क्षमता 16-16 मेगावट की होगी। कहां कहां होगी विद्युत आपूर्ति रक्सौल शहर में बनने वाले दो नये पावर सब स्टेशन से शहरी फीडर को विद्युत आपूर्ति की जाएगी। शहर समेत इससे सटे औद्योगिक इकाइयों को भी विद्युत आपूर्ति की जाएगी। कहते हैं अधिकारीअवर प्रमंडल विद्युत कार्यालय रक्सौल के सहायक अभियंता सुनील रंजन कुमार का कहना है कि रक्सौल शहर में दो नये पावर सब स्टेशन बनाने की विभाग की योजना है।
सीमा से सटे शहर में पुलिस व उत्पाद विभाग की छापेमारी में पंद्रह शराबियों को अलग अलग स्थान से गिरफ्तार किया गया। इसकी पुष्टि पुलिस इंस्पेक्टर नीरज कुमार व उत्पाद इंस्पेक्टर अभिषेक आनंद ने की। बाटा चौक के पास चेकिंग के दौरान सौरव कुमार अरेराज, संतोष साह रामनगर पश्चिम चंपारण, धीरज कुमार मटियारा नेपाल आदि पकड़े गये।
मानसून आने में थोड़े विलंब की घोषणा के बाद मौसम विभाग ने कहा है कि जून महीने के दौरान मानसूनी बारिश सामान्य से थोड़ी कम हो सकती है। दूसरी चिंताजनक बात यह है कि उत्तर पश्चिमी भारत जिसमें दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश,पंजाब, राजस्थान और समस्त उत्तर राज्य आते हैं, वहां भी मानसून के दौरान अपेक्षाकृत कम बारिश के आसार हैं। मौसम विभाग ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि मानसून के दूसरे चरण में अल नीनो उत्पन्न होने की आशंका है, बावजूद इसके कुल मानसूनी बारिश सामान्य रहेगी। मानसून के चार महीनों जून-सितंबर के दौरान 87 सेंटीमीटर बारिश होती है। इस बार इसके 96 फीसदी बारिश होने का पूर्वानुमान जारी किया गया है। जो सामान्य बारिश है। आईएमडी के पर्यावरण निगरानी और अनुसंधान केंद्र (ईएमआरसी) के प्रमुख डी शिवानंद पई ने कहा, पूर्वोत्तर में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। उन्होंने कहा, जून में सामान्य के 92 फीसदी या उससे कम बारिश के आसार हैं। जून में सामान्य बारिश 16.54 सेंटीमीटर होती है। देश के उत्तर पश्चिमी हिस्से में भी बारिश सामान्य के 92 फीसदी रहने की संभावना है। जबकि बाकी तीन क्षेत्रों मध्य भारत, दक्षिण और पूर्वोत्तर में 94-104 फीसदी बारिश का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है।
बाजार में मधुमेह की नई-नई दवाएं आ रही हैं पर बीमारी काबू में नहीं आ रही है। ऐसे में वर्ल्ड जर्नल ऑफ डाइबिटीज में प्रकाशित एक ताजा अध्ययन आशा की किरण प्रतीत होता है। इसके अनुसार मधुमेह का उपचार प्रकृति की गोद में छिपा हुआ है और जरूरत सिर्फ गहराई से शोध करने की है। इससे मधुमेह की रोकथाम के मौजूदा प्रयासों को नई दिशा मिल सकती है। एम्स कल्याणी और जिपमेर पांडिचेरी के शोधकर्ताओं की हाल में प्रकाशित शोध रिपोर्ट में पब मेड डाटाबेस को आधार बनाया गया है। इसके अनुसार प्रकृति में 400 औषधीय पौधे मौजूद हैं, जो रक्त में शर्करा की मात्रा को कम करने में कारगर हो सकते हैं। टाइप-2 मधुमेह को नियंत्रण में करने में सक्षम इन पौधों में से अभी तक 21 के बारे में ही प्रभावी अध्ययन और पर्याप्त आंकड़े उपलब्ध हो पाए हैं। जबकि आठ औषधीय पौधों को लेकर आंशिक आंकड़े ही एकत्र हो पाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार एलोपैथिक दवाओं की भांति हर्बल औषध के मामले में भी सक्रिय तत्व की जानकारी का होना जरूरी है। यह भी पता हो कि यह कंपाउंड पौधों के किस हिस्से से प्राप्त होता है। जैसे जड़, छाल, फल, पत्ते, फूल या बीज आदि में। यह हैं 21 पौधे जिन 21 पौधों को लेकर पुख्ता आंकड़े हैं, उनमें करेला, विजयसार, जामुन, जीरा, इसबगोल, तिल, दारुहरिद्रा, एलोवेरा, बेल, मेथी, अदरक, नीम, शकरकंद, आमला, लहसुन, हल्दी, गुड़ुची, दालचीनी, कुंदुकी तथा कटहल शामिल है। इनमें मौजूद सक्रिय तत्व जो शर्करा कम करते हैं उनकी पहचान हा चुकी है और वह पौधे के किस भाग से प्राप्त किए जा सकते है, यह भी पता है। प्राचीन ग्रंथों में जानकारी प्रकृति में अनेक तरह की गुणकारीर औषधियां मौजूद हैं। इनकी जानकारी आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में उपलब्ध है। चूंकि भारत में मधुमेह रोगियों की संख्या बहुत ज्यादा है। इसलिए आधुनिक चिकित्सा के तहत इन औषधों पर शोध चिकित्सा क्षेत्र को एक नई उपलब्धि दे सकता है।
