दिल्ली के दक्षिणपुरी से सुनीता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि महिलाओं को सरकारी दस्तावेज में नाम होना जरूरी है क्योंकि महिलाओं को बच्चों को अकेले पालना पड़ जाता है तो इसके लिए कोई भी साधन नहीं होती है। कहीं से भी महिलाओं को आर्थिक सहायता नहीं मिलती है इसलिए उनको प्रॉपर्टी में अधिकार मिलना चाहिए।

दिल्ली के दक्षिणपुरी से सुनीता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि महिलाओं को जमीन में हक़ मिलना चाहिए। महिलाओं को मायके से कोई हेल्प नहीं करता है

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आपदा राहत के दौरान भी महिलाओं की स्थिति चुनौतीपूर्ण रहती है। राहत शिविरों में कई बार अकेली महिलाओं, विधवाओं या महिला-प्रधान परिवारों की जरूरतें प्राथमिकता में नहीं आतीं। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- जब किसी महिला के नाम पर घर या खेत होता है, तो परिवार या समाज में उसे देखने का नज़रिया किस तरह से बदलता है? *--- आपके हिसाब से एक गरीब परिवार, जिसके पास ज़मीन तो है पर कागज नहीं, उसे अपनी सुरक्षा के लिए सबसे पहले क्या कदम उठाना चाहिए?"? *--- "सिर्फ 'रहने के लिए छत होना' और उस छत का 'कानूनी मालिक होना'—इन दोनों स्थितियों में आप एक महिला की सुरक्षा और आत्मविश्वास में क्या अंतर देखते हैं?"

दिल्ली के जहांगीरपुरी से स्नेहा की राय यह है कि आज कल महिलाओं को प्रॉपर्टी में हिसा नहीं दिया जाता हैं। जिसकी वजह से उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।सरकार को अच्छे कदम उठानी चाहिए। ताकि महिलाओं को अच्छा जीवन जीने का मौका मिल सके।

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मध्य प्रदेश राज्य के उमरिया जिला से शिव कुमार यादव मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं को बोलने का अधिकार नहीं दिया जा रहा है.

दिल्ली से राजेश कुमार पाठक मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलायें जागरूक हो रही हैं । महिला अपने हक़ के लिए आवाज़ उठा रही हैं। महिलाओं में एकता होना चाहिए

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