उत्तर प्रदेश राज्य के भदोही ज़िला के औराई ब्लॉक से सीमा वर्मा मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं की उन्हें महिलाओं के भूमि अधिकार के बारे में ग्रामवाणी पर चल रहे कार्यक्रम से मिला है आज भी कई घरों में महिला को अपने अधिकार की जानकारी नहीं है। ससुराल वाले लोग भी बहुओं को इस अधिकार से वंचित रखते है। महिलायें बस अपनी जरूरतों के बारे में सोच कर ही जीवन बिता देती है। लेकिन जब ग्रामवाणी सुना तो जानकारी हुआ की महिलाओं को भी जमीन में हक मिलता है। मैंने भी अपने घर में ये बातें साझा की तो बोला गया की हमारे मरने के बाद ही तुम्हारे नाम जमीन होगी। लेकिन बिना जमीन और प्रॉपर्टी के महिलाओं को कई जोखिमों का सामना करना पड़ता है। महिलाओं के अपने भविष्य के लिए और उनके बच्चे के भविष्य के लिए ये करना भी बहुत जरुरी होता है। महिलायें डर से अपना कदम आगे नहीं बढ़ाती है। अपने हक़ के लिए वो नहीं बोलती क्योंकी उसे लगता है घर में इससे कलह का माहौल होगा। आज भी कई लोग पुराने सोच के साथ ही आगे बढ़ रहे हैं

उत्तर प्रदेश राज्य के मिर्ज़ापुर ज़िला के मंझवा से बेली मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि महिलाओं के नाम जमीन होनी चाहिए

उत्तरप्रदेश राज्य के भदोही ज़िला के डीग प्रखंड से 30 वर्षीय सीमा देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि इनके नाम से जमीन नहीं है। आवास भी नहीं है। प्रधान कुछ नहीं देते है

उत्तरप्रदेश राज्य के भदोही ज़िला के डीग प्रखंड से 45 वर्षीय विजय लक्ष्मी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि जमीन इनके पति के नाम पर है। इसके नाम से कुछ नहीं है। आवास भी नहीं मिला है

उत्तरप्रदेश राज्य के भदोही ज़िला के डीग प्रखंड से 25 वर्षीय उषा मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि उनके पास खुद की जमीन नहीं है। उन्हें अपने नाम से जमीन लेना है।

उत्तरप्रदेश राज्य से रेखा देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि उनके पास जमीन नहीं है। सरकारी योजना का लाभ भी नहीं मिला है

उत्तरप्रदेश राज्य के भदोही ज़िला के जंगल पुर गांव से आकांक्षा मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि इनके घर में शौचालय नहीं है। किसी भी आवासीय योजना का लाभ भी नहीं मिला है। सरकार की ओर से हमें किसी भी प्रकार का कोई लाभ नहीं मिला है

आज की युवा पीढ़ी महिला अधिकारों को एक नए नजरिए से देख रही है। जहां पहले अधिकारों की लड़ाई सड़क से संसद तक सीमित थी, वहीं अब यह लड़ाई डिजिटल दुनिया तक पहुंच चुकी है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डिजिटल कैंपेन यह सब उसके नए हथियार हैं.

उत्तर प्रदेश राज्य के मिर्जापुर ज़िला के मंझवा ब्लॉक से एक श्रोता कहती हैं कि महिलाओं को जमीनी अधिकार मिलना चाहिए।

भारत में खेती से जुड़ें कामों में महिलाओं की भागीदारी 70% के लगभग है जबकि वास्तिविकता में यह 15 प्रतिशत के करीब आती है सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 30% महिलाओं को ही “किसान” के तौर पर जाना जाता है. यह भारत में कामकाजी महिलाओं का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा खेती और उससे जुड़े कार्यों में लगा हुआ है.