आज की युवा पीढ़ी महिला अधिकारों को एक नए नजरिए से देख रही है। जहां पहले अधिकारों की लड़ाई सड़क से संसद तक सीमित थी, वहीं अब यह लड़ाई डिजिटल दुनिया तक पहुंच चुकी है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डिजिटल कैंपेन यह सब उसके नए हथियार हैं.

उत्तर प्रदेश राज्य के मिर्जापुर ज़िला के मंझवा ब्लॉक से एक श्रोता कहती हैं कि महिलाओं को जमीनी अधिकार मिलना चाहिए।

भारत में खेती से जुड़ें कामों में महिलाओं की भागीदारी 70% के लगभग है जबकि वास्तिविकता में यह 15 प्रतिशत के करीब आती है सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 30% महिलाओं को ही “किसान” के तौर पर जाना जाता है. यह भारत में कामकाजी महिलाओं का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा खेती और उससे जुड़े कार्यों में लगा हुआ है.

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उत्तरप्रदेश राज्य के मिर्ज़ापुर ज़िला के मझवां प्रखंड से 28 वर्षीय चिंकू मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि जमीन में बेटियों का नाम हो ताकि वो आगे चल कर स्वावलम्बी बन सके। खेती बाड़ी कर सके।

उत्तर प्रदेश राज्य के मिर्ज़ापुर ज़िला के कोण से सरिता सरोज मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि जमीन मिलेगा तो घर बना कर खुद का व्यवसाय करेंगे

उत्तर प्रदेश राज्य के मिर्ज़ापुर ज़िला से राजन बिंद मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते हैं कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार को मदद करनी चाहिए। जिससे की वो कोई व्यवसाय शुरू कर सकें

उत्तर प्रदेश राज्य से आशा देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि महिलाओं के नाम से जमीन होना चाहिए ताकि वह आत्मनिर्भर बन सके

उत्तर प्रदेश राज्य के मिर्ज़ापुर जिला के मझवां ब्लॉक से संजू देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि महिलाओं के नाम से जमीन होना चाहिए

उत्तर प्रदेश राज्य के मिर्ज़ापुर ज़िला के मंझवा से विमला देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि महिलाओं के नाम जमीन होना चाहिए