नारी सशक्तिकरण की दिशा में जीविका के निरंतर बढ़ते कदम के साथ मुंगेर जिले में एक और नए आयाम की शुरुआत आजीविका द्वारा किया गया गरीब दीदी के लिए रोजगार की दिशा में कदम बढ़ते हुए आज 15 फरवरी 2022 को जीविका जिला कार्यालय मुंगेर द्वारा गौरीपुर सफियाबाद मुंगेर में अधिकार जीविका महिला सिलाई प्रशिक्षण उत्पादन केंद्र बिहार के प्रथम रेस्ट ऑफ द आर्ट सिलाई प्रशिक्षण सह उत्पादन केंद्र का शुभारंभ किया गया जिसका विधिवत उद्घाटन मुख्य अतिथि जिलाधिकारी मुंगेर नवीन कुमार डीडीसी संजय कुमार राज्य कार्यालय से उपस्थित परियोजना प्रबंधक समीर कुमार जिला परियोजना प्रबंधक रितेश कुमार द्वारा संयुक्त रूप से दीप जलाकर उद्घाटन किया गया कार्यक्रम में उपस्थित संकुल संघ की अध्यक्ष पिंकी देवी, सचिव रानी देवी, आशा देवी प्रबंधक सोमनाथ, नुपुर कमला, अमित कुमार, पूजा कुमारी, रूपेश कुमार, निलेश कुमार ,सुशील कुमार, खुशबू कुमारी ,प्रशिक्षण अधिकारी प्रखंड परियोजना प्रबंधक अनिल कुमार ,संतोष कुमार, मोनिका कुमारी ,अंजू कुमारी, जयशंकर ,जीविका कर्मी राहुल कुमार ,सिम्मी कुमारी ,चंदन कुमार, सुशील कुमार उपस्थित थे।
कासिम बाजार थाना क्षेत्र अंतर्गत संदलपुर पुरानीगंज के पास गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर कासिम बाजार थाना अध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने 5 लीटर देसी शराब के साथ एक युवक को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार युवक की पहचान पुरानी गज निवासी सुनील कुमार के रूप में हुआ है।
सोमवार 14 फरवरी को सदर प्रखंड के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों पर काला बिल्ला लगाकर कार्य करती दिखी आंगनबाड़ी सेविका बता दे कि सेविका द्वारा बताया गया कि हम लोगों ने 15 सूत्री मांग को लेकर चरणबद्ध आंदोलन करने का निर्णय लिया है। जिसकी शुरुआत आज काला बिल्ला लगाकर किया जा रहा है। वही इस संबंध जानकारी देते हुए में आंगनबाड़ी सेविका सहायिका संघ ग्रामीण परियोजना की अध्यक्ष अंजू मारा बताएं कि सरकार हमारे साथ बार-बार छल कर रहे हैं। इसी को देखते हुए हमारे संघ द्वारा 14 फरवरी से चरणबद्ध आंदोलन के लिए शुरुआत कर दी गई है। हम लोग 21 फरवरी को परियोजना का घेराव करेंगे 8 मार्च को जिला प्रोग्राम पदाधिकारी का घेराव करेंगे इस प्रकार से चरणबद्ध आंदोलन करने का काम करेंगे और सरकार से अपनी मांग लेकर रहेंगे।
सोमवार को योग नगरी सहायता सामाजिक संगठन द्वारा संगठन के उपाध्यक्ष गायक सचिन सिन्हा और पीयूष यादव की अगुवाई में नौवागढ़ी भगत सिंह चौक पर जम्मू कश्मीर में 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में आतंकी हमले के में शहीद जवानों को नगरी के सैकड़ों युवाओं द्वारा जुलूस निकालकर भारत माता के वीर सपूतों को कैंडल जलाकर श्रद्धांजलि दिए गए इस मौके पर नारे लगाए गए" वीर जवान अमर रहे" वीर जवान अमर रहे" मौके पर उपस्थित कोषाध्यक्ष चंदन मंडल, सह कोषाध्यक्ष पीयूष यादव ,शिवम शर्मा बंटी कुमार ,गुलशन कुमार, इत्यादि सैकड़ों युवाओं ने सभा में उपस्थित हुए और शहीद जवानों के नाम श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
