उत्तरप्रदेश राज्य के ग़ाज़ीपुर जिला से प्रमोद वर्मा ने ग़ाज़ीपुर मोबाइल वाणी के माध्यम से मोबाइल वाणी पर चलाये जा रहे कार्यक्रम 'मेरा मुखिया कैसा हो' के संदर्भ में मोहम्मदाबाद ब्लाक के आदिलाबाद गांव के ग्रामीण ऑसिम मोहम्मद से खास बातचीत हुई। उन्होंने बताया कि उन्हें ऐसा प्रधान चाहिए जो रोजगार दे और गाँव का विकास भी करे। सरकार द्वारा लाभूकों को ग्रामीण आवास योजना का लाभ मिलना चाहिए। जॉब कार्ड ,आधार कार्ड सभी का बनना चाहिए ,इस के लिए किसी को घुस ना देना पड़े, इसका खास ख्याल रखें मुखिया

बिहार राज्य के मुंगेर जिला के बरियारपुर के सदर प्रखंड के तारापुर दियारा पंचायत से अंकित चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से पूर्व मुखिया बमबम चौधरी से साक्षात्कार लिए है। जिसमें बमबम चौधरी का कहना है कि जब वह मुखिया थे तो गरीबों के लिए विशेष कार्य किये किये उनके द्वारा बहुत सरकारी योजना के अंतर्गत काम किया गया है जैसे वृद्धा पेंशन ,इंदिरा आवास ,चापानल योजना और मनेरेगा के द्वारा जो कार्य किया गया वह लोगो के द्वारा सराहा गया।निर्माण,सड़क निर्माण इत्यादि।इन्होंने आरक्षण नीति के तहत पंचायत के विकास में विपक्ष में आ गए।आदर्श ग्राम रहिया को विकास की किरणों से जोड़ा।

बौरना पंचायत के ग्रामीण से मेरा मुखिया के बारे मे जाने

वैसे तो देश में पूर्ण लॉकडाउन नहीं लगा है पर जिस तरह के हालात बने हुए हैं उनमें अधिकांश कारखाने बंद हैं. बहुत से दुकानदार कर्फ्यू के डर से दुकानें नहीं खोल रहे हैं. ये वही हालात हैं जो अब से कुछ माह पहले भी बनें थे. जब छोटे-छोटे बच्चों को कंधे पर बैठाएं लोग, बूढ़े मां-बाप को सहारा देकर पैदल या साइकिलों पर सवार किए हुए, अपने घरों की तरफ लौटती भीड़ को हम सबने देखा था. साथियों, हम ये बाते कर रहे हैं क्योंकि लॉकडाउन के पूरे एक साल बीत चुके हैं. उन्ही हालातों को समझने के लिए हम लेकर आए हैं अपना कार्यक्रम लॉक डाउन का एक साल- हम श्रमिकों को रहेगा याद की तीसरी कड़ी यानि काम पर वापसी. श्रोताओं, जब शहरों से लोग गांव पहुंचे थे तो उन्हें उम्मीद थी कि गांव में कुछ ना कुछ रोजगार मिल जाएगा पर उन्हे ना तो मनरेगा में काम मिला ना वे अपना व्यवसाय शुरू कर पाए. जो जमापूंजी थी वो भी खत्म होने लगी. जब कोई रास्ता नहीं मिला तो लोगों ने अपनी जान की परवाह किए बिना फिर से शहरों की तरफ रूख किया. कुछ कंपनियां और कारखाने खुले तो उन्होंने मजदूरों को कम संख्या में ही सही पर काम पर बुला लिया और कुछ ने साफ इंकार कर दिया. जो मजदूर काम पर लौटे हैं वे पहले से भी बदत्तर हालात में हैं. जिन राज्य सरकारों ने प्रवासी मजदूरों को उनकी कुशलता के आधार पर काम देने का वायदा किया था वे पूरे नहीं हुए. साथियों,बहुत से श्रमिक भाईयों के साथ ये हालात बन गए कि उन्हें परिवार का भरण पोषण करने के लिए महंगे ब्याज पर कर्ज लेने की नौबत आ गई. जो कभी औरों को काम दिया करते थे वे अब खुद काम की तलाश में हैं. हम आपसे जानना चाहते हैं कि क्या आपको नहीं लगता कि राज्य सरकारों ने प्रवासी मजदूरों का बस इस्तेमाल किया? मजदूरों को रोजगार देने, कम दाम पर घर और अनाज देने का जो वायदा किया गया था वो उनके साथ एक और धोखा था? हम आपसे आपकी परिस्थितियों के बारे में जानना चाहते हैं. हमें बताएं कि दोबारा शहर लौटकर आप किन मुश्किलों का सामना कर रहे हैं.

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बिरनो क्षेत्र ग्राम सभा बद्दोपुर में एक मनरेगा मजदूर का लिया गया साक्षात्कार इनका कहना है कि हम मनरेगा में काम किए हैं लेकिन अब तक हमारा पैसा नहीं मिल पाया तो आइए इसी संदर्भ इनको सीधे गाजीपुर मोबाइल वाणी पर जोड़ते हैं धन्यवाद

जमुई के जिला पदाधिकारी अवनीश कुमार सिंह जमुई प्रखंड अंतर्गत सुग्ग गाँव पहुँचे। गाँव में मनरेगा का कार्य कर रहे मजदूरों के बीच मास्क का वितरण कर लोगों को कोरोना से बचाव के लिए जागरूक किया साथ ही जिले वासियों से अपील भी जारी किया। ऑडियो पर क्लिक कर सुनें पूरी खबर को।

जिलाधिकारी श्री शत अशोक के द्वारा मनरेगा ज्ञान एप्प एवं दिव्यांगजन एप्प का शुभारंभ किया गया। इस एप्प के द्वारा मनरेगा से जुड़ी सभी विस्तृत जानकारी उपलब्ध है

उत्तराखंड से हमारे श्रोता साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि सरकार की ओर से मनरेगा के तहत मिलने वाले पैसे का ठेकेदार गबन करते हैं ठेकेदार

कोरोना महामारी के कारण मजदूर वर्ग परेशान हैं। मजदूरों का कहना है की संमक्रमण से मरे ना मरे हम सब भुखमरी के कारण मर जायेंगे। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।



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