मोबाइल वाणी और माय कहानी की खास पेशकश कार्यक्रम भावनाओं का भवर में। साथियों, वो कहते हाँ न की मन स्वस्थ तो तन स्वस्थ यानि की मानसिक और शारीरिक दोनों ही तरह से स्वस्थ रहना। हम खुद को हर रोज फ्रेश और तरोताज़ा महसूस करे इसके लिए जरुरी अपने मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना और यह हम सभी जानते भी हैं पर फिर भी हम इस मामले में बहुत ही लापरवाह होते हैं।क्यूंकि , शायद हम इस बात से अनजान होते हैं कि वास्तविक रूप में स्वास्थ्य का मतलब होता क्या है ? और हमारे जीवन में स्वास्थ्य की भूमिका क्या है? तो चलिए आज की कड़ी में इसी विषय पर बात करते हैं और जानते हैं कि हमारे लिए अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखना क्यों महत्वपूर्ण है। क्यूंकि मानसिक विकार किसी की गलती नहीं इसलिए इससे जूझने से बेहतर है इससे जुड़ी पहलुओं को समझना और समाधान ढूंढना. तो आइये सुनते हैं स्वास्थ्य की महत्ता और स्वस्थ रहने के फायदों के बारे में। ....... साथियों अभी हमने सुना की हमारे लिए अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखना क्यों महत्वपूर्ण है ? अब अगली कड़ी में जानेंगे की पैसो के बिना भी खुश कैसे रहा जाता है . तब तक आप हमें बताए कि आपको क्या लगता है, क्या स्वस्थ रहने का मतलब सिर्फ अपना वजन घटाना है? या फिर इसमें और भी कुछ चीजें होती है? आप के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य हमारे शारीरिक स्वास्थ्य को किस प्रकार से प्रभावित करता है और क्या आप ने ऐसा होते हुए कभी देखा है ? अगर हाँ तो अपनी कहानी हमें बताएं।आपके अनुसार हमारे वे कौन कौन सी आदतें होती हैं जो हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं ? दोस्तों, अगर आज के विषय से जुड़े आपके मन में कोई सवाल है तो हमें जरूर बताएं अपने फ़ोन में नंबर 3 दबाकर। हम कोशिश करेंगे उनका जवाब ढूंढ के लाने की। साथ ही इसी तरह की और भी जानकारी सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें https://www.youtube.com/@mykahaani
पेटरवार के पोरदाग स्थित चिल्ड्रन पाराडाइज पब्लिक स्कूल में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के उपलक्ष पर कक्षा एक से आठ तक की विज्ञान प्रदर्शनी शुक्रवार को लगायी गयी. जिसमें बच्चों ने 41 तरह के मॉडल प्रस्तुत किए. इस अवसर पर प्राचार्य विकास कुमार ने विद्यार्थियों से गहन प्रश्न पूछे जिनका विद्यार्थियों ने सटीक जवाब दिए. इस मौके पर प्राचार्य ने कहा कि विज्ञान प्रदर्शनी विद्यार्थियों में विज्ञान पढ़ाने का सरल जरिया है जो विद्यार्थियों के दिल में गहन जगह बना लेता हैं. प्रयोग द्वारा आसानी से सीख सकते हैं. इस अवसर पर उन्होंने सभी भाग लेने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी तथा कहा कि भविष्य में सभी विद्यार्थी कक्षा एक से आठ के विज्ञान प्रदर्शनी में भाग ले तो सबसे सुंदर कार्य होगा. इस अवसर पर प्रदर्शनी देखने आये अभिभावकों ने विज्ञान प्रदर्शनी केलिए छात्र छात्राओं की सराहना किया. इस मौके पर विज्ञान विषय के हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट अमित