जिले में बंद पड़े नलकूपों को चालू करने को लेकर कवायद शुरू हो गयी है। इस कड़ी में संग्रामपुर प्रखण्ड के उत्तरी मधुबनी के पंचायत मुखिया सह मुखिया संघ प्रखण्ड अध्यक्ष रवि सिंह द्वारा वर्षो सं बंद पड़े नलकूप को चालू कराया गया है । जिससे किसानों के चेहरे पर मुस्कान दौड़ गई है। पंचायत के सुखलहिया टोला वार्ड-15 में भी बन्द पड़े सरकारी ट्यूबबेल पर अपना खुद का पैसा खर्च कर मुखिया ने इसे चालू कराया है । इसके पूर्व में भी मुखिया श्री सिंह ने उतरी मधुबनी मिश्र टोला वार्ड-9 में वर्षों से बन्द पड़े ट्यूबबेल को निजी कोष से मरम्मत करवा कर चालू करवाया था। इस दोनो नलकूप से हजारों एकड़ भूमि की सिंचाई होगी । 

छतौनी थाना क्षेत्र के एनएच 28 पर बरियारपुर के समीप मंगलवार की शाम बाइक की ठोकर से युवक की मौत हो गई । मृतक की पहचान रहमत मियां(45) के रूप में हुई है। वह छतौनी थाना क्षेत्र के बड़ा बरियारपुर वार्ड नंबर 45 का रहने वाला है।

खान पान की गड़बड़ी का असर बच्चे के दांत पर पड़ने लगा है। जिला में बच्चे के दांत मेंखोड़ीला की बीमारी काफी बढ़ गयी है।सदर अस्पताल हो या दांत डाक्टर के निजी क्लीनिक बच्चों को दांत में खोड़ीला के इलाज के लिए लाया जा रहा है। बताया जाता है कि खान पान की गड़बड़ी, बाजार के चटपटा चीज ,चॉकलेट खाने से बच्चों की हड्डी कमजोर हो रही है और इसका असर दांत पर पड़ रहा है। बच्चे के अभिभावक बच्चे को स्कूल टिफिन ने पौस्टिक आहार देने के बदले बिस्कुट, टॉफी या पिज्जा बना कर देते हैं।बताते हैं कि बच्चों के दांत की ठीक से सफाई नहीं होने ,हार्ड ब्रश से अथवा बिना ब्रांडेड पेस्ट से भी ब्रश करने का असर दांत पर पड़ता है। जिला में माउथ कैंसर की बीमारी तेजी से बढ़ने लगा है।डाक्टर की माने तो हर महीने 5से 10 मरीज को माउथ कैंसर होने की शंका में रेफर किया जाता है। इसकी पुष्टि डॉ अनिल झा, डॉ प्रेम कुमार व डॉ अनूप पाठक ने की है।मगर अब खोड़ीला की बीमारी भी बच्चे के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। दंत रोग विशेषज्ञ डॉ रवि रंजन बताते हैं कि आये दिन बच्चे में सबसे अधिक दांत के खोड़ीला की बीमारी मिल रही है।खोड़ीला का दर्द बहुत ही कष्ट दायक होता है।

श्रम संसाधन विभाग ने इस साल 37 रोजगार (नियोजन) मेला आयोजित करने का निर्णय लिया है। जिलास्तरीय एक तो प्रमंडल स्तर पर दो दिनों का रोजगार मेला होगा। विभाग ने रोजगार मेला के लिए दिन व तिथि तय कर दी है। मेला में बेरोजगारों को नियोजक कंपनियों की ओर से रोजगार मिलेगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार दरभंगा में 23 व 24 जून को प्रमंडल स्तरीय रोजगार मेले का आयोजन हो चुका है। अब छह व सात जुलाई को भागलपुर, 14 व 15 जुलाई को पटना, 24 व 25 जुलाई को मुंगेर, 28 व 29 जुलाई को गया, 13 व 14 अक्टूबर को मुजफ्फरपुर, एक व दो नवम्बर को छपरा, 28 व 29 नवम्बर को पूर्णिया जबकि सात व आठ दिसम्बर को सहरसा में प्रमंडल स्तरीय रोजगार मेला लगेगा। वहीं, जिलास्तरीय रोजगार मेला 28 जून को सीतामढ़ी, 30 जून को शिवहर, तीन जुलाई को बेतिया, पांच जुलाई को मोतिहारी, आठ जुलाई को बक्सर, 10 जुलाई को भेाजपुर, 12 जुलाई को बेगूसराय और 13 जुलाई को खगड़िया में आयोजन होगा। अन्य जिलों में 17 जुलाई को नालंदा, 19 जुलाई को लखीसराय, 21 को जहानाबाद, 26 को बांका, 31 जुलाई को अरवल, दो अगस्त को नवादा, तीन को शेखपुरा, चार को जमुई, सात को औरंगाबाद, नौ को रोहतास (डालमियानगर) और 11 अगस्त को भभुआ (कैमूर) में जिलास्तरीय रोजगार मेला का आयोजन होगा। इसी तरह 16 अक्टूबर को समस्तीपुर, 18 को गोपालगंज, 20 को सीवान, छह नवम्बर को किशनगंज, आठ नवम्बर को अररिया, 10 को कटिहार, एक दिसम्बर को सुपौल और चार दिसम्बर को मधेपुरा में जिलास्तरीय रोजगार मेला लगेगा।

