दिल्ली मानेसर से दीपक साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि सरकार के बदलते ही गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ गयी है। नई सरकार के आते ही किसी न किसी चीज़ की कीमत बढ़ जाती है,जिससे आम आदमी ,मजदुर ,गरीब जनता को काफी परेशानी होती है।
दिल्ली एनसीआर कपसेड़ा से राम कारण साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से केजरीवाल के चुनाव जीतने के विषय में जानकारी साझा कर रहे हैं।
दिल्ली से शंकर ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि साझा मंच द्वारा श्रमिकों की बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में विभिन्न श्रमिकों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की गई। साथ ही शंकर ने बताया कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप पार्टी ने बहुमत के साथ 62 सीटों पर जीत दर्ज़ की। बीजेपी को आठ सीटें मिली व कांग्रेस का खाता नहीं खुल पाया।
हरियाणा के बहादुरगढ़ से मनोहर लाल कश्यप की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से हस्मत अली से हुई। हस्मत अली ने बताया कि सरकार द्वारा कहा गया था नागरिकता क़ानून केवल उनके लिए है जो बांग्लादेश आदि जैसे देशों से प्रताड़ित हो कर लोग आए है। लेकिन इसमें मुसलमानों का जिक्र नहीं किया गया। इसको लेकर जनता में रोष है और शाहीन बाग़ में पिछले दो महीनों से प्रदर्शन जारी है। संविधान के अनुसार धर्म,जाति,रंग आदि के आधार पर कोई क़ानून नहीं बनेगा लेकिन इस सरकार ने संविधान से अलग हटकर क़ानून बनाया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नागरिकता साबित करने के लिए कागज़ात पाना लगभग नामुमकिन है। देश में बेरोज़गारी को देखते हुए सरकार को क़ानून लाने से पहले विचार करना चाहिए था।
दिल्ली से हस्मत अली की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से नन्द किशोर व मनोहर लाल से हुई। नन्द किशोर ने बताया कि एनपीआर और सीएए क़ानून के चलते मज़दूर काम छोड़ने को मज़बूर हो जाएगें। मनोहर लाल के अनुसार सरकार को ऐसा कानून लाने की क्या ज़रूरत आ पड़ी।इस क़ानून के चलते पलायित मज़दूर को ज़्यादा परेशानी होगी।सरकार को जनता की मुख्य माँगे व देश के विकास पर ज़्यादा ध्यान देना चाहिए। ऑडियो पर क्लिक कर सुनें नागरिकता क़ानून के तहत मनोहर लाल व नन्द किशोर के विचार।
हमारे एक श्रोता मनोहर लाल कश्यप ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि 11 फरवरी 2020 दिल्ली विधानसभा चुनाव की मतगणना होने जा रही है। दिल्ली की जनता इसका बेसब्री से इंतजार कर रही है। देखना यह है कि किस पार्टी के हाथ दिल्ली की सत्ता पर आती है। इस बार दिल्ली के मुख्यमंत्री के पद पर कौन बैठता है। जनता के साथ पार्टियाँ भी बेसब्र है।
राजधानी दिल्ली से प्रेम कुमार साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि दिल्ली के चुनाव आयुक्त रणवीर सिंह ने चुनाव प्रतिशत बढ़ाने के लिए अनेक कदम उठाय लेकिन परिणाम यह हुआ की प्रतिशत बढ़ने के बजाय उल्टा घाट गया। बताते है की पिछले चुनाव में जहा 67 पदों से अधिक मतों का अधिकार प्राप्त किया गया था वही वही इस बार 62 पदों से वोट पड़े। मतदान के प्रति जनता का भरोसा जैसे उठता ही जा रहा है लोग अब मतदान करना नही। है
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