जिला हजारीबाग के विशुनगढ़ प्रखंड से विश्वनाथ महतो जी मोबाईल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि पंचायत में चुने गए प्रतिनिधि को सरकार से प्राथमिकता नहीं मिली है। वार्ड सदस्य,पंचायत समिति जिला परिषद् के सदस्य को जो भी पदाधिकारी लोग हैं वो जनप्रतिनिधि का बात को रखते ही नहीं है। जो भी योजना आता है उसे जिले के कर्मचारी ताल-बेताल करते रहते हैं। इसके सम्बन्ध में पंचायत में जो भी काम होता है वो भी नहीं हो पाता है समय पर।अगर कर्मचारी को जाँच करने बोला जाता है तो वो तरह तरह का बीमारी ही बतला देते हैं। जब तक कर्मचारी को पैसा नहीं दिया जाता तब तक वो रिपोर्ट नहीं करते हैं।
जिला बोकारो प्रखंड पेटरवार से सुषमा कुमारी जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों में सामंजस्य के आभाव के कारण विकास के कार्य अवरुद्ध होते है।पंचायत प्रतिनिधियों में आपसी लगाव बहुत कम होता है साथ ही उनमे ईर्ष्या और द्वेष की भावना भी रहती है।जैसे की किसी योजना से सम्बंधित जानकारी के बारे में हम क्यों पूछने जायेंगे या फिर वे मेरे पास आयेंगे, इस तरह की भावना छिपी रहती है।जिसका सीधा असर जनता के विकास के कार्यो पर पड़ता है।इसके लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता है ,तथा एक दूसरे के साथ सामंजस्य बना कर विकास के कार्यो में अपनी अपनी भूमिका निभाने की जरुरत है। अक्सर देखा जाता है की पंचायत प्रतिनिधियों के पास संसाधनों का भी आभाव रहता है।अत: सरकार को इस पर विशेष ध्यान देने की जरुरत है।
Transcript Unavailable.
Transcript Unavailable.
प्रखंड बाघमारा, जिला धनबाद से बीरबल महतो जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते हैं कि उनके पंचायत महुदा में पंचायत प्रतिनिधियों के बीच किसी तरह का आपसी तालमेल नहीं होता है। यहां स्थिति यह हैं कि पंचायत समिति के सदस्य , वार्ड सदस्य, मुखिया एवं उप मुखियां कभी भी आपस में बैठकर किसी मुद्दे पर विचार-विमर्श नहीं करते।साथ ही पंचायतों में प्रत्येक माह आयोजित होने वाली ग्राम सभा में भी सभी जन प्रतिनिधि सम्मिलत नहीं होते हैं।वे कहते हैं कि जनप्रतिनिधियों के आपसी सामंजस्य के आभाव के कारण ही पंचायतों में विकास कार्य नहीं हो रहे हैं। अत: सभी पंचायत के मुखिया का यह कर्तव्य बनता है कि वे सभी वार्ड सदस्यों, पंचायत समिति के सदस्यों एवं उप मुखिया के उपस्थिति में ही ग्राम सभा का आयोजन करें। साथ ही मुखिया के आलावा अन्य प्रतिनिधियों का भी यह फर्ज बनता है कि वे ग्राम सभा में उपस्थित होकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें तभी जाकर पंचायतों का विकास संभव होगा।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला के दाड़ी प्रखंड से मोहम्मद असरार अंसारी जी मोबाइल वाणी के माधयम से कहते है कि जिस उद्देश्य से राज्य में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू की गई। और इसके पंचायत स्तरीय चुनाव किया गया है।वे कहते हैं कि जिस प्रकार राज्य में पंचायत चुनाव कराए गए ,ठीक उसी प्रकार से कानून भी लागु होना चाहिए, वरना बाकि प्रतिनिधियों का चुनाव करवाकर कोई फ़ायदा नहीं होगा। सरकार की नजर में मुखिया ही सब कुछ है,सरकार की यह निति सही नहीं है।