पंचायती राज विभाग ने सूबे के सभी 38 जिला परिषदों को धारित भूमि के आंकड़ों की समीक्षा कर इसकी सूची तैयार करने और अपनी तमाम भूमि की अद्यतन लगान रसीद कटाने का सख्त निर्देश दिया है। यह भी कहा कि भूमि एवं राजस्भ विभाग से प्राप्त सैरातों की अविलंब बंदोबस्ती करा लें। ऐसा नहीं करने पर उक्त सैरात को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग वापस ले सकता है। पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव ने यह आदेश सभी उप विकास आयुक्त सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी को दिया गया है। सुरक्षित जमा निर्धारण के संबंध में विभागीय आदेश के आलोक में नियमानुसार शीघ्र कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही जिला परिषदों में विभिन्न पदों पर रिक्ति को लेकर पंचायती राज विभाग ने सभी जिप को अपने 12 दिसम्बर 2022 के निर्देशों की याद दिलाते हुए रिक्त पदों पर संविदा के आधार पर नियोजन करने का निर्देश दिया है।

सदर अस्पताल से रेफर मरीज को एम्बुलेन्स मिलने में फिर से परेशानी होने लगी है। करीब एक से डेढ़ घंटा के बाद डीजल का कूपन मिलता है। जिसके कारण गंभीर स्थिति वाले मरीजों भी एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में मजबूरन निजी एम्बुलेन्स का मरीज सहारा ले रहे हैं। तीन एम्बुलेन्स के भरोसे चल रहा है सदर अस्पताल बताया जाता है कि पूरे जिला में करीब 78 एम्बुलेन्स है। सदर अस्पताल में छह एम्बुलेन्स है। मगर इसमें तीन खराब चल रहा है। यह भी एक परेशानी का सबब बना हुआ है। प्रतिदिन चार से पांच मरीज होते हैं रेफर अस्पताल प्रबंधन के अनुसार जिला से हर रोज करीब 4 से 5 मरीज रेफर होते हैं। मगर रेफर मरीज को हायर सेंटर ले जाने के लिए समय पर डीजल नहीं मिलने से परेशानी हो रही है। यह परेशानी इधर कुछ दिन से हो रहा है। बताया कि डीजल का परमिट एजेंसी को देना है। इधर, सोमवार को भी सदर अस्पताल से केसरिया की रीता देवी को हायर सेंटर रेफर किया गया। वह दर्द से कराह रही थी। इसके बावजूद तीन घंटे बाद उसे एंबुलेंस मुहैया कराया गया। प्रसुता को अस्पताल लाने में हो रही परेशानी प्रसुता को प्रसव पीड़ा होने पर भी एंबुलेंस से काफी विलंब से उसे अस्पताल लाने जा रहा है। जिसके चलते निजी वाहन से प्रसुता को भी प्रसव के लिये आना पड़ रहा है। एम्बुलेन्स चालक भी मौजूद व्यवस्था से परेशान हैं। बताते हैं कि रेफर मरीज एम्बुलेन्स में आ जाते हैं। डीजल के लिए एक से डेढ़ घण्टा इंतजार करना पड़ता है। वेतन भी चार महीने से नहीं मिला है। हल्की गड़बड़ी के कारण कई एम्बुलेन्स खड़ा है। जानकर बताते हैं कि एम्बुलेन्स 102 का संचालन सरकार के द्वारा नामित एजेंन्सी के द्वारा होता है। डीजल एजेंसी के द्वारा जारी कूपन पर मिलता है। पहले भी डीजल मिलने में काफी विलंब होता था। समय पर गम्भीर मरीज जो रेफर होते हैं उनको एम्बुलेन्स नहीं मिलने पर ये लोग निजी एम्बुलेन्स से हायर सेंटर इलाज के लिये जा रहे हैं। इसकी सूचना सिविल सर्जन सहित अन्य अधिकारी को है मगर इस दिशा में पहल नहीं हो रही है।

