दिल्ली के आईएमटी मानेसर गुड़गांव से दीपक ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि कर्मचारी राज्य बीमा ईएसआई से पेंशन धारक को पिछले तीन महीनों से पेंशन नहीं मिली। पेंशन धारक लगातार अपने-अपने ब्रांच ऑफिस में लाइफ सर्टिफिकेट दो-दो बार जमा करा चुके हैं लेकिन अब तक उन्हें पेंशन नहीं मिली है।

उत्तरप्रदेश राज्य के ग़ाज़ीपुर जिला से प्रमोद वर्मा ने ग़ाज़ीपुर मोबाइल वाणी के माध्यम से मोबाइल वाणी पर चलाये जा रहे कार्यक्रम 'मेरा मुखिया कैसा हो' के संदर्भ में मोहम्मदाबाद ब्लाक के आदिलाबाद गांव के ग्रामीण ऑसिम मोहम्मद से खास बातचीत हुई। उन्होंने बताया कि उन्हें ऐसा प्रधान चाहिए जो रोजगार दे और गाँव का विकास भी करे। सरकार द्वारा लाभूकों को ग्रामीण आवास योजना का लाभ मिलना चाहिए। जॉब कार्ड ,आधार कार्ड सभी का बनना चाहिए ,इस के लिए किसी को घुस ना देना पड़े, इसका खास ख्याल रखें मुखिया

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दिल्ली से हस्मत अली और इनके साथ टेलीकॉम सेंटर के मालिक सहजाद हैं वे साझा मंच के माध्यम से कहते हैं कि स्टार सुविधा केंद्र वजीरपुर जेजे कॉलोनी में प्रवासी मजदूरों को दी जा रही हैं सुविधाएं

दिल्ली से संवाददाता रफ़ी की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बहादुरगढ़ हरियाणा के निवासी मनोहर लाल कश्यप से हुई। मनोहर लाल कश्यप कि वे उनके पारिवारिक वसीहत में बहन की कोई संतान नहीं होने कारण वसीहत के क़ानूनी हक़दार मनोहर लाल कश्यप ही थे। मनोहर लाल कश्यप के भाई रमेश ने वसीहत पर केस कर दिया। वसीहत प्रीतम पुरान के उत्तरी पश्चमी क्षेत्र में स्थित है। रोहणी कोर्ट में 22 दिसम्बर 2015 को मनोहर लाल कश्यप ने केस फाइल किया। इतने समय हो जाने के बाद भी कोर्ट किसी भी नतीज़े तक नहीं पहुंची।केस की पहली तारिक 3 फरवरी 2016 को मिली थी। अब तक तारिक ही बढ़ रही है। ऐसे मुद्दों को पहले आपस में सुलझाना चाहते हैं। जब बात नहीं बनती तब आदमी क़ानूनी मामलों को समझने के लिए वकील से सलाह लेता है और केस फाइल करता है। वकील भी पहले आपस में मामला सुलझाना चाहता है ,विपक्ष दाल को नोटिस के माध्यम से सुलह करने के लिए कहा जाता है। इन सभी प्रक्रियाओं से हमारे वकील ने मामले को सुलझाने का प्रयास किया। मनोहर लाल कश्यप ने बताया कि कोर्ट में अदालत की कार्यवाही को वकील समझाने की कोशिश करता है। कोर्ट में हुए अदालत की कार्यवाही की पूरी प्रतिक्रिया अंग्रेजी में होता है। यदि इसकी प्रतिलिपि हिंदी में मिले तो केस वाला व्यक्ति किसी और से भी सलाह मशवरा कर सकते हैं और हिंदी में समझने में सहूलियत होगी। तारीख़ मिलने पर उन्हें कोर्ट जाने के लिए एक दिन की छुट्टी लेना पड़ता है। कभी कभी कोर्ट जाना भी बेकार हो जाता है। बहुत समय ऐसा लगता है कि उनका कोर्ट में उपस्थित होना जरुरी नहीं होता । जज जब पुरे मामले को समझने लगते हैं तो हर दो -तीन महीने में जज बदल जाते हैं। जिससे समय की बर्बादी होती है। मनोहर लाल कश्यप ने बताया कि अब तक उनके मुक़दमे के लिए चार जज बदल चुके हैं ,नए जज के आने पर वे मामला समझे में 2 -3 तारीख दे देते हैं। ऐसी व्यवस्था की जाये जिससे मुक़दमे ऑनलाइन तकनिकी से जोड़ा जाये और जिससे जानकारी ली जा सके ,आदेश प्राप्त किया जा सके साथ ही अदालत की कार्यवाही को ऑनलाइन भी देखा जा सके या मुकदमा देख में समस्या हो तो मुकदमा सुन सके। जिससे समय की बचत हो सके और कारोबार को भी कोई नुक्सान ना हो। लेकिन जज को फ़ोन में कभी कभी चीज़ों को समझने में ग़लतफ़हमी हो सकती है और मुकदमा हार भी सकते हैं। इसलिए ऐसा एप बनाया जाये जिसमे मुकदमा का दिन भर का व्यौरा उनतक पहुंच जाये।साथ ही ऐसी ब्यवस्था भी की जाये जिससे यहाँ मुकदमा करने के समय ही पता चल उसके कि इस मुकदमे में उनका कितना खर्च होगा और मुकदमा जितमे के कितने प्रतिशत चांसेज़ है ,तो बहुत अच्छा होगा

