लड़कियों को पढ़ने के लिए पहले बदले सोच? सरकार हर बार लड़कियों को शिक्षा में प्रोत्साहन करने के लिए अलग-अलग योजनाएं चलाती हैं पर क्या इसको धरातल में किस रूप में देखते हैं और वास्तविक तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर समाज में व्याप्त कुर्तियां और सामाजिक दृष्टिकोण को देखने का नजरिया कुछ और ही है इसी के बीच में लड़कियों की शिक्षा का शहरों में पढ़ना कितना सही नजर आता है क्या सरकार की योजनाएं धरातल में उतरने के लिए समाज का दृष्टिकोण किस रूप में देखते हैं साथ ही कई बार लड़कियां इस प्रोत्साहन से स्कूल की दिल्ली तक तो पहुंच जाती है लेकिन पढ़ाई पूरी कर पाना उनके लिए किसी जंग से काम नहीं होती क्योंकि लड़कियों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने और पढ़ाई करने के लिए खुद अपनी जिम्मेदारी लेनी पड़ती है पर समाज का दृष्टिकोण और लड़कियों की सोच में शहरी बच्चियों के साथ ग्रामीण बच्चियों की बराबरी कहां देखते हैं? आज हमारे साथ युथ आॅफ सौंसर संघटन के उपाध्यक्ष गोपाल कोठे सर के साथ मोबाइलवाणी पर विशेष बातचीत कर जानकारी साझा की।