राज्य में जैविक खेती को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ जैविक मेले का भी आयोजन होगा। राज्य स्तर पर दो जैविक मेले का आयोजन किया जाएगा। जैविक खेती और मेले के लिए कृषि विभाग ने करीब 32 करोड़ रुपये जारी किए हैं। विभाग ने वर्ष 2023-24 के लिए जैविक कोरिडोर योजना के तहत करीब 20 हजार एकड़ में जैविक खेती का लक्ष्य रखा है। जैविक खेती के लिए चयनित किसानों को दूसरे साल में अधिकतम ढाई एकड़ के लिए 6500 रुपये प्रति एकड़ दिए जाएगे। इसके अलावा प्रशिक्षण, मिट्टी जांच, निबंधन, पैकेजिंग, लेबलिंग, ब्रांडिंग के लिए भी राशि दी जाएगी। खेती को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य स्तर पर दो प्रशिक्षण कार्यक्रम किए जाएंगे। प्रगतिशील किसानों को राज्य से बाहर भ्रमण कराया जाएगा। जैविक फसलों के उत्पाद बेचने के लिए किसानों को भटकना नहीं पड़ेगा। जैविक खेती करने वाले किसानों को बाजार भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए राज्य में जैविक मेला और विपणन मीट का आयोजन किया जाएगा। वर्ष में दो बार यह आयोजन होगा। इसमें किसानों के अलावा, उत्पाद की प्रोसेसिंग करने वाले, होटल व्यवसायी और खरीदारों को बुलाया जाएगा।

स्कूल संचालक पिटाई से जख्मी छात्र की मौत शनिवार की रात मुजफ्फरपुर में इलाज के दौरान हो गई। वह मधुबन के बंजरिया गांव के हरि किशोर राय का पुत्र बजरंगी कुमार (14) था। पुलिस ने रविवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है।

बिहार की विवाहित महिलाएं पति के आवास के आधार पर आरक्षण के दावे से वंचित नहीं होगी। सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी जिलों के जिलाधिकारी को इस बारे में निर्देश जारी किया है। जाति, निवास, आय एवं क्रीमीलेयर रहित प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में यह कार्रवाई की गई है। विभाग के अनुसार ऐसी विवाहित महिलाएं, जिनके पिता बिहार के मूल निवासी हैं और उनके द्वारा आरक्षण के लिए पति के आवास के आधार पर दावा किया गया है, तो सिर्फ पति के स्थायी निवास प्रमाण पत्र के आधार उन्हें आरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता है। बीपीएससी द्वारा विद्यालय अध्यापक की नियुक्ति के लिए आवेदन पत्र आमंत्रित किए गए हैं। इसमें आवेदन के लिए ऐसे विवाहित महिलाओं को प्रमाण पत्र बनाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह मामला संज्ञान में आने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों को स्पष्ट करते हुए जिलाधिकारियों को ताजा निर्देश दिया है। जिलाधिकारियों को अधीनस्थ पदाधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश देने को कहा गया है ताकि उम्मीदवारों को प्रमाण पत्र प्राप्त करने में कोई कठिनाई न हो।

प्रदेश की हरियाली बढ़ाने में चाट भूमि मददगार बनेगी। यही नहीं, यह नदियों व नहरों में होने वाले कटाव पर रोक लगाने में भी सहायता करेगी। राज्य सरकार पूरे प्रदेश में चाट भूमि पर पौधरोपण करेगी। इसकी कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। इनमें किस-किस क्षेत्र में कौन-कौन से पेड़ लगाने हैं, इसकी भी योजना बनायी गई है। जल संसाधन विभाग ने इसके लिए 11814 एकड़ चाट चिह्नित की है। इसपर पौधे लगाए जा सकते हैं। विभाग ने इस चाट भूमि की जानकारी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को सौंपी है। अब वह भूमि की पहचान करके वहां तेजी से पौधारोपण करेगा। विभाग का मानना है कि यहां पौधे लगाने के बाद सूबे में हरियाली तो बढ़ेगी ही नदियों व तटबंधों में मानसून के वक्त होने वाले कटाव में भी कमी आएगी। पिछले दिनों विकास आयुक्त विवेक कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में चाट भूमि व स्लोप पर पेड़ लगाने को लेकर विस्तार से मंथन किया गया। बैठक में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान सचिव अरविंद चौधरी और जल संसाधन विभाग के सचिव संजय अग्रवाल मौजूद थे। इसी में यह बात भी सामने आई कि जल संसाधन विभाग के नहरों में काफी मात्रा में चाट भूमि उपलब्ध हैं। इसके बाद विकास आयुक्त ने जल संसाधन विभाग और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को इसकी संयुक्त जिम्मेवारी सौंपी।