सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा का लाभ पर्याप्त लोगों को नहीं मिल पा रहा है, जिससे मजदूर पलायन करने को विवश हैं. रांची जिले के खलारी प्रखंड के कई पंचायतों में मनरेगा अधिनियम की धज्जियां उड़ा कर कार्यों में जेसीबी का प्रयोग किया जा रहा है. मशीन से काम होने से मजदूरों को रोजगार नहीं मिल रहा है, और मजदूरों का हक मारा जा रहा है. मनरेगा के तहत संचालित तालाब, डोभा, मिट्टी खुदाई सहित अन्य योजनाओं में जेसीबी मशीन का प्रयोग हो रहा है.  प्रखंड प्रशासन जान कर भी अनजान बना हुआ है. बता दें कि मनरेगा के तहत एक मजदूर को चालू वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों की गारंटीकृत रोजगार प्रदान करना है, लेकिन खलारी में ऐसा होता नहीं दिख रहा है. 

इस कार्यक्रम में हम जानेंगे कि कैसे गाँव के लोग मिलकर अपने समुदाय को मजबूत बना रहे हैं। जल संरक्षण, ऊर्जा बचत और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सामूहिक प्रयासों की ताकत को समझेंगे। साथ ही, यह भी जानेंगे कि कैसे छोटे-छोटे कदम मिलकर बड़े बदलाव ला सकते हैं और गाँव के विकास में योगदान दे सकते हैं। क्या आपके समुदाय में ऐसे समूह हैं जो जल संरक्षण, आपदा प्रबन्धन या संसाधन प्रबन्धन पर काम करते हैं? अगर हाँ, तो हमें बताएं कि वे कैसे काम करते हैं? और अगर नहीं, तो इस कार्यक्रम को सुनने के बाद क्या आप अपने समुदाय में ऐसे सामूहिक प्रयास शुरू करने के लिए तैयार हैं?

इस कार्यक्रम में हम जानेंगे जल संरक्षण और ऊर्जा बचत से जुड़ी सरकारी योजनाओं के बारे में। साथ ही, यह कार्यक्रम बताएगा कि आप इन योजनाओं का लाभ कैसे उठा सकते हैं और अपने गाँव के विकास में कैसे योगदान दे सकते हैं। स्वच्छ पानी और सतत ऊर्जा के महत्व को समझते हुए, हम एक बेहतर कल की ओर कदम बढ़ाएंगे। क्या जल सरंक्षण की योजनाओं के बारे में आपने भी सुना है, क्या आप इन योजनाओं का लाभ आपने भी उठाया है, क्या आपके गाँव में जल सरंक्षण की कोई प्रेरणादायी कहानी है ?

इस एपिसोड के मुख्य विषय, वर्षा जल संग्रहण, को दर्शाता है। "बूंद-बूंद से सागर" मुहावरा छोटे प्रयासों से बड़े परिणाम प्राप्त करने की भावना को व्यक्त करता है। यह श्रोताओं को प्रेरित करता है कि वर्षा की हर बूंद महत्वपूर्ण है और उसका संग्रहण करके हम बड़े बदलाव ला सकते हैं। क्या आप वर्षा जल को इक्कट्ठा करने और सिंचाई से जुडी किसी रणनीति को अपनाना चाहेंगे? और क्या आपके समुदाय में भी ऐसी कहानियाँ हैं जहाँ लोगों ने इन उपायों का इस्तेमाल करके चुनौतियों का सामना किया है?

महिलाओं की लगातार बढ़ती हिस्सेदारी और उसके सहारे में परिवारों के आर्थिक हालात सुधारने की तमाम कहानियां हैं जो अलग-अलग संस्थानों में लिखी गई हैं, अब समय की मांग है कि महिलाओं को इस योजना से जोड़ने के लिए इसमें नए कामों को शामिल किया जाए जिससे की ज्यादातर महिलाएं इसका लाभ ले सकें। दोस्तों आपको क्या लगता है कि मनरेगा के जरिए महिलाओँ के जीवन में क्या बदलाव आए हैं। क्या आपको भी लगता है कि और अधिक महिलाओं को इस योजना से जोड़ा जाना चाहिए ?

मनरेगा में भ्रष्टाचार किसी से छुपा हुआ नहीं है, जिसका खामियाजा सबसे ज्यादा दलित आदिवासी समुदाय के सरपंचों और प्रधानों को उठाना पड़ता है, क्योंकि पहले तो उन्हें गांव के दबंगो और ऊंची जाती के लोगों से लड़ना पड़ता है, किसी तरह उनसे पार पा भी जाएं तो फिर उन्हें प्रशासनिक मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इस मसले पर आप क्या सोचते हैं? क्या मनरेगा नागरिकों की इच्छाओं को पूरा करने में सक्षम हो पाएगी?

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मैक्लुस्कीगंज 9 फरवरी 2024 फ़ोटो 1 - आश्रित परिवार से मिलने पहुंची मनरेगा लोकपाल. मैक्लुस्कीगंज पहुंची मनरेगा लोकपाल पुष्पलता जायसवाल. हादसे वाली कुआं का स्थल निरीक्षण कर आश्रित परिवार से मिली. ज्ञात हो कि खलारी प्रखण्ड क्षेत्र के लपरा पंचायत, झखराटांड़ में कुआं खुदाई के दौरान मिट्टी धसने व दबकर मजदूर बैजनाथ महतो की मौत हो गयी थी. वहीं एक अन्य महिला मजदूर ने भागकर जान बचाई थी. इस बाबत मनरेगा लोकपाल पुष्पलता जायसवाल ने घटना स्थल पर हादसे वाली कुवां का निरीक्षण किया. आश्रित की पत्नी सीता देवी व पुत्र राजेश कुमार व राजकुमार से मिली सवेंदना प्रकट कर कही मनरेगा के तहत व प्रावधान के अनुसार सहायता राशि का भुगतान किया जाएगा. तत्पश्चात लोकपाल ने घटना में घायल महिला मजदूर काजल कुमारी से भी मिली और जानकारी एकत्रित किया. मौके पर मनरेगा जेई रमेश गुप्ता, रोजगार सेवक विश्वरंजन कुमार, ग्राम प्रधान हरि पाहान सहित अन्य मौजूद थे.

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