नमस्कार श्रोताओं ,विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस तीन मई को मनाया जाता है। हर साल, 3 मई एक ऐसी तारीख है जो प्रेस की स्वतंत्रता के मूल सिद्धांतों का जश्न मनाती है, दुनिया भर में प्रेस की स्वतंत्रता का मूल्यांकन करती है, मीडिया को उनकी स्वतंत्रता पर हमलों से बचाती है और उन पत्रकारों को श्रद्धांजलि देती है जिन्होंने अपनी जान गंवा दी है।आज के दिन , प्रेस की स्वतंत्रता के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने और सरकारों को अधिकार का सम्मान करने और बनाए रखने के उनके कर्तव्य की याद दिलाने के लिए मनाया जाता है ।2024 में, विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस का थीम वर्तमान वैश्विक पर्यावरण संकट के संदर्भ में पत्रकारिता के महत्व और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को समर्पित है। इस दिन को मनाने के लिए आइए हम उन लोगों को प्रोत्साहित करें जो दूसरों की आवाज बनने और खोजने के बारे में सीखना चाहते हैं।मोबाइल वाणी के पुरे परिवार की और से आप सभी को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

गुजरात से मुकेश मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि स्वच्छता अभियान शुरू होने से अब घरों में मच्छर कम आते हैं और बीमारियाँ भी नहीं होती है

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कोविशील्ड बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की स्वीकारोकती के बाद सवाल उठता है, कि भारत की जांच एजेंसियां क्या कर रही थीं? इतनी जल्दबाजी मंजूरी देने के क्या कारण था, क्या उन्होंने किसी दवाब का सामना करना पड़ रहा था, या फिर केवल भ्रष्टाचार से जुड़ा मामला है। जिसके लिए फार्मा कंपनियां अक्सर कटघरे में रहती हैं? मसला केवल कोविशील्ड का नहीं है, फार्मा कंपनियों को लेकर अक्सर शिकायतें आती रहती हैं, उसके बाद भी जांच एजेंसियां कोई ठोस कारवाई क्यों नहीं करती हैं?

महाराष्ट्र राज्य के नागपुर जिला से आदर्श मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है की जनता की आवाज दबनी नहीं चाहिए। जनता की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए। जनता को सरकार से ही सवाल करना चाहिए

नेताओं के भाषणों में कोई सच्चाई नहीं होती, वे हमेशा झूठ बोलकर चुनाव जीतते हैं, यह सोचकर कि जनता यहाँ मूर्ख है, वे कुछ भी कहते हैं और किसी पर कुछ भी आरोप लगाते हैं, वे इतिहास के बारे में कुछ नहीं जानते हैं, वे शिक्षा के बारे में कुछ नहीं जानते हैं, वे शिक्षित नेता नहीं हैं।कभी भी शिक्षित लोगों को नेता नहीं बनाया गया है। वे ऐसे नेता बनाते हैं है जो उनका काम करते रहे और वे उनके ठेकेदार बनके रहें ।

उत्तरप्रदेश राज्य के पीलीभीत जिला से हमारे श्रोता मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे किसी भी पार्टी का विरोध नहीं करना चाहिए

गुजरात से मुकेश मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे एक बार विवेकानंद ने परमहंस जी से कहा, "आप भूखे हैं, रामकृष्ण।" परमंश ने कहा कि बेटा, मुझे कैंसर है, आप जानते हैं, लेकिन रामकृष्ण परमहंस ने जब बात की तो उन्हें बहुत अच्छा सबक दिया। विवेकानंद जी, अगर आप खाते हैं तो मेरा पेट भर जाता है, मुझे भूख नहीं है, मुझे भगवान की भूख है। तब विवेकानंद को यह समझ में आया। वे एक पूर्ण संत हैं, उन्हें भूख नहीं लगती, इतना बड़ा कैंसर होने के बाद भी उन्हें कभी किसी चीज की कोई इच्छा नहीं थी, इसलिए विवेकानंद उनसे फिर कभी नहीं पूछते थे कि परमहंस जी, आप भूखे हैं क्योंकि उन्होंने उनसे वादा किया था कि अगर आप खा रहे हैं, तो समझें कि मैं खा रहा हूं, तो यह हमारा भी प्रयास होना चाहिए।