सोमवार को मुंगेर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 2752 लोगों की कोविड-19 जांच कराई गई पांच नए संक्रमित मिलियंस पाए गए एक्टिव मरीज की संख्या पहुंची 20 इसकी जानकारी सिविल सर्जन डॉ हरेंद्र कुमार आलोक ने दिए उन्होंने बताया कि अभी लोगों सावधान रहने की जरूरत है तभी अपने आप को सुरक्षित रख पाएंगे।
रविवार को अपनी हिंदी फिल्म गंगा किनारे परदेसी के शूटिंग करने मुंगेर मुंगेर में करने पहुंचे हीरो राजन कुमार एक्शन के दौरान उन्हें गहरी चोट लग गई जिससे उनकी हालत बिगड़ गई जिन्हें इलाज के लिए सिटी क्रिटिकल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया जहां उनका इलाज चल रहा है। वहीं परिजनों द्वारा बताया गया कि अभी उनकी हालत में सुधार है। मैंने उनसे बातचीत किया
ऐक्टर बनना आसान नहीं हीरो राजन कुमार आज के दौर में, जबकि शूटिंग के दौरान ही फ़ाइनल डायलॉग रिकॉर्ड हो जाते हैं, उन लोगों को कौन काम देगा जिन्हें ढंग से बोलना तक नहीं आता। या जिनकी डायलॉग डिलीवरी बहुत कमज़ोर है।रिश्ते-नाते समझना, भावनाओं को गहराई से महसूस करना और उन्हें सच्चाई के साथ पेश करने की ख़ूबी अतिआवश्यक है। ऐसे भी लोग हैं जो अकेले में कुछ कर लेते हैं, लेकिन लाइट और कैमरे के सामने आते ही घबराने लगते हैं। उनका आत्मविश्वास (confidence) डगमगा जाता है। डायलॉग याद रखते हैं तो ऐक्टिंग भूल जाते हैं। या फिर होशो-हवास में न रहकर पता नहीं कुछ भी ऐसा-वैसा कर देते हैं, और उन्हें लगता है कि ऐक्टिंग हो गई। जबकि एक ऐक्टर का शरीर और दिमाग़ उसके कंट्रोल में रहना चाहिए। लेकिन किसी के लिए झिझक उस पर भारी पड़ जाती है तो किसी की तो आवाज़ ही नहीं निकलती। कई कमियाँ होने के बाद भी, जो ज़रूरी चीज़ें हैं उन पर काम करना लोगों को रास नहीं आता। सीखना उनको टाइम वेस्ट करना लगता है और इन्हीं कमियों के साथ एक, दो, तीन साल तक ऑडिशन देते रहते हैं। याद रखिए, दया करके या तरस खाकर भी कोई काम नहीं देता है। इसके लिए आपमें टैलेंट होना चाहिए। आप ख़ुद को साबित करना ही चाहते हैं तो ध्यान रखना- जोश में होश मत खोना। कॅरिअर समझकर सारी तैयारी रखना। संभल के चलना। क्योंकि ये मायानगरी है। अगर आप बाहर से मुम्बई आ रहे हैं तो कुछ समझदारी और सावधानी बरतना ज़रूरी है। पैसे से काम नहीं मिलता। ऐक्टर के लिए जो भी ज़रूरी चीज़ें हैं, उन्हें जानिए, समझिए और सीखिए। कैमरे के सामने बहुत सहजता से ऐक्टिंग करना सीखिए। ऐक्टिंग में अपनी कमियों को दूर कीजिए और फिर पूरी तैयारी के साथ ऑडिशन देने की शुरूआत कीजिए। इन सबको पाने के लिए कड़ी मेहनत और लक्ष्य पर नज़र रखना ज़रूरी है। तब जाकर आपको कम समय में काम मिलने के अवसर पैदा होंगे। तभी वक़्त भी बचेगा और पैसा भी। ‘सही पता लेकर निकलेंगे, तभी सही जगह पहुँचेंगे।