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1974 आंदोलन के अग्रणी सिपाही जेपी सेनानी लक्ष्मण झा का निधन हो गया। उनका निधन रांची के एक निजी अस्पताल में हुआ। उनके निधन से जिले के राजनीतिक सामाजिक एवं बुद्धिजीवियों के बीच शोक की लहर दौड़ पड़ी। जेपी सेनानी संघ के जिला अध्यक्ष  शिवनंदन सिंह ने उनके निधन पर अपनी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा की लक्ष्मण झा के निधन से राजनीतिक सामाजिक एवं शिक्षा के क्षेत्र में अपूरणी क्षति हुई है जिसकी भरपाई करना निकट भविष्य में संभव नहीं है। 74 आंदोलन में उनके भूमिका को भूलाया नहीं जा सकता है। जदयू नेता सह जे पी सेनानी सियाराम मंडल ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि छात्र जीवन से ही लक्ष्मण झा 74 आंदोलन में सक्रिय रूप से जुड़ गए थे।

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दोस्तों, महिलाओं के भूमि अधिकार सुरक्षित करने में स्थानीय शासन की भूमिका केंद्रीय है। यदि ग्राम पंचायतें भूमि अधिकार को प्राथमिकता दें, महिलाओं को लाभार्थी सूचियों में शामिल करें, अधिकारियों को प्रशिक्षण दें और समुदाय संगठनों के साथ मिलकर काम करें, तो ग्रामीण भारत में महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण संभव है। स्पष्ट है कि जमीन पर अधिकार सिर्फ कागज़ी नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और स्वतंत्रता का सवाल है — और इसका समाधान गांव से ही शुरू होगा। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- आपके परिवार में जमीन किसके नाम है? क्या महिलाओं का नाम भी उसमें शामिल है *--- क्या आपकी पंचायत ने कभी महिलाओं को जमीन के अधिकार के बारे में कोई जानकारी या बैठक रखी है? अगर हाँ, तो उसका असर क्या रहा?” *--- अगर महिलाओं के नाम जमीन हो जाए, तो आपके हिसाब से उनकी ज़िंदगी में क्या-क्या बदल सकता है?”