नमस्कार दोस्तों मैं मनोहर कश्यप। ओमीक्रॉन को देखते हुए बहादुरगढ़ हरियाणा में टेस्टिंग बढ़ाया गया।

दिल्ली से मनोहर बताते है कि वहां पर मजदूरों की हालत बहुत ख़राब है। मालिक अक्सर मजदूरों की वेतन काट काट लेते है और न्यूनतम वेतन का पालन भी नहीं करते है। इसके अलावा ओवरटाइम भी करते है और पैसा भी नहीं मिलता है। यहाँ तक की रविवार को भी काम करना होता है

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दिल्ली से नंदकिशोर ने साझा मंच के माध्यम से एक श्रमिक से बात की। सहजाद ने बताया कि वो चार लोग भवन निर्माण के काम करने के लिए गए थे उन्हें पहले बोलै गया था कि काम के बाद उन्हें दिहाड़ी मिल जाएगा,काम ख़तम होने पर जब शाम में उन्होंने अपना दिहाड़ी माँगा तो उन्हें कह दिया गया की पैसा अगले दिन मिलेगा,जब अगले दिन सहजाद ने अपना दिहाड़ी माँगा तो उनसे कह दिया गया कि जब सारे मजदूर आ जाएंगे तब ही आपका पैसा मिलेगा वर्ण नहीं मिलेगा। बता रहे है कि दिहाड़ी नहीं मिलने से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है तथा मालिक द्वारा उन्हें धमकी भी दिया गया है कि उन्हें उनका पैसा तब ही मिलेगा जब काम पूरा ख़तम हो जायगा और सारे मजदूर आए जाएंगे

दिल्ली एनसीआर श्रमिक इक़बाल मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि काम की बहुत मारामारी है उन्हें कभी काम मिलता है तो कभी नहीं मिलता है। बता रहे है कि दिल्ली के लेबर चौंक में हर रोज वो और बहुत सारे श्रमिक खड़े रहते है सभी कोई काम की तलाश करते है उन्हें महीना में कभी 10 दिन तो कभी काम ही नहीं मिलता है जिस वजह से उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बताते है कि लॉक डाउन के कारण काम की स्थिति काफी खराब हो गई है मजदूर कल भी परेशां थे और अब जब लॉक डाउन खुल गया है आज भी परेशान है,सरकार के तरफ से भी उन्हें कोई सहायता नहीं मिल पाया है

दिल्ली एनसीआर से संजू साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि लेबर चौक में 5 सालों से कामकी तलाश में आते है कभी काम मिलता है तो कभी नहीं भी मिलता है। बता रहे है कि दिल्ली में प्रदूषण की वजह से फिलहाल काम की स्थति बहुत ही बुरी हो गई है मजदूरों को काम ही नहीं मिल रहा है। कह रहे है कि प्रदूषण का कारण श्रमिक नहीं है बल्कि बड़े बड़े फैक्ट्रियाँ है जहा से प्रदूषण फ़ैल रही है जिसकी वजह से सरकार ने काम रोक दिया है और अब एंड में भगतना मजदूरों को पद रहा है। आगे कह रहे है कि उन्हें जो दिहाड़ी मिलता है उससे उनका तथा उनके परिवार का खर्चा नहीं चल पता है

दिल्ली एनसीआर से पंकज साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कह रहे है कि वो काम की तलाश में रोज लेबर चौक में बैठे रहते है कभी कभी सुबह से शाम हो जाता है पर उन्हें काम नहीं मिलता है। साथ ही कह रहे है कि दिल्ली में जबसे प्रदूषण बढ़ा है तबसे उन्हें काम मिलना और भी ज़्यादा मुश्किल हो गया है। बताते हैकी गांव में उन्हें रोजगार नहीं मिलता था जिस कारण वो दिल्ली में काम की तलाश में आये थे यहाँ पर एक दिन का दिहाड़ी उन्हें 500 रूपए मिल जाता है। बता रहा है कि कई बार काम में पईसे फास जाने के बाअद उन पैसों को दुबारा माँगा जाता है तो उनके साथ मार पिट किया जाता है

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