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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारत भर में पीएम किसान योजना ,किसान क्रेडिट कार्ड फसल बीमा योजना और सुखा राहत कार्यक्रम जैसी कल्याणकारी योजनाएँ आज भी एक पुराने मापदंड पर निर्भर है। भूमि स्वामित्य लेकिन अधिकांश ग्रामीण परिवारों में भूमि का स्वामित्य पुरुषों के हाथों में है। लाखों महिला किसान विशेष रूप से विधवाएं ,एकल महिलाएं ,दलित ,आदिवासी और मुस्लिम किसान उन योजनाओं से वंचित रह जाती हैं जो कृषि समुदाय के समर्थन के लिए बनाई गयी है

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारत में काम करने वाले व्यक्ति को गिनती में नहीं लिया जाता है। महिलाओं के कृषि श्रम बल में महिलाओं कि संख्या सबसे अधिक है।फिर भी महिलाओं को कृषक के रूप में मान्यता नहीं मिली है। कई महिलाओं के पास कृषि भूमि का स्वामित्य है

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारत को कृषि प्रधान देश होने पर गर्व है। चुनावी नारों ,वादों और सांस्कृतिक प्रतीकों में किसानों का महिमामंडन किया जाता है। महिलाओं का श्रम अनदेखा किया जाता है। उनके स्वामित्व को अनदेखा किया जाता है। महिलाओं के आवाज़ को व्यवस्थित रूप से दबा दिया जाता है

विष्णुगढ़ प्रखंड के बनासो बोदरा खरकट्टो अचलजामु समेत अन्य क्षेत्रों में शिवरात्रि के अवसर पर भक्त श्रद्धालुओं ने ढोल नगाड़े के साथ पूरा जुलूस घूम गया।

हजारीबाग पुलिस को मिली बड़ी सफलता पुलिस अधीक्षक अंजनी अंजन ने जिले के अलग-अलग थानों में मोबाइल चोरी या गुम होने की सूचना मिली थी उन्होंने तकनीकी टीम गठित कर 135 मोबाइल बरामद किए तथा स्वामित्व की पूरी जानकारी के बाद सामूहिक रूप से वितरण किया गया। उन्होंने नागरिकों से अपील किये कि किसी का यदि मोबाइल चोरी या गुम हो तो थाना में आवश्य सूचना दें।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारत प्रदेश की पहचान एक कृषि प्रधान देश के तौर पर जानी जाती है।किसानो के हाल बेहाल हैं। आज किसानों की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। नेतागण किसानों की समस्याओं को नहीं समझते हैं। किसानो को सिर्फ दौड़ाया जाता है और समाधान नहीं होता है।

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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि नई पीढ़ी का कहना है कि अकेले कृषि क्षेत्र उन्हें एक आरामदायक जीवन नहीं दे सकता है। भारत में कृषि क्षेत्र जिस गंभीर संकट से गुजर रहा है उसका एक संकेत ऐसे किसानों की बढ़ती जमात से मिल रहा है जो कृषि छोड़कर दूसरे पैसे चुन रहे हैं। लोगों का कहना है कि कृषि में मेहनत अधिक और आय कम हैं। इसलिए लोग कृषि नहीं करना चाहते हैं

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राजकुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि कृषि सबसे अधिक पुरुषों के द्वारा किया जाता है। कृषि कार्य में अधिक शारीरिक श्रम की आवश्यकता होती है। जिसे पुरुष महिलाओं की तुलना में अधिक आसानी से कर सकती हैं। कृषि में सबसे अधिक पुरुषों की भागीदारी होती है। इसलिए महिलाओं को कम अधिकार दिया जाता है