‘ आपका शुभाकांक्षी - हीरो राजन कुमार, अध्यक्ष, (बफ्टा) बिहार फिल्म & टेलीविजन आर्टिस्ट एसोसियेशन ट्रस्ट , मुंगेर (रजि.) आर्टिकल के लेखक एक नामचीन फिल्म एक्टर है जिनकी हिट हिंदी फिल्म शहर मसीहा नहीं & नमस्ते बिहार को यू ट्यूब पर देखा जा सकता है कई धरावाहिक जैसे सीआईडी , लापतागंज, चिड़ियाघर, ये हवाएं आदी में अपने अभिनय से लोगों का दिल जीत चुके हैं इनका नाम गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल है दुनियां इन्हें चार्ली चैपलिन द्वितीय के रूप में जानती है #Contact -Hero Rajan Kumar 8789021940 (call timing 10 am - 8 pm)
ऐक्टर बनना आसान नहीं हीरो राजन कुमार फ़िल्मों में ऐक्टिंग करने का जुनून है किसी भी हद तक जाने की चाहत रखते है अगर ऐसा है तो कुछ चीज़ें समझ लीजिए। ऐक्टिंग बहुत आसान है, अगर आपका मन ऐक्टिंग को जानने, समझने, ऐक्टिंग करने में लगता है। ऐक्टिंग आसान है, अगर आपमें सीखने और उस पर अमल करने का जज़्बा है। ऐक्टिंग आसान है अगर आपमें रिस्क उठाने की हिम्मत है। ऐक्टिंग आसान है अगर आप सुविधाभोगी नहीं हैं। ऐक्टिंग आसान है अगर आप बदलावों को सहजता से लेते हैं। ऐक्टिंग आसान है अगर आप इसके बिना जीने की कल्पना भी नहीं कर सकते। आपको ऐक्टिंग का शौक़ हो सकता है। मोबाइल पर वीडियो डालकर आप लोगों के बीच पॉपुलर भी हो सकते हैं। लेकिन इन वीडियो के आधार पर ही ख़ुद को ऐक्टर समझ लेना आपकी तरक़्क़ी में ही बाधक बनेगा। प्रोफ़ेशनल ऐक्टिंग बहुत मेहनत, समर्पण, एकाग्रता और अनुशासन मांगती है। जी, ऐक्टिंग बहुत मेहनत, समर्पण, एकाग्रता और अनुशासन मांगती है। मोटे तौर पर आप इतना समझ लीजिए कि ऐक्टर के रूप में करियर (career) बनाना चुनौतीभरा (risky) है। इसलिए कई तरह की चुनौतियों से निपटने के लिए आप मानसिक रूप से तैयार रहिए। यहाँ कोई निश्चितता (surety) नहीं है, कि आप ऐक्टर के रूप में कब स्थापित होंगे या कब अपना पहला काम हासिल करेंगे। ऐक्टिंग कोई जॉब नहीं है, कि एक बार नौकरी मिल गई तो फिर ज़िंदगीभर का सहारा मिल गया। जबकि ऎक्टिंग में काम पाने के लिए हर बार आपको नए सिरे से शुरूआत करनी पड़ती है। जब तक आपका नाम नहीं होता, तब तक आपको काम मांगने के लिए मशक़्क़त करनी ही पड़ेगी। बल्कि नाम (famous) होने के बाद भी घर बैठे काम आने की गारंटी नहीं होती। सम्बंधित लोगों से मिलकर उन्हें याद दिलाना ही पड़ता है कि- मुझे भी काम की ज़रूरत है। यहाँ सम्बंधित लोगों से मतलब कास्टिंग डायरेक्टर, डायरेक्टर, प्रोडक्शन हाउस और फ़िल्ममेकर हैं। ऐक्टिंग आपके धैर्य की परीक्षा लेती है। हो सकता है कभी कुछेक ऑडिशन देने पर ही काम मिल जाये। तो कभी साल-छह महीने बाद आपको कोई फ़िल्म या सीरियल मिले। कई लोग जो ख़ुद को पर्दे पर देखने के लिए इतने उतावले होते हैं, सोचते हैं कि किसी को पैसा देकर कोई भी रोल हथिया लिया जाए। ऐसे