हरियाणा के बहादुरगढ़ से मनोहर लाल कश्यप की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से हस्मत अली से हुई। हस्मत अली ने बताया कि सरकार द्वारा कहा गया था नागरिकता क़ानून केवल उनके लिए है जो बांग्लादेश आदि जैसे देशों से प्रताड़ित हो कर लोग आए है। लेकिन इसमें मुसलमानों का जिक्र नहीं किया गया। इसको लेकर जनता में रोष है और शाहीन बाग़ में पिछले दो महीनों से प्रदर्शन जारी है। संविधान के अनुसार धर्म,जाति,रंग आदि के आधार पर कोई क़ानून नहीं बनेगा लेकिन इस सरकार ने संविधान से अलग हटकर क़ानून बनाया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नागरिकता साबित करने के लिए कागज़ात पाना लगभग नामुमकिन है। देश में बेरोज़गारी को देखते हुए सरकार को क़ानून लाने से पहले विचार करना चाहिए था।