उत्तरप्रदेश राज्य के मिर्ज़ापुर ज़िला के मझवां प्रखंड से संगीता मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि वो मशरूम की खेती कर रोज़गार करना चाहती है। इसके लिए प्रशिक्षण और पैसों की आवश्यकता है
उत्तरप्रदेश राज्य के भदोही ज़िला से गोविन्द प्रसाद की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से भागवानी से हुई। भागवानी कहती है कि वो खेती कर रहे है। इसमें अच्छा इनकम हो जाता है। गेहूं चावल का खेती करते है।
उत्तरप्रदेश राज्य के मिर्ज़ापुर ज़िला के कोण प्रखंड के ग्राम रामपुर से कलावती मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि ये परवल की खेती करती है और इन्हे पचास हज़ार रूपए की आवश्यकता है
भारत में खेती से जुड़ें कामों में महिलाओं की भागीदारी 70% के लगभग है जबकि वास्तिविकता में यह 15 प्रतिशत के करीब आती है सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 30% महिलाओं को ही “किसान” के तौर पर जाना जाता है. यह भारत में कामकाजी महिलाओं का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा खेती और उससे जुड़े कार्यों में लगा हुआ है.
उत्तरप्रदेश राज्य के मिर्ज़ापुर ज़िला के ग्राम रामापुर से मीरा देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि इन्हे समूह की मीटिंग में रोज़गार की जानकारी मिली। वो सब्ज़ी की खेती करती है। सब्ज़ी बेच कर बच्चों को अच्छे से पढ़ा लिखा रही है।
उत्तरप्रदेश राज्य से हमारे श्रोता भोला मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि वो खेती करना चाहते है। इसके लिए उन्हें 20 हज़ार रूपए की आवश्यकता है।
उत्तरप्रदेश राज्य के भदोही ज़िला के डीग प्रखंड से सरोजा देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महिलाओं के नाम जमीन होने से महिलाएँ खेती करती
उत्तरप्रदेश राज्य के भदोही ज़िला से गोविन्द प्रसाद की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से जय कुमार से हुई। जय कुमार कहते है कि वो खेती बाड़ी करते है।खेती बाड़ी से घर चलाना मुश्किल होता है। लेकिन खेती के अलावा कभी व्यापार करने का सोचे नहीं है। इन्हे गोविन्द प्रसाद द्वारा व्यापार सम्बंधित प्रशिक्षण करने की जानकारी मिली
उत्तरप्रदेश राज्य के उगापुर से दुर्गावती मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि वो सब्ज़ी का रोज़गार करना चाहती है
अधिकांश व्यक्तिगत पट्टे पुरुषों के नाम पर होते हैं. सामुदायिक अधिकारों में भी महिलाओं को भी कम प्रतिनिधित्व दिया जाता है. इसके चलते महिलाएं केवल खेत मजदूर बनकर रह जाती हैं. महिलाओं को इसका नुकसान यह होता है कि बैंक, बीमा तथा दूसरी सरकारी सहायता का लाभ नहीं उठा पाती है, जो उनके लिए चलाई जा रही हैं.
