दिल्ली से रिंकू ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि ऐसा नही है लोग महिलाओं को सम्पत्ति नही देना चाहते हैं।पति के देहांत के बाद देवर और जेठ खेत,घर और सम्पत्ति हड़प लेते हैं। तो ऐसी स्थिति में महिलाओं को अपने हक़ के लिए आवाज उठानी पड़ती है।जरुरत पड़ने पर किसी वकील से मिलकर कानून का सहारा भी ले सकती हैं।
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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि जब खेती की जमीन पर अधिकार और नाम की बात आती है तो उसमें कभी भी महिलाएं शामिल नहीं होती हैं।जमीन का अधिकार सिर्फ पुरुषों के नाम होता है।वह अधिकार महिला किसानों को क्यों नहीं मिलता है ? महिला के नाम पर जमीन सिर्फ उसी वक्त मिलता है जब उसका पति या पिता नही रहता है।ऐसी स्थिति में महिला के नाम पर जमीन करवाया जाता है।महिला के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री कराने में छूट मिलती है।यह देखते हुए परिवार वाले महिला किसान के नाम पर जमीन करवाते हैं।खाद प्रबंधन द्वारा जारी किए गए आंकड़े के अनुसार बारह प्रतिशत से भी कम महिला किसान के नाम पर जमीन है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि जिला बांदा,बल्लान और नागावा गाँव में लगभग दस किसान महिलाओं से बात की गई जिनमें से सिर्फ तीन ही ऐसी महिलाएं थी जिनके नाम पर खेती की जमीन थी और वो भी सिर्फ इसी वजह से थी क्योंकि उनके पिता या पति नहीं थे।गांव की 53 वर्षीय आमना कहती है कि उनके पास पांच बीघा जमीन है। जिसमें से ढाई बीघा जमीन उनके पति के मारने के बाद उनके नाम हो गई।बाकी की ढाई बीघा जमीन उनके सास के नाम पर है।वह रोपाई,बुआई,खेत आवंटन आदि सारे काम करती हैं। जब उनसे सरकारी योजनाओं से मिलने वाले लाभ के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि उन्हें सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिला है।पैदावार अच्छा नही होने के कारण आजीविका चलाने में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि पंद्रह अक्टूबर महिला किसान दिवस के मौके पर खबर लहरिया टीम ने खबर दिया था कि जब महिला किसान से उसकी लागत के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि साऐ दस हजार खेती में लग जाते है खेती करने के लिए उन्हें अपने गहनों को भी गिरवी रखना पड़ता है। कई बार उन्हें कर्ज भी लेना पड़ता है।क्योंकि उनके पास खेती के लिए जरूरत के हिसाब से पैसे नहीं होते हैं।जब फसल अच्छी नहीं होती तो उन पर कर्ज और भी दोगुना हो जाता है। कर्ज लेकर खेती में पैसा लगा देते हैं। ऐसे में फसल खराब हो जाता है तो वह कर्ज दोगुना हो जाता है।छोटे किसानों को फसल से बहुत मुश्किल से जीविका चलती है।ऐसे में उनकी आय बिलकुल नही होती है।ऊपर से कर्ज का भार आय दिन बढ़ता रहता है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि वह महिलाएं जो अपने जमीन पर खेती करती हैं,जो अपने पारिवारिक जमीन पर खेती करती हैं या जो किराए पर ली हुई जमीन पर खेती करती हैं,उनको महिला किसान कहा जाता है। अगर हम महिलाओं के नजरिए से देखें तो वो सभी महिलाएं जो खेत में किसी भी तरह का काम करती हैं,जैसे - बटाई,खेत में मजदूरी या पशुपालन,इत्यादि।सभी महिलाओं को महिला किसान कहेंगे ना कि किसी अन्य नाम से जानेंगे।महिला किसान अधिकार मंच की सुलेखा ने बताया कि जब पति कमाने के लिए बाहर जाता है तो वह खेती की सारी जिम्मेदारी महिला पर छोड़कर जाता है।लेकिन खेत उसके नाम नहीं करता है। महिला को किसी भी तरह की मान्यता नहीं मिलती है।ऐसी महिलाएं भी महिला किसान हैं जो मिट्टी के ढेर में से धान घर लाती हैं और घंटो मेहनत करके धान को साफ करती हैं। ताकि वो अपने परिवार का भरण - पोषण कर सके।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिला किसान के रूप में काम करती हैं लेकिन उनको अधिकार नहीं दिया जाता है। लगभग 70 प्रतिशत महिलाएं खेती करती हैं। महिलाओं को न तो किसान के रूप में देखा जाता है और न ही किसान के रूप में अधिकार दिया जाता है
विष्णुगढ़ प्रखंड के सारूकुदर पंचायत अंतर्गत चिहूंटीया जाने वाली मार्ग में तक्षशिला स्कूल फॉर्म का स्थापना किया गया जिसका विधिवत उद्घघाटन मांडू के पूर्व विधायक एवं हजारीबाग जिला के कांग्रेस जिला अध्यक्ष जयप्रकाश पटेल ने पूजा अर्चना फीता काटकर शुभारंभ किया। मौके पर विद्यालय संचालक घनश्याम महतो निरंजन महतो कोकील चंद महतो टेकलाल महतो गुलाब राम अनिल राय उत्तम महतो महेश महतो धर्मेंद्र महतो मंसूर अंसारी भोला महतो सफायत अंसारी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।
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