उत्तरप्रदेश राज्य से दिनेश कुमार ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि वो ठेकेदार के माध्यम से बैंक में लगभग पांच साल से काम करते थे। लॉक डाउन से पहले का पैसा ठेकेदार ने दिया परन्तु लॉक डाउन लगने के बाद का पैसा ठेकेदार ने नहीं दिया। लॉक डाउन में वो बैंक नहीं जा पाए जिस कारण ठेकेदार ने उन्हें निकाल दिया। वो बहुत परेशान है। उन्हें सहायता चाहिए

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अधिवक्ता पदम कुमार ने बताया कि ठेकेदारी में काम करने पर भी श्रमिकों के वही अधिकार होते है जो अन्य कर्मचारियों के होते है। ठेकेदारी का झांसा दे कर मज़दूरों का शोषण किया जा रहा है। ठेकेदारी का मतलब यह नहीं कि वेतन कम मिले,काम के घंटे अधिक रहे या जो श्रम कानून अधिकार प्रदान करता है उससे वंचित रहे। जब तक श्रमिकों को उनके अधिकारों की जानकारी नहीं होगी या संगठित नहीं होंगे तब तक उनका शोषण होते रहेगा। इस समस्या के निबटान के लिए श्रम कार्यालय में एक लिखित शिकायत दें। इसके बाद श्रम अधिकारी प्रक्रिया को बढ़ाते हुए समझौते के तरफ जाएगे। अगर समझौता नहीं होता है तो प्रक्रिया आगे बढ़ाया जाएगा और श्रम कानूनों के अंतर्गत कोई न कोई समाधान निकलेगा। श्रमिकों को यूनियन से जुड़ना बेहद जरूरी है
Nov. 9, 2020, 11:38 a.m. | Tags: rights industrial work PADAM-ADV labourlaw govt entitlements int-PAJ wages workplace entitlements