उत्तरप्रदेश राज्य के भदोही ज़िला के औराई प्रखंड से गोविन्द प्रसाद की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से बेला से हुई।बेला कहती है कि वो समूह से जुड़ी है। समूह से पैसे लेकर कालीन बीनते है
उत्तरप्रदेश राज्य के भदोही ज़िला के औराई प्रखंड से गोविन्द प्रसाद की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से रानी देवी से हुई। रानी देवी कहती है कि वो समूह से जुड़ी है। समूह से पैसे लेकर दो गाय पालन कर रही है। दूध बेचते है। इस कारोबार को बढ़ाना है
उत्तरप्रदेश राज्य के भदोही ज़िला के औराई प्रखंड के ग्राम सायर से सुनीता देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से विजय कुमार से बात कर रही है।विजय कहते है कि उन्हें बकरी पालन करना है। बकरी पालन के लिए प्रशिक्षण लेना है।
उत्तर प्रदेश राज्य के भदोही जिला से रीता देवी की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से जोशीला से हुई। जोशीला यह बताना चाहती हैं कि वह भैंस पालन करना है
उत्तर प्रदेश राज्य के भदोही जिला के डीग ब्लॉक से रीता देवी की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से सीमा सरोज से हुई। सीमा सरोज यह बताना चाहती हैं कि वह बकरी पालन करना है। इनको पैसों की जरूरत है
उत्तर प्रदेश राज्य के भदोही जिला के डीग ब्लॉक के ग्राम सभा कलानुआ से रीता देवी की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से सावित्री से हुई। सावित्री यह बताना चाहती हैं कि वह दूकान करना चाहती हैं
उत्तरप्रदेश राज्य के भदोही ज़िला के डीग प्रखंड से रीता देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से आरती दुबे से हुई। आरती कहती है कि ये गाय पालन करती है। दूध बेचकर कारोबार करेंगे। इस कारोबार को बढ़ाना चाहते है
उत्तरप्रदेश राज्य के भदोही ज़िला से गोविन्द प्रसाद की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से पूजा सरोज से हुई। पूजा सरोज कहती है कि ये दूकान खोली है। नया दूकान खोली है जिसमे इन्होने पांच हज़ार पूँजी लगाया है।ये अपने दूकान को बड़ा करना चाहती है पर इन्होने कभी पैसों को लेकर बैंक से बात नहीं की है
उत्तरप्रदेश राज्य के भदोही ज़िला से गोविन्द प्रसाद की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से औराई प्रखंड निवासी कृष्णा सरोज से हुई। कृष्णा सरोज कहते है कि वो कालीन का कार्य करते है। यह कार्य घर पर ही करते है। कारोबार की शुरआत करने में 20 से 30 हज़ार रूपए खर्च हुआ था। अभी के समय अकेले कालीन का कार्य कर रहे है। कारोबार बड़ा करना चाहते है पर गाँव में मज़दूर प्रवास कर जाते है।
उत्तरप्रदेश राज्य के भदोही ज़िला से गोविन्द प्रसाद की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से शैलेन्द्र कुमार से हुई। शैलेन्द्र कहते है कि ये इंटरलॉकिंग का कारोबार करते है। ये इंटरलॉकिंग कंक्रीट का निर्माण कर मार्केट में देते है। इस कारोबार को लगाने में 15 -20 लाख रूपए पूंजी लगी। ये 11 ठेकेदारों को अपना बनाया माल देते है। पूंजी को देखते हुए कारोबार को बड़ा करने का सोचे है
