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दिल्ली एनसीआर से हमारे श्रोता मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि वो एक निर्माण श्रमिक है तथा रोज काम की तलाश में लेबर चौक आते है। बता रहे है कि उन्हें कभी काम मिलता है तो कभी नहीं भी मिलता है और निराश होकर वापस अपने घर लौट जाना पड़ता है।अगर काम मिलता है तो रोजाना दिहाड़ी के हिसाब से उन्हें 400 रूपए दिया जाता है
दिल्ली के ग्रामीण इलाके से नंदकिशोर ने जगतपाल जी से बात की। उन्होंने बताया कि माहौळ अच्छा नहीं है। काम मिलने में दिक्क्त हो रही है। अगर सरकार काम दिलाने में कुछ मदद कर देती तो बेहतर रहता। कभी कभी काम नहीं मिलता है।सुबह आठ बजे जाना पड़ता है। कभी पैसा मिल जाता है कभी कभी देरी हो जाती है। प्रदूषण के कारण भी काम पर असर पड़ रहा है। इसमें जिम्मेदार सरकार और कंपनी है लेकिन भुगतना मजदुर को पड़ता है
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