हम मनरेगा पर कुछ चर्चा करना चाहेंगे, आप मनरेगा के बारे में क्या जानते हैं। या महिलाओं को मनरेगा से क्या लाभ मिल सकता है या उन्हें मनरेगा से कैसे लाभ मिलेगा, ये सारी जानकारी थोटा लिंकू जी देंगे। मनरेगा को विशेष रूप से महिलाओं के काम करने और सरकार से कुछ धन प्राप्त करने के लिए बनाया गया था, लेकिन आज कल ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। सब कुछ उल्टा हो गया है। मनरेगा अब केवल नाम में है। इससे कोई लाभ नहीं है। अर्थात पुष्कम आदि इस समय मनरेगा में उपलब्ध नहीं हैं, इस समय मनरेगा में उपलब्ध नहीं हैं। कोई काम नहीं मिल रहा है, पैसा वगैरह, कभी खाते होते में