दिल्ली के श्री राम नगर कॉलोनी से हस्मत अली ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से दिल्ली के श्री राम कॉलोनी खजुरी खास के निवासी मज़हर अली से उनके कोर्ट में चल रहे केस के मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। जहाँ उन्होंने बताया कि कोर्ट में वकील व जज एक पक्ष को ही ज्यादा अहमियत देते हैं।और पूरी तरह से वकील पर निर्भर हो जाते हैं। यदि लोगों के पास पैसे है तो वे जज के पास तक अपनी पहुंच बना कर अपना काम आसानी से करवा सकते हैं। साथ जब मज़हर अली और उनके पुरे परिवार जेल में बंद थे तो अकेले वकील पुरे मामले को समझ कर जज के पास पेश किये और साडी बातो को समझा कर मज़हर अली को जीत दिलाई। इस पुरे केस में वकील ने दो लाख रूपए लिए थे।यदि कोर्ट की प्रक्रिया को ऑनलाईन कर दिया जाये तो इससे सभी का समय बचेगा।साथ ही घर बैठे अदालत की सारी कार्यवाई को फोन पर ही सुनने को मिल जाएगा तो बहुत अच्छा होगा। लोगों का पैसा बच जाएगा, समय बच जाएगा। क्योंकि सुनवाई की तारीख छूट ना जाये इसलिए लोग अपना काम -काज छोड़ कर कोर्ट जाते हैं। जिसके कारण इसका बुरा प्रभाव उनके काम पर भी पड़ता है। वहीँ दूसरी ओर जब दो पक्षों के बीच कोई मतभेद हो जाता है तो लोग सबसे पहले पुलिस,मुखिया या सरपंच के पास ना जा कर गाँव के दबंग व्यक्ति के पास जाना बेहतर समझते हैं। अगर आईवीआर द्वारा अदालती कार्यवाही को सुनने का विकल्प मिले तो इसे भी सुनना पसंद करेंगे। अगर अदालत द्वारा ऐसी सुविधा उपलब्ध हो जिसमे केस दाख़िल करने से जुड़े सारे खर्च और केस जीतने के अनुमान बता दें तो इससे श्रमिकों को बहुत फ़ायदा है वो अपने परिवार का सारा ख़र्च व्यवस्थित कर पाएँगे।

बिहार राज्य के मुंगेर जिला के बरियारपुर के सदर प्रखंड के तारापुर दियारा पंचायत से अंकित चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से पूर्व मुखिया बमबम चौधरी से साक्षात्कार लिए है। जिसमें बमबम चौधरी का कहना है कि जब वह मुखिया थे तो गरीबों के लिए विशेष कार्य किये किये उनके द्वारा बहुत सरकारी योजना के अंतर्गत काम किया गया है जैसे वृद्धा पेंशन ,इंदिरा आवास ,चापानल योजना और मनेरेगा के द्वारा जो कार्य किया गया वह लोगो के द्वारा सराहा गया।निर्माण,सड़क निर्माण इत्यादि।इन्होंने आरक्षण नीति के तहत पंचायत के विकास में विपक्ष में आ गए।आदर्श ग्राम रहिया को विकास की किरणों से जोड़ा।

बौरना पंचायत के ग्रामीण से मेरा मुखिया के बारे मे जाने



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