झारखंड राज्य के बोकारो जिला के पेटरवार प्रखंड से सुषमा कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से बताती हैं, कि राज्य में मानव तस्करी ग्रामीण क्षेत्रों में काफी मात्रा में की जाती है। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र के लोग काफी सीधे होते हैं और बेरोजगार होने के कारण किसी भी झांसे में आ जाते हैं। भुखमरी,बेरोजगारी और आर्थिक तंगी के कारण राज्य में मानव तस्करी की घटना घट रही है। सरकार की ओर से मानव तस्करी को रोकने के लिए कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया जा रहा है।यह देखा जाता है, कि समाज में पुलिस तस्कर लोग के मिलीभगत से इसे बढ़ावा देते हैं। अतः मानव तस्करी को रोकने के लिए सरकार को कोई कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है तथा शक्ति से पालन करने की जरुरत है। साथ ही बेरोजगारों को रोजगार मुहैया करवाने की आवश्यकता है।
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झारखण्ड राज्य के बोकारो जिला से सुषमा कुमारी झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बताती है कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अनुसार सभी वर्ग के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने का सरकार के द्वारा प्रावधान है।लेकिन यह कानून केवल कागजों पर ही दिखाई पड़ता है।इसका नुकशान बच्चों को ही उठाना पड़ता है।बच्चे अच्छे शिक्षक के अभाव में गुणवत्तपूर्ण शिक्षा नहीं लें पाते हैं। इसके लिए सरकार जिम्मेदार है।क्योंकि सरकार बच्चों की शिक्षा के लिए करोड़ो रूपये खर्च करती है ,शिक्षकों को वेतन देने के लिए तथा निःशुल्क किताब और अन्य सामग्री देने के लिए ,परन्तु भ्रष्टाचार के कारण समय पर ना ही बच्चों को किताब मिल पाता है और ना ही शिक्षक बच्चों को गुणवत्तपूर्ण रूप से पढ़ाने का कार्य करतें है, सब जगह केवल खानपूर्ति किया जाता है। बीच -बीच में शिक्षक वेतन बढ़ोतरी के माँग करतें है,शिक्षकों के वेतन तो बढ़ा दिया जाता है ,परन्तु उनके पढ़ाने के तरीकों में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं आता है।इस कारण अभिभावक निजी स्कूलों में अपने बच्चों का नाम लिखवातें है , क्योंकि निजी स्कूलों में सरकारी स्कूलों के तुलना में गुणवत्तपूर्ण शिक्षा दी जाती है। इस लिए ये कहा जाना उचित है कि शिक्षा केवल अब व्यवसाय का माध्यम बन गया है।अतः सरकार और शिक्षा विभाग को इस विषय पर ध्यान देते हुए शिक्षा में सुधार लाने कि आवश्यकता है।
झारखण्ड राज्य के तेनुघाट प्रखंड से सुषमा कुमारी झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बताती है की स्वतंत्र भारत से पूर्व और स्वतंत्र भारत के पश्चात एक लम्बी अवधि व्यतीत होने के बाद भी भारतीय किसानों की दशा में सिर्फ 19-20 का ही अंतर दिखाई देता है। बढ़ती आबादी, औद्योगीकरण एवं नगरीकरण के कारण कृषि योग्य क्षेत्रफल में निरंतर गिरावट आई है।जिस देश में 1.25 अरब के लगभग आबादी निवास करती है और देश की 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर आधारित है ,वहां पर किसान के पास खेती के लिए सिंचाई की अच्छी व्यवस्था तथा कृषि यन्त्र मौजूद नहीं होती है,जिससे किसान बेहतर तरीके से खेती नहीं कर पातें हैं।इस कारण किसान कम समय में अधिक खेती की लालश लेकर कीटनाशक दवाई अथवा रासायनिक खाद का प्रयोग करतें हैं।लेकिन किसान भाई को लाभ कम नुकशान अधिक उठाना पड़ता है जिससे उपजाऊ युक्त भूमि बंजर पड़ जाता है और फसल की उपज भी कम होती है। साथ ही रासायनिक खाद से उपज किया हुआ खाने योग्य पदार्थ से कई गंभीर बीमारियाँ और उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। अतः सरकार को किसानों कि ओर ध्यान देते हुए उन्हें कम दर पर बीज, गुणवत्तपूर्ण खाद और सिंचाई की अच्छी व्यावस्थ देकर उन्हें सहायत प्रदन करनी चाहिए ताकि उनकी खेती की पैदावार छमता को बढ़ाया जा सके।
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झारखण्ड राज्य के बोकारो जिला से सुमंत कुमार ने झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत उन विकासशील देशों में से है, जिनकी जनसंख्या का एक बड़ा भाग कृषि पर निर्भर है। इसी कारण दुनिया के नक्शे पर भारत को कृषि प्रधान देश माना जाता है।भारत के कई राज्यों में धान की खेती की जाती है और उन्ही में से एक है झारखण्ड राज्य,जहाँ पर धान की खेती अधिकतम मात्रा में की जाती है।धान की खेती इस राज्य में कई पीढ़ियों से की जा रही है। परन्तु दिनों दिन धान की खेती में गिरावट आ रही है।इसका मुख्य कारण है खाद, बीज और कीटनाशक पदार्थ। दुकानदार किसान भाइयों को लुभावने वायदे कर गुणवत्ता विहीन खाद, बीज और कीटनाशक दवा ,पावडर आदि थमा देते हैं। जिससे कई बार इन असरहीन कीटनाशकों की छिड़काव कराने की वजह से किसानों की फसलें जलकर नष्ट हो जाती हैं। इससे अन्नदाताओं को बेहद नुकसान उठाना पड़ता है।धान का पैदावार प्रभावित होता है।
झारखण्ड राज्य के बोकारो जिला से सुषमा कुमारी जी ने झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि धान की खेती के लिए पानी की सर्वाधिक आवश्यकता है। धान की अच्छी उपज लेने हेतु खेत में हमेशा पानी भरा रहना आवश्यक नहीं है।गंदगी ,बांध या प्रदूषित जल से सिंचाई नहीं करना चाहिए।अन्यथा फसल पर गहरा प्रभवा पड़ता है।धान कि खेती पर समय समय पर अलग -अलग बीज को बोया जाना चाहिए । ताकि खेत की मिट्टी का उर्वरक हमेशा अधिक बना रहे और धान का फसल अच्छा हो। मिट्टी के अनुसार कम रासायनिक खाद का उपयोग किया जाना चाहिए। ताकि इस रासायनिक पदर्थ से मिट्टी की उर्वरक क्षमता को ना खींच सके और फसल का नुकसान न हो। खर-पतवार तथा सुखी लकड़ियों को जलाकर मिट्टी में खाद के रूप में उपयोग किया जाना चाहिए । समय के अनुसार धान का बीज बोया जाना चाहिए। इस प्रकार के विधियों का प्रयोग करने से, धान के फसल की पैदावार क्षमता अधिक होती है। फसल अच्छा होता है।
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