खरीफ मौसम शुरू होने के बावजूद ज्वार,बाजार व मड़ुआ का अनुदानित बीज नहीं पहुंचा है। मुख्यमंत्री तीव्र बीज विस्तार योजना के तहत अभी तक जिले को अनुदानित धान बीज की आपूर्ति नहीं हुई है। जिला कृषि विभाग के द्वारा सभी बीज का आवंटन किया जा चुका है। लेकिन बीज की आपूर्ति नहीं होने से किसान बारिश होने से प्राइवेट बीज दुकानों से बीज खरीद रहे हैं। जबकि जिले में ज्वार व बाजार की खेती के लिए 2 क्विंटल अनुदानित बीज का आवंटन प्राप्त है। मुख्यमंत्री तीव्र बीज विस्तार योजना के तहत 157.2 क्विंटल अनुदानित धान बीज का आवंटन प्राप्त है। इस बीज को एक राजस्व ग्राम के दो किसानों को 90 प्रतिशत अनुदान पर आधा एकड़ के लिए उपलब्ध कराना है। जिले को दस वर्ष से कम आयु वाले 2628 क्विंटल धान बीज व दस वर्ष से अधिक आयुवाले 1285 क्विंटल धान बीज की आपूर्ति हुई है। दस वर्ष से अधिक आयुवाले धान बीज पर प्रति किलो 15 रुपये व दस वर्ष से कम आयुवाले धान बीज पर प्रति किलो 20 रुपये अनुदान निर्धारित है। डीएओ चंद्रदेव प्रसाद ने बताया कि शीघ्र ही बीज की आपूर्ति होगी। इसको लेकर बीज वितरकों को निर्देश दिया गया है।
ईकेवाईसी नहीं भरने से किसान सम्मान निधि योजना से जिले के1.03 लाख किसान वंचित हो गये हैं। इन किसानों को योजना से लाभ दिलाने के लिए कृषि विभाग अभियान शुरू किया है। इसको लेकर कृषि समन्वयक, किसान सलाहकार,एटीएम व बीटीएम को इस कार्य का जिम्मा सौंपा गया है। प्रत्येक कृषि अधिकारी व कर्मियों को 200-200 किसानों का ईकेवाईसी भरने का टास्क दिया गया है। एक सप्ताह में इस कार्य को पूरा कर रिपोर्ट तलब की गयी है। बंद हो गयी राशि योजना के तहत किसान रजिस्ट्रेशन के साथ आधार संख्या, बैंक खाता,जमीन का रकबा आदि अपलोड करना होता है। साथ ही विभागीय पोर्टल पर पीएम किसान सम्मान निधि योजना का लाभ लेने वाले किसानों को ईकेवाईसी से लिंक कराना है। लेकिन जिले के किसानों के द्वारा ईकेवाईसी नहीं भरे जाने से उनके खाते में राशि का आना बंद हो गया है। जिले में करीब पांच लाख किसानों को योजना से प्रति वर्ष किस्तों में 6 हजार रुपये का लाभ मिलता है।
शहर के चांदमारी गुमटी से सटे बलुआ टाल मुहल्ला के वार्ड नंबर 34 में सड़क पर जल-जमाव का नजारा बराबर देखने को मिलता है। रेलवे द्वारा बनाए जा रहे रेल ट्रैक से आस-पास के घरों का पानी निकल कर सड़क पर ही गिरता है। जिससे मुहल्ले के लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। मुहल्ले के गली में रहने वाले सड़क पर जलजमाव से परेशान रहते है। जलजमाव से सड़ांध भरा दुर्गंध के कारण घर में रहना मुश्किल हो गया है। जल-जमाव से कीड़े- मकोड़े भी उड़कर कीचेन में जाता है। इससे घर के बच्चों को हैजा सहित कई तरह की बिमारियों से आक्रांत होने का डर सताते रहते है। संगीत विद्यालय की ओर जाने वाले इस सड़क में जल-जमाव के कारण बच्चे काफी परेशान रहते है। जल-जमाव से निजात के लिए इस मुहल्ले के लोग कई बार प्रशासन व रेल प्रशासन से गुहार भी लगाया है। लेकिन मामला वैसे का वैसा ही है। जल-जमाव की समस्या से निजात के लिए इस सड़क के किनारे नाला बनने से ही मुहल्लेवासियों को राहत दिया जा सकता है।
