लड़कियों को पढ़ने के लिए पहले बदले सोच? सरकार हर बार लड़कियों को शिक्षा में प्रोत्साहन करने के लिए अलग-अलग योजनाएं चलाती हैं पर क्या इसको धरातल में किस रूप में देखते हैं और वास्तविक तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर समाज में व्याप्त कुर्तियां और सामाजिक दृष्टिकोण को देखने का नजरिया कुछ और ही है इसी के बीच में लड़कियों की शिक्षा का शहरों में पढ़ना कितना सही नजर आता है क्या सरकार की योजनाएं धरातल में उतरने के लिए समाज का दृष्टिकोण किस रूप में देखते हैं साथ ही कई बार लड़कियां इस प्रोत्साहन से स्कूल की दिल्ली तक तो पहुंच जाती है लेकिन पढ़ाई पूरी कर पाना उनके लिए किसी जंग से काम नहीं होती क्योंकि लड़कियों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने और पढ़ाई करने के लिए खुद अपनी जिम्मेदारी लेनी पड़ती है पर समाज का दृष्टिकोण और लड़कियों की सोच में शहरी बच्चियों के साथ ग्रामीण बच्चियों की बराबरी कहां देखते हैं? आज हमारे साथ युथ आॅफ सौंसर संघटन के उपाध्यक्ष गोपाल कोठे सर के साथ मोबाइलवाणी पर विशेष बातचीत कर जानकारी साझा की।
Transcript Unavailable.
दोस्तों, भारत के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी एक रिपोर्ट से यह पता चला कि वर्तमान में भारत के करीब 6.57 प्रतिशत गांवों में ही वरिष्ठ माध्यमिक कक्षा 11वीं और 12वीं यानी हायर एजुकेशन के लिए स्कूल हैं। देश के केवल 11 प्रतिशत गांवों में ही 9वीं और 10वीं की पढ़ाई के लिए हाई स्कूल हैं। यदि राज्यवार देखें तो आज भी देश के करीब 10 राज्य ऐसे हैं जहां 15 प्रतिशत से अधिक गांवों में कोई स्कूल नहीं है। शिक्षा में समानता का अधिकार बताने वाले देश के आंकड़े वास्तव में कुछ और ही बयान करते हैं और जहां एक तरफ शिक्षा के क्षेत्र में उन्नति समाज की प्रगति का संकेत देती है, वहीं लड़कियों की लड़कों तुलना में कम संख्या हमारे समाज पर प्रश्न चिह्न भी लगाती है? वासतव में शायद आजाद देश की नारी शिक्षा के लिए अभी भी पूरी तरह से आजाद नहीं है। तब तक आप हमें बताइए कि * ------क्या सच में हमारे देश की लड़कियाँ पढ़ाई के मामले में आजाद है या अभी भी आजादी लेने लाइन में खड़ी है ? * ------आपके हिसाब से लड़कियाँ की शिक्षा क्यों नहीं ले पा रहीं है ? लड़कियों की शिक्षा क्यों ज़रूरी है ? * ------साथ ही लड़कियाँ की शिक्षा के मसले पर आपको किससे सवाल पूछने चाहिए ? और इसे कैसे बेहतर बनाया जा सकता है ?
मध्य प्रदेश राज्य के छिंदवाड़ा जिले से योगेश मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि ,जिले में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में पात्र विद्यार्थियों को पहले चरण में एडमिशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके तहत 24 मार्च से एडमिशन लॉटरी के जरिए होना है। लेकिन जिला शिक्षा केंद्र के आंकड़ों के अनुसार लॉटरी में चयन होने के बावजूद अब तक एक भी विद्यार्थी का एडमिशन नहीं हुआ है ।शनिवार से सोमवार तक अवकाश होने के कारण एडमिशन की प्रक्रिया मंगलवार से शुरू होगी ।जिला शिक्षा केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार जिले में सभी विकास खंडों में आईटीआई के लिए 3हजार 999आवेदन आए थे। जिनका सत्यापन होने के बाद 3524 आवेदनों का सत्यापन हुआ है। पहले चरण की लॉटरी की प्रक्रिया में कुल 3 हजार 299 सीटों के लिए आवंटन हुआ है। ऑडियो सुन सकते हैं।
Transcript Unavailable.
मध्य प्रदेश राज्य के छिंदवाड़ा जिले से योगेश गौतम मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि कोरोना का हाल में शिक्षा से विद्यार्थी वंचित न रहे इसके लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। और इसी कड़ी में कक्षा नौवमी से 12वीं तक के विद्यार्थियों को पेन ड्राइव में पाठ्यक्रम उपलब्ध कराया जा रहा है ।जिसके जरिए विद्यार्थी पढ़ाई कर सकेंगे ।वहीं मंगलवार को विकासखंड छिंदवाड़ा के ग्राम बोनाखेड़ी के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए अतिरिक्त संसाधन के रूप में पाठ्यक्रम युक्त पेनड्राइव जिला कलेक्टर ने वितरित की।
मध्य प्रदेश राज्य के छिंदवाड़ा जिले से योगेश का उत्तम मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि कोरोना काल में बंद पड़े स्कूलों को एक बार फिर शुरू कराने की सुगबुगाहट तेज हो गई हैं। प्रदेश स्तर पर हाई हायर सेकेंडरी स्कूल को 26 जुलाई से लगाने की तैयारी हो रही है। इसके लिए आपदा प्रबंधन समिति का निर्णय और अभिभावकों की सहमति को अनिवार्य रखा गया है। एक ओर जहां कक्षा 9वीं से 12वीं तक की कक्षाओं को लगाने के लिए तैयारी हो रही है। वहीं दूसरी और स्कूलों में पढ़ाने के लिए पुस्तकें अब तक नहीं पहुंची है। हर साल से आज के स्कूलों में निशुल्क पुस्तकें जुलाई के पहले ही पहुंच जाती है। लेकिन इस बार इंतजार हो रहा था हो रहा है । कि 26 जुलाई को यदि स्कूल शुरु होती है, तो बिना पुस्तकों के पढ़ाई होगी। वहीं दूसरी और दसवीं कक्षा 4 विषय और 12वीं के दो विषयों का सिलेबस बदलने के कारण पुराने पुस्तक के भी काम नहीं आएगी। ऐसे में आने वाले 4 दिनों बाद स्कूल खुलने के बावजूद विद्यार्थियों की पढ़ाई फिलहाल शुरू नहीं हो पाएगी।
Transcript Unavailable.
आज भी 40 प्रतिशत किशोरियाँ स्कूल की पढ़ाई छोड़ कर घर बैठ जाती है। इसके पीछे भी कई कारण है। एक नारी सब पर भारी कार्यक्रम में बच्चियों की शिक्षा पर कविता आपको कैसी लगी ? क्या आपके आसपास ऐसी बच्चियाँ है जिन्हें 12 से 18 साल के उम्र के बीच अपनी शिक्षा पूरी किए बिना ही स्कूल छोड़ना पड़ा। उनके स्कूल छोड़ने के पीछे क्या कारण था ?और आपके इस बारें में क्या विचार है ?
शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक 19 फरवरी को दोपहर बारह बजे शासकीय एम एम बी स्कुल में रखी गई है। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
