देवेंद्र कुमार गुप्ता मोबाइल वाणी के माध्यम से जानना चाहते हैं कि इलाज के बाद ईएसआई का पैसा कितने दिनों में खाते में आ जाता है और इसके लिए क्या करना पड़ता है ?
विष्णुगढ़ प्रखंड मुख्यालय सभागार में 11 फरवरी को लौटे दुबे से अंतरराष्ट्रीय प्रवासी श्रमिकों के साथ प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया के टीम ने उनसे रूबरू होते हुए उनकी समस्याओं के बारे में चर्चा किया गया साथ ही झारखंड सरकार श्रम विभाग के द्वारा पुनर्वासन हेतु सूचना संकलन पत्र संग्रह किया गया एवं ईएमसी कंपनी में बकाया राशि एवं किराए भुगतान करने के संबंध में आवेदन लिया गया पीटीआई के वरिष्ठ संवाददाता सौरभ शुक्ला कैमरामैन कौशल कुमार विष्णुगढ़ श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी विकास कुमार श्रमिक मित्र राजेश्वर महतो प्रवासी श्रमिक त्रिलोकी महतो दिलीप कुमार महतो दीपक कुमार बैजनाथ महतो गंगाधर महतो जागेश्वर महतो के पत्नी प्रमिला देवी मौजूद रहे।
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विदेश मंत्री एस जयशंकर झारखंड सरकार के श्रम विभाग प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष कार्यालय कर्मी एवं समाजसेवी सिकंदर अली के अथक प्रयास से झारखंड के 11 प्रवासी श्रमिक जो दुबई में फंसे हुए थे उनका सकुशल वापसी हुई लोगों ने आभार व्यक्त की।
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हजारीबाग गिरिडीह बोकारो आसपास क्षेत्र में प्रवासी श्रमिक के निरंतर मौत होने की सूचना से क्षेत्र की जनता मर्माहत है उक्त बातें नावाडीह ऊपरघाट प्रखंड के समाजसेवी भुवनेश्वर महतो में शोक व्यक्त करते हुए कहा कि झारखंड में खनिज संपदा के भंडार रहने के बावजूद भी इस क्षेत्र में रोजगार नहीं मिल पा रहा है लगातार पलायन होने से क्षेत्र में प्रवासी श्रमिकों की मौत बढ़ती ही जा रही है इसी कड़ी में हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड सिरैय पंचायत निवासी उदालबेडा तारकेश्वर महतो के इकलौता पुत्र प्रकाश महतो का मौत महाराष्ट्र के मुंबई में ऊंचाई से गिरने से हो गया परिजन को सूचना मिलते हैं रो-रो कर बुरा हाल हो गया है।
अधिकांश व्यक्तिगत पट्टे पुरुषों के नाम पर होते हैं. सामुदायिक अधिकारों में भी महिलाओं को भी कम प्रतिनिधित्व दिया जाता है. इसके चलते महिलाएं केवल खेत मजदूर बनकर रह जाती हैं. महिलाओं को इसका नुकसान यह होता है कि बैंक, बीमा तथा दूसरी सरकारी सहायता का लाभ नहीं उठा पाती है, जो उनके लिए चलाई जा रही हैं.
अधिकांश व्यक्तिगत पट्टे पुरुषों के नाम पर होते हैं. सामुदायिक अधिकारों में भी महिलाओं को भी कम प्रतिनिधित्व दिया जाता है. इसके चलते महिलाएं केवल खेत मजदूर बनकर रह जाती हैं. महिलाओं को इसका नुकसान यह होता है कि बैंक, बीमा तथा दूसरी सरकारी सहायता का लाभ नहीं उठा पाती है, जो उनके लिए चलाई जा रही हैं.
अधिकांश व्यक्तिगत पट्टे पुरुषों के नाम पर होते हैं. सामुदायिक अधिकारों में भी महिलाओं को भी कम प्रतिनिधित्व दिया जाता है. इसके चलते महिलाएं केवल खेत मजदूर बनकर रह जाती हैं. महिलाओं को इसका नुकसान यह होता है कि बैंक, बीमा तथा दूसरी सरकारी सहायता का लाभ नहीं उठा पाती है, जो उनके लिए चलाई जा रही हैं.
