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झारखंड राज्य के बोकारो ज़िला से झारखंड मोबाइल वाणी के माध्यम से सुषमा कुमारी बताती है कि सरकार एक ओर किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है लेकिन वहीँ दूसरी ओर किसानों के लिए कोई खास व्यवस्था नहीं की हुई है।राज्य के किसान भाई मेहनत कर साग-सब्जी उपजातें हैं,परन्तु उनके द्वारा उपजाए हुए साग-सब्जी का उचित मूल्य नहीं मिल पता है।किसान भाइयों के द्वारा उपजाई हुई सब्जी बेचने के लिए राज्य में मंडी की उचित व्यवस्था नहीं की गई है।झारखंड में सब्जी बाजार की वर्तमान स्थिति काफी ख़राब है।गांव एवं पंचायत स्तर पर सब्जी मंडी नहीं होने के कारण किसानों को साग-सब्जी बेचने के लिए अपने गांव से कम से कम 10 से 15 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद ही साग-सब्जी को बेचना पड़ता है।उतना दूरी तय करने के बाद भी किसानों को उपजाए हुए फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है।जिसका सीधा असर किसानों के दिनचर्या पर पड़ता है।किसान अपने परिवार का भरण पोषण भी नहीं कर पाते है।अतः उनके लिए सरकार को फसल बीमा, फसलों का उच्च समर्थन मूल्य एवं किसानों के लिए आसान ऋण की उपलब्धी सुनिश्चित करनी होगी तभी किसानों की स्थिति सुधरेगी।
झारखंड राज्य के बोकारो जिला के पेटरवार प्रखंड से सुषमा कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से बताती हैं, कि राज्य में मानव तस्करी ग्रामीण क्षेत्रों में काफी मात्रा में की जाती है। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र के लोग काफी सीधे होते हैं और बेरोजगार होने के कारण किसी भी झांसे में आ जाते हैं। भुखमरी,बेरोजगारी और आर्थिक तंगी के कारण राज्य में मानव तस्करी की घटना घट रही है। सरकार की ओर से मानव तस्करी को रोकने के लिए कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया जा रहा है।यह देखा जाता है, कि समाज में पुलिस तस्कर लोग के मिलीभगत से इसे बढ़ावा देते हैं। अतः मानव तस्करी को रोकने के लिए सरकार को कोई कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है तथा शक्ति से पालन करने की जरुरत है। साथ ही बेरोजगारों को रोजगार मुहैया करवाने की आवश्यकता है।
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झारखण्ड राज्य के बोकारो जिला से सुषमा कुमारी झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बताती है कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अनुसार सभी वर्ग के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने का सरकार के द्वारा प्रावधान है।लेकिन यह कानून केवल कागजों पर ही दिखाई पड़ता है।इसका नुकशान बच्चों को ही उठाना पड़ता है।बच्चे अच्छे शिक्षक के अभाव में गुणवत्तपूर्ण शिक्षा नहीं लें पाते हैं। इसके लिए सरकार जिम्मेदार है।क्योंकि सरकार बच्चों की शिक्षा के लिए करोड़ो रूपये खर्च करती है ,शिक्षकों को वेतन देने के लिए तथा निःशुल्क किताब और अन्य सामग्री देने के लिए ,परन्तु भ्रष्टाचार के कारण समय पर ना ही बच्चों को किताब मिल पाता है और ना ही शिक्षक बच्चों को गुणवत्तपूर्ण रूप से पढ़ाने का कार्य करतें है, सब जगह केवल खानपूर्ति किया जाता है। बीच -बीच में शिक्षक वेतन बढ़ोतरी के माँग करतें है,शिक्षकों के वेतन तो बढ़ा दिया जाता है ,परन्तु उनके पढ़ाने के तरीकों में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं आता है।इस कारण अभिभावक निजी स्कूलों में अपने बच्चों का नाम लिखवातें है , क्योंकि निजी स्कूलों में सरकारी स्कूलों के तुलना में गुणवत्तपूर्ण शिक्षा दी जाती है। इस लिए ये कहा जाना उचित है कि शिक्षा केवल अब व्यवसाय का माध्यम बन गया है।अतः सरकार और शिक्षा विभाग को इस विषय पर ध्यान देते हुए शिक्षा में सुधार लाने कि आवश्यकता है।
झारखण्ड राज्य के तेनुघाट प्रखंड से सुषमा कुमारी झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बताती है की स्वतंत्र भारत से पूर्व और स्वतंत्र भारत के पश्चात एक लम्बी अवधि व्यतीत होने के बाद भी भारतीय किसानों की दशा में सिर्फ 19-20 का ही अंतर दिखाई देता है। बढ़ती आबादी, औद्योगीकरण एवं नगरीकरण के कारण कृषि योग्य क्षेत्रफल में निरंतर गिरावट आई है।जिस देश में 1.25 अरब के लगभग आबादी निवास करती है और देश की 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर आधारित है ,वहां पर किसान के पास खेती के लिए सिंचाई की अच्छी व्यवस्था तथा कृषि यन्त्र मौजूद नहीं होती है,जिससे किसान बेहतर तरीके से खेती नहीं कर पातें हैं।इस कारण किसान कम समय में अधिक खेती की लालश लेकर कीटनाशक दवाई अथवा रासायनिक खाद का प्रयोग करतें हैं।लेकिन किसान भाई को लाभ कम नुकशान अधिक उठाना पड़ता है जिससे उपजाऊ युक्त भूमि बंजर पड़ जाता है और फसल की उपज भी कम होती है। साथ ही रासायनिक खाद से उपज किया हुआ खाने योग्य पदार्थ से कई गंभीर बीमारियाँ और उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। अतः सरकार को किसानों कि ओर ध्यान देते हुए उन्हें कम दर पर बीज, गुणवत्तपूर्ण खाद और सिंचाई की अच्छी व्यावस्थ देकर उन्हें सहायत प्रदन करनी चाहिए ताकि उनकी खेती की पैदावार छमता को बढ़ाया जा सके।
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