अधीर लोग काम पाने के लिए किसी को लाखों रुपए दे भी देते हैं, और फिर पछताते रहते हैं। वो आदमी पैसे लेकर ग़ायब हो जाता है। ऐसी धोखाधड़ी आम है। क्योंकि एक्टिंग में रिश्वत नहीं चलती, टैलेन्ट चलता है। फिर भी लोगों को लगता है कि पैसा हर जगह का शॉर्टकट है। ऐक्टिंग में भूल जाइए। हाँ... ख़ुद के पैसों से आप फ़िल्म बनाना चाहें तो कोई रोकने वाला नहीं है। लेकिन आपमें टैलेन्ट नहीं है तो कोई दूसरा तो आपको अपनी करोड़ों के बजट की फ़िल्म में काम देने से रहा। इसलिए आपको सबसे पहले तो ऐक्टर बनने की जो आधारभूत (basic) बातें हैं उन पर ख़रा उतरकर दिखाना होगा। सबसे पहले तो याद रखिए कि आपका शब्दोच्चारण स्पष्ट और निर्दोष हो। सबको यही लगता है कि वह जो बोल रहे हैं वह बिल्कुल सही है, क्योंकि ज़्यादातर नए ऐक्टर्स को अपनी ग़लतियों का अहसास नहीं होता। वो ख़ुद को होशियार मानकर सालों तक काम ढूंढते रहते हैं।
*लावारिस शवों का विधिपूर्वक अंतिम संस्कार करता है शाश्वत संस्कार - केशरी* लावारिस शवों को गंगा नदी में प्रवाहित करने से जहां उन मृतकों को मुक्ति नहीं मिलती थी वहीं गंगा नदी भी प्रदूषित होती थी जिसे रोकने में महती भूमिका निभा रहा है शाश्वत संस्कार। उपर्युक्त बातें शाश्वत संस्कार के संस्थापक अध्यक्ष संजय केशरी ने अपने आवास पर संस्था की आयोजित विस्तारित बैठक को संबोधित करते हुए कहा। श्री केशरी ने कहा कि देश में सबसे प्रदूषित मुंगेर को रेल सह सड़क पुल चालू होने के बाद अप्रत्याशित रूप से बढ़ने वाले ट्रैफिक के कारण और अधिक प्रदूषित होने से बचाने के लिए संस्था द्वारा अब तक जलाए गए शवों की याद में तीन सौ अस्सी वृक्ष लगाए जायेंगे। सचिव नरेश कुमार गुप्ता ने कहा कि हमलोग समाज में बड़ी तेजी से घटते जा रहे संस्कार की रक्षा हेतु आस-पास के बच्चों में संस्कार का अलख जगाने के लिए भी अभियान चलाने जा रहे हैं। संस्था के कोषाध्यक्ष अमरनाथ प्रसाद ललन ने कहा कि लावारिस शवों के साथ-साथ हमलोग वैसे गरीबों के शवों का भी विधिपूर्वक अंतिम संस्कार करते हैं जिन्हें उनके परिजन गंगा नदी में प्रवाहित कर देते हैं। कार्यक्रम को इनके अलावे सुनील कुमार सिंह, अजय भगत, संयुक्ता कुमारी, रामकुमार सिंह, सोनी सिन्हा, सत्यनारायण साह, अजय प्रसाद सिंह, प्रकाश नारायण सिन्हा, बाल्मिकी यादव आदि ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर अधिवक्ता समीष वर्मा, भोला यादव, सखीचंद यादव, शंकर यादव, अजय सिन्हा, विश्वनाथ राम, बबलु गुप्ता, दीपक मल्होत्रा, रंजना शर्मा, किरण देवी, शोभा देवी, बेबी देवी, बीणा देवी, इन्दू देवी, रामविनय कुमार एवं केशव केशरी सहित अनेकों कार्यकर्ता उपस्थित थे।
रविवार को मुंगेर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 3375 लोगों की कोविड-19 जांच कराई गई जिसमें 6 लोग संक्रमित पाए गए एक्टिव मरीज की संख्या पहुंची 15 इसकी जानकारी सिविल सर्जन डॉ हरेंद्र कुमार आलोक ने दिए