कुमार ने मॉडल बनाने वाले विद्यार्थियों से अनेक सवाल पूछे. इस मौके पर निर्णायक मंडल ने कक्षा आठ की स्वीटी एंड ग्रुप का एसिड रेन माडल सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया. जो ईमारतों पर किस प्रकार से नुकसान पहुंचा रहा है इससे सम्बंधित था. दूसरे स्थान पर हैड्रॉलिक जेसीबी चुना गया. तीसरे स्थान पर कक्षा छह से प्रियांशु, आलिया एवं ग्रुप सूर्य एवं चंद्र ग्रहण पर आधारित प्रयोग अति सराहनीय रहा. उन्होंने बॉल और टॉर्च की सहायता से पृथ्वी सूर्य के चारो ऒर परिक्रमा का मॉडल प्रदर्शित कर रखा था. प्रदर्शनी में हाइड्रोलिक सिस्टम, स्वच्छ वातावरण, सोलर सिस्टम, पवन चक्की, पवन चक्की से बनने वाली बिजली को बहुत सुंदर ढंग से दर्शाया था. मौक़े पर विद्यालय के अध्यक्ष ब्रजेश कुमार मिश्रा, अभिषेक कुमार सिन्हा, अमित कुमार सिन्हा, सिंटू कुमार, अर्चना कुमारी, अनु कुमारी, समायरा परवीन, पूजा सिंह, कंचन कुमारी, दीपचंद प्रसाद,निकहत फिरदोस,नीतू सिन्हा, परमीला कुमारी, शिवदयाल महतो, अरविन्द कुमार, काजोल प्रसाद,अबोध गुरु सहित समस्त शिक्षक एवं शिक्षिकायें व अभिभावक उपस्थित थे.
पेटरवार स्थित लीला जानकी पब्लिक स्कूल में क्लासरूम मैनेजमेंट विषय पर इन हाउस ट्रेनिंग का आयोजन शुक्रवार को किया गया. विद्यालय के निर्देशक नीरज कुमार सिन्हा एवं प्रधानाचार्य अमर प्रसाद ने सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को इस सत्र में जानकारी हासिल कर धरातल पर सहजता व कुशलता के साथ उतारने का मार्गदर्शन दिया. कार्यक्रम में संसाधन व्यक्ति मिथिला अकादमी के प्रधानाचार्य अशोक कुमार पाठक ने कक्षा प्रबंधन कौशल और तकनीकों की विस्तृत विविधता को पटल पर रखा. जिसका उपयोग शिक्षक छात्रों को कक्षा के दौरान संगठित, व्यवस्थित, केंद्रित, चौकस, कार्य पर और शैक्षणिक रूप से उत्पादक रखने के लिए आवश्यक बताया. बताया गया कि जब कक्षा-प्रबंधन रणनीतियों को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया जाता है, तो शिक्षक उन व्यवहारों को कम करते हैं जो व्यक्तिगत छात्रों और छात्रों के समूहों दोनों के लिए सीखने में बाधा डालते हैं, जबकि उन व्यवहारों को अधिकतम करते हैं जो सीखने को सुविधाजनक बनाते हैं या बढ़ाते हैं. आम तौर पर प्रभावी शिक्षक मजबूत कक्षा-प्रबंधन कौशल प्रदर्शित करते हैं. जबकि अनुभवहीन या कम प्रभावी शिक्षक की पहचान एक अव्यवस्थित कक्षा होती है जिसमें ऐसे छात्र भरे होते हैं जो काम नहीं कर रहे होते हैं या ध्यान नहीं दे रहे होते हैं. पांच घंटे के इस कार्यक्रम में सभी अध्यापक-अध्यापिकाओं ने इस विषय में जानकारी हासिल किया.
तिरो व बांधडीह उत्तरी में राजस्व शिविर का आयोजन किया गया।
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सीएचसी नावाडीह में दो दिवसीय दिव्यांगता जांच व पेंशन शिविर गुरुवार से शुरू
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प्रोजेक्ट अमृत,स्वच्छ जल-स्वच्छ मन परियोजना के तहत भुचूंगडीह के तालाब में चलाया गया सफाई अभियान।
आशा विहार के समीप बनेगा प्रखण्ड स्तरिय स्टेडियम,खेल पदाधिकारी व अंचल अधिकारी ने किया स्थल निरीक्षण।
