Lock down drill presan

धरहरा सेंटर में स्वच्छता के नाम पर भोजन के नाम पर लूट की जा रही है धरहरा प्रखंड के करुण टाइम सेंटर से सीधी बातचीत

धरहरा(संवाददाता):कोरोना वायरस के कारण जहाँ लोगो के बीच आर्थिक समस्या उत्पन्न हो गई है।इसी संकट को थोडा़ कम करने के उद्देश्य से नक्सल प्रभावित धरहरा प्रखंड के बंगलवा क्षेत्र मे जदयू कार्यकर्ता मनोज मयंक ने आदिवासी कोठवा गाँव में गरीब परिवारों मे सूखा राशन वितरण के साथ बच्चों के बीच कापी-कलम एवं बिस्कुट की पैकेट वितरित किया।जदयू कार्यकर्ता मनोज मयंक ने कहा कि इस लाकडाउन की लम्बी अवधि में कई परिवार ऐसे है जिनके पास अब खाने का सामान कुछ भी नही है ऐसे मे अगर इन लोगो को कोई मदद नही मिलती है तो परिजनो के समक्ष भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो जाएगी। वे भूख से मरने के कगार पर आ जायेगे।इसी कडी़ मे लाकडाउन मे ग्रामीण कार्य विभाग के मंत्री सह जमालपुर विधानसभा के जदयू विधायक शैलेश कुमार के अथक प्रयास से सुखा राशन लोगो के बीच वितरित किया गया । उन्होने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मंत्री के पहल पर मैंने आदिवासी कोठवा गाँव मे जरुरत मंदो के बीच सुखा राशन वितरित किया एवं मंत्री के पहल पर आगे भी जरूरत मंदो को मदद पहुचाँया जाएगा ।विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें। 

बिहार राज्य के जिला मुंगेर के चंडी स्थान से राजेश कुमार मिश्रा मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि ये दुकानदारी करके जीवन यापन करता है , चंडी फुल माला क दूकान है पर लॉकडाउन में सब बंद है। इन्हे सरकार की दी गई सहायता राशि नहीं मिली है ना ही इनके पास राशन कार्ड है और ना ही राशन मिला है

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मुंगेर से अबोध ठाकुर की रिपोर्ट

कोरोना वायरस महामारी में दैनिक मजदूरों के काम पर लग रहा है ब्रेक मजदूरों के बीच भयावह स्थिति उत्पन्न हो चुकी है दिहाड़ी मजदूर वर्ग के लोग खाने खाने को मोहताज हो गए हैं आर्थिक रूप से वह पूरी तरह टूट चुके हैं नौबत यह है कि अपना गुजर-बसर करने के लिए किसी ना किसी से 1000 2000 कर्ज लेकर हुआ अपना गुजर बसर करने को मजबूर है कुछ दिहाड़ी मजदूर शहर छोड़कर गांव में पलायन कर चुके हैं बताया जाता है कि कभी शहर के चौक चौराहे पर रोजाना सुबह-सुबह मजदूरों की चौकड़ी लगती थी मजदूर काम की तलाश में शहर में आते थे कोई इसमें राजमिस्त्री होता था तो कोई मजदूर इसकी मजदूरी ₹400 से लेकर ₹600 तक होता था इसमें इसका गुजर-बसर चलता रहता था आज कोरोना वायरस के महामारी की वजह से इसके रोजगार रोजी रोटी पर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है अब देखना है कि राज्य सरकार इस दिहाड़ी मजदूर की कितनी मुश्किलें कम कर पाती है। सुनने के लिए ऊपर के ऑडियो पर क्लिक करें। 

एचआरडी मंत्री ने की घोषणा।

शिक्षा विभाग का विधान कहें या अफसरानों का फंसाना से आए दिन शिक्षकों पर दुधारी तलवार लटकी रहती हैं। मामला बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के कारगुजारी का हैं। बताते चलें कि जिले में प्लस टू शिक्षकों को निलंबित कर ऐसी घटना घटी है कि शिक्षकों को निलंबित करने के पूर्व प्राचार्य को निलंबित नहीं किया जाना यह कहाँ का रसूख है। क्योंकि प्लस टू शिक्षक योगदान देने के बाद निलंबन करने की प्रक्रिया आरंभ हुई और योगदान पूर्व विद्यालय के प्राचार्य ने पत्र रिसीव नहीं किया। सुधी पाठकों का ध्यान आकृष्ट कराना चाह रहा हूं कि मूल्यांकन केंद्र व शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों का निलंबन आरंभ हुआ। लेकिन प्राचार्य का निलंबन प्रक्रिया आरंभ नहीं हुआ। प्लस टू शिक्षक मूल्यांकन केंद्र में योगदान देते और शिक्षकों का पत्र जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय द्वारा निर्गत किया जाता है। जो बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से पत्र आता है। ऐसा भी कयास लगाया जा रहा है कि कहीं प्लस टू शिक्षकों को टारगेट तो नहीं किया गया और इसके मनोबल को तोड़ने के लिए संघ के इशारे पर करवाई तो नहीं की गई ? क्या संघ के इशारे पर तमाम अफसरान चलते और नीति निर्धारण को ताक पर नहीं रख देते हैं। वही एक और देखा जाए तो सेम केस में योगदान नहीं देने पर आज तक हाई स्कूल के शिक्षकों का निलंबन नहीं किया गया। विदित हो कि जिले के तमाम विद्यालयों में हाई स्कूल के ही प्राचार्य है या भेदभाव संघ, शिक्षक,कार्यालय प्लस टू शिक्षकों के साथ क्यों कर रहे हैं। मनोबल तोड़ने की बात इसलिए कहा गया है कि प्लस टू के शिक्षक प्राचार्य होने का दावा ठोकते हैं और इसे रोकने में संघ के तमाम नेता लगे रहते हैं । ऐसा आरोप प्लस टू नियोजित शिक्षक नाम नहीं छापने पर कहा हैं।  इधर शिक्षा विभाग के नीति निर्धारण क्या है। प्लस टू शिक्षकों के साथ कई सवाल खड़े हो रहे हैं क्योंकि राज्य स्तर पर प्लस टू शिक्षकों का कोई ठोस यूनियन नहीं है। जिस कारण से कई पत्र न्यायालय द्वारा तो आता है, फिर झंझावात के बीच फंस जाता है और फिर न्यायालय में।