त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव झारखंड राज्य में दूसरी बार हुई लेकिन अभी भी पंचायत प्रतिनिधियों में आपसी सामंजस्य का आभाव देखा जा रहा है और इस आपसी सामंजस्य के अभाव के कारण विकास पूरी तरह प्रभावित हो रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि विकास के नाम पर जितने भी फण्ड आते है ,उसे सिर्फ पंचायत के मुखिया को ही दिया जाता है, बाकि जिला परिषद् सदस्यों ,पंचायत समिति के सदस्यों एवं वार्ड सदस्यों को विकास के लिए फण्ड नहीं दिया जाता है। जिसके कारण मुखियां लोग मनमर्जी करते है और अपने आगे किसी को भी आने नहीं देते है। सरकार के इस रवैये से जहाँ एक ओर विकास के गति प्रभावित हो रही है,वहीं दूसरी ओर लोग भी पचायतों में आने वाली योजनाओं से वंचित रह जा रहे हैं। आखिर निर्वाचित तो सभी है,फिर सरकार अलग-अलग निति क्यों बना रही है। इसलिए इनका अनुरोध है कि पंचायत के सभी प्रतिनिधियों को पूर्ण अधिकार दें,ताकि प्रतिनिधियों में सामंजस्य का अभाव ख़त्म हो सके और पंचायत का विकास हो सके।
धनबाद बाघमारा से बीरबल महतो मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि पंचायत का चुनाव पंचायत के विकास के लिए किया गया। लेकिन मुखिया,पंचायत समिति तथा वार्ड में सामंजस्य नहीं होने के कारण विकास का कार्य रुका हुआ है।अबतक छत्रुटांड पंचायत में लोगो के नाम से प्रधान मंत्री आवास योजना का पैसा पास हो गया है।लेकिन वितरण नहीं किया गया जिसके कारण लोग अपना आवास नहीं बना पा रहें हैं। इसका मुख्य कारण पंचायत समिति अपने कार्यो में व्यस्त रहते हैं, वे पंचायत का कार्य कम तथा अपने व्यक्तिगत कार्य में ज्यादा ध्यान देते हैं।
झारखंड राज्य के चतरा जिला के प्रतापपुर प्रखंड से अनिल चौधरी मोबाइल वाणी के माधयम से कहते है कि आज पंचायती राज व्यवस्था के सात साल हो गए है,परन्तु अभीतक इनके गांव में मुखिया द्वारा कोई भी विकास कार्य नहीं किया गया है और इस तरह से इतने साल बीत जाने के बाद भी पंचायतों में कोई खास बदलाव नहीं हो पाया है।उन्होंने बताया कि उनके गांव में शौचालय बहुत बनाये गए है,परन्तु शौचालय निर्माण का जाँच करने के लिए मुखिया एक बार भी नहीं आते है। इतना ही नहीं गांव के किसी भी व्यक्ति का देखभाल मुखिया द्वारा नहीं किया जाता है। मुखियां कुछ विशेष व्यक्तियों का ही ख्याल रखते हैं एवं उन्हें ही योजना का लाभ देते है। लाल कार्ड में गलती रहने पर उसे सही करने के लिए मुखिया का कोई योगदान नहीं है और न ही इसपर कोई जवाब देते है। इसलिए इनका कहना है कि लाल कार्ड का सुधार जल्द से जल्द किया जाये।
जिला गिरिडीह से श्री रामचन्दर जी मोबाईल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि 2010 से पंचायती राज लागू हुआ है और मुखियाकरण का माहौल बना परन्तु यहाँ के जो मुखिया हैं वे विचौलिये से ही काम करवाते हैं। और उनसे ही अपना फ़ायदा भी लेते हैं। वे कहते हैं कि ग्रामीणों को यहां तक पता नहीं होता हैं कि कौन सी योजना और किस प्रकार की योजना किसके लिए हैं । गांव घर में वैसे लोगों आज भी झोपड़पट्टी है, जो पहले था। लोगों के घरों में बारिश का पानी कल भी छत से गिरता था और आज भी गिरता है। पंचायतों में आज तक कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है। उनका कहना है कि अगर इस तरह का रवैया रहा, तो बदहाली को दूर करने ले लिए सरकारी विभाग को या तो गांव-गांव में महीने में एक बार मुखिया के उपस्थिति में कैंप लगवाना चाहिए। और लोगो तक योजनाओ की जानकारी पहुचानी चाहिए। जिससे गरीब लोगो को फायदा मिल सके।
Transcript Unavailable.
