उत्तरप्रदेश के गुरुग्राम से नंदकिशोर ने साझा मंच के माध्यम से अन्य लोगों से बात की। लोगों ने बताया कि कोरोना के कारण काम मिलने में दिक्क्त हो रही है
उत्तरप्रदेश के गुरुग्राम से नन्द किशोर ने साझा मंच के माध्यम से एक चाय विक्रेता से बात की। उन्होंने बताया कि उनकी नौकरी कोरोना के समय चली गयी। उसके बाद उन्होंने अपना काम शुरू किया। इससे उनमे आत्मनिर्भता बढ़ी है
उत्तरप्रदेश के गुरुग्राम से नंदकिशोर ने साझा मंच के माध्यम से एक मजदुर से बात की। उन्होंने बताया कि श्रमिकों की स्थिति अच्छी नहीं है। काम का बहुत दिक्क्त हो रहा है, लॉकडाउन के बाद काम बंद हो गया है। उन्होंने बताया कि पैसे रोज के हिसाब से मिलते है। सुरक्षा को लेकर स्थिति ठीक है। जूता हेलमेट इत्यादि मिलता है सुरक्षा के लिए। एम्बुलेंस की सुविधा भी रहती है। लेकिन मेडिकल जांच शिविर नहीं होती है
दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम रोड से नन्द किशोर ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि कंपनियों में काम ज़्यादा है ,इसी बीच नव वर्ष के अवसर पर उन्हें छुट्टी दी गई तो श्रमिकों में ख़ुशी की लहर है। आज के दिन बाज़ारों में भीड़ देखी जा रही है
नमस्कार दोस्तों मैं नंदकिशोर। आज मैं कुछ मजदुर भाइयों से बात करने आया हूँ। अधिक जानकारी के लिए ऑडियो देखें
नमस्कार दोस्तों मैं नंदकिशोर। दोस्तों अब मजदूरों को ओमिक्रोण की चिंता सत्ता रही है। उनको डर है कि पिछले वर्ष की तरह कहीं इस वर्ष भी सारे काम बंद ना हो जाए। जिस चौक पर वो काम के लिए खड़े रहते है वहां पुलिस उनको खड़े रहने से मना करती है
नमस्कार दोस्तों मैं नन्द किशोर। यहाँ सूर्य वार के पीछे वाली सड़क पर ईंटे निकली हुई है। जिससे सारा पानी सड़क पर आ जाता है। बरसात के समय में स्थिति और भी भयावह हो जाती है
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दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम से नन्द किशोर की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से राजमिस्त्री रामपति से बात हुई। इन्होने बताया कि उनका काम प्रतिदिन नहीं चल रहा है। दिहाड़ी उन्हें 450 रूपए मिलता है। महीना पूरा होने पर उन्हें वेतन मिलता है। वो जहाँ काम करते है वही समीप में वो टेंट लगा कर रहते है जिससे उनका रेंट का पैसा बचता है। उन्हें काम के स्थान पर सुरक्षा के उपकरण उपलब्ध करवाए जाते है
दिल्ली एनसीआर से हमारे श्रमिक भाई साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि वो एक भवन निर्माण श्रमिक है तथा दिल्ली में अभी पर्दूषण की वजह से मजद्दूरों को काम मिलना मुश्किल हो गया है। साथ ही कह रहे है कि काम न मिलने की वजह से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। काम करने के बाद कभी एक दिन में दिहाड़ी मिलता है तो कभी पांच दिन में मिलता है। उनका कहना है की यदि कब्भी काम करने के बाअद उन्हें पैसा नहीं मिलता है तो वो यूनियन का सहारा लेंगे
