झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि संपत्ति में समान अधिकार, मेटर्निटी लीव और प्रजनन अधिकारों जैसे मुद्दों पर महिलाओं को अपने हक के लिए आवाज उठानी पड़ती है। इतिहास गवाह है की महिलाओं के आंदोलन जैसे- माता अधिकार आंदोलन ,कार्यस्थल के अधिकार आदि के कारण ही आज उन्हें बहुत से बुनियादी अधिकार मिल पाए हैं।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं चाहते हैं कि महिलाओं को अपने अधिकारों ,समानता और सुरक्षा के लिए अक्सर सभी क्षेत्रों में आंदोलन इसलिए करने पड़ते हैं क्योंकि सदियों से चली आ रही पित्र सतात्मक सोच और लैंगिक असमानता के कारण उन्हें पुरुषों के बराबर मौके और सम्मान नहीं मिल पाता है

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भूमि अधिकार एक महत्वपूर्ण मानव अधिकार है। क्योंकि यह भोजन,आश्रय और सुरक्षा जैसे बुनियादी सुविधाओं तक पहुंचने लायक बनाता है।भूमि अधिकार आर्थिक,सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों को प्राप्त करने के लिए मूलभूत आवश्यकता है।भूमि का अधिकार महिलाओं को सशक्त बनाता है। साथ ही महिलाओं की गरिमा और सम्मान को ध्यान में रखे बिना भूमि अधिकारों से जुड़ी बातचीत अधूरी है।

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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारतीय संविधान के तहत प्रत्येक महिला को समानता और सुरक्षा का मौलिक अधिकार प्राप्त है। अधिकारों में समान वेतन, शिक्षा और सम्पत्ति का अधिकार भी शामिल है।वर्तमान में महिलाओं को शिक्षा तो मिल रहा है, लेकिन सम्पत्ति के अधिकार से वो वंचित है।कानून ने महिलाओं को जमीन में हक़ दिया है। मगर यथार्थ में महिलाओं के नाम जमीन नही होती है और ना ही जमीन सम्बंधित कोई भी एक्शन लेने का हक या अधिकार होता है। जमीन में नाम ना होने के कारण महिलाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जैसे बैंक से लोन मिलने में कठिनाई,इत्यादि।

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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत में 80 प्रतिशत कामकाजी महिलाएं कृषि क्षेत्र में हैं।लेकिन भूमि पर मालिकाना हक न होने और पुरुष प्रधान सामाजिक संरचना के कारण उन्हें किसान के रूप में मान्यता नहीं मिलती है।जमीनें आमतौर पर पिता,भाई या पति के नाम होती है।जिससे वे सरकारी योजनाओं,कर्ज और कृषि ऋण माफी जैसे अधिकारों से वंचित रह जाती हैं।भले ही वो खेती का अधिकांश कार्य करती हैं,फिर भी महिलाओं को जमीन का अधिकार नही दिया जाता है

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