झारखंड राज्य के धनबाद ज़िला से राधू राय ने मोबाइल वाणी के माध्यम से किसानों की समस्या पर आधारित एक कविता सुनाया। इस कविता के माध्यम से उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार के पास किसानों के लिए कोई निति नहीं है। अत्यधिक परिश्रम करते किसान न्यूनतम मजदूरी सरकार है देती
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झारखंड राज्य के धनबाद जिला से तफ्फज़ुल आज़ाद जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते हैं कि मानव तस्करों के झांसे में फँस कर झारखण्ड की युवतियां बरबाद हो रही है।मानव तस्करी के लिए सरकार द्वारा कानून तो बनाया गया है ,लेकिन सरकार उसे सफलतापूर्वक लागू नहीं कर पा रही है। जिसके कारण दलाल और बिचौलिए इसका फायदा उठाते हुए भोले-भाले ग्रामीण क्षेत्र के अशिक्षित युवतियों को रोज़गार दिलाने के लालच देकर बड़े बड़े शहरो में ले जाकर जिलत भरी जिंदगी जीने के लिए छोड़ देते हैं।ऐसे में लड़कियां चाहकर भी नहीं निकल पाती हैं चूँकि कई बार उन्हें बंधक बना लिया जाता है। राज्य से लगातार बढ़ रहे मानव तस्करी की घटना के पीछे मुख्य वजह है राज्य में व्याप्त गरीबी और अशिक्षा।साथ ही इसके पीछे का एक वजह यह भी है कि यहां के कानून व्यवस्था काफी लचर अवस्था में है। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि इस तरह से देह का व्यापर करने वाले इन दलालों और बिचौलियों के ख़िलाफ़ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करें।
झारखण्ड राज्य के धनबाद जिले से तफ़ाजुल आजाद मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि आज प्राय दिन देखा जाता है कि मानव तस्करी के शिकार ज्यादातर ग्रामीण एवं गरीब घर की युवतियां हो रही है। इसका कई कारण है -अशिक्षा,बेरोजगारी साथ ही साथ गरीबी ,गरीबी के जाल में फसें गरीब को दलाल मोटी रकम का लालच देकर बाहर ले जाते हैं
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झारखंड राज्य के धनबाद ज़िले से बाघमारा प्रखंड से बीरबल महतो मोबाइल वाणी के माध्यम से कोयला खदान बंद होने पर आधारित एक कविता प्रस्तुत कर रहे हैं।
झारखंड राज्य के धनबाद जिला से तफ़ज़्ज़ुल आजाद एक सफल महिला की कहानी मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया जिनका नाम है चिंता देवी। चिंता देवी का जन्म 1 नवम्बर 1978 को गोमो में हुई और चिंता देवी अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय विद्यालय में पूरा की।और आज वे समाज कार्य के क्षेत्र में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहीं हैं।साथ ही लोगों को इंसाफ दिलाने का कार्य भी कर रही हैं। चिंता देवी ने अपनी आप बीती साझा करते हुए बताई कि 1999 में पढ़ाई करने के दौरान इनके सामने एक हादसा हुआ।इनके घर के पास एक परिवार में दुःखों का पहाड़ टूट पड़ा।उस परिवार को इंसाफ दिलाने के लिए प्रशासन के समीप चिंता देवी आवाज उठाईं, लेकिन उनकी बातों को नहीं सुना गया।और न ही उस परिवार को इंसाफ नहीं मिल पाया। उसी दिन से चिंता देवी ने अपने मन में यह ठान लीं कि अब वे कुछ ऐसी राहों को अपनाएंगी जिसे उनकी बातों को मानने पर प्रशासन मजबूर हो जाए, और लोगों को इंसाफ मिल जाए। फिर चिंता देवी ने वुमेन राइट संस्था से जुड़ी और आज वे धनबाद जिला सचिव के पद पर कार्य करते हुए क्षेत्र के लगभग दर्जनों लोगों को प्रशासनिक सुविधा मुहैया करवा रहीं हैं और लोगों को उनका हक दिलाने का कार्य कर रही हैं।साथ ही है अब चिंता देवी की बातों को काफी गंभीरता से लिया जाता है।इतना ही नहीं कार्य करते दौरान ही वर्ष 1999 में चिंता देवी की शादी हो गई इसके बावजूद भी आज समाज के कार्यों से हमेशा जुड़ी रहती हैं और लोगों को मानव अधिकार के तहत उनका हक़ दिलाने का प्रयास कर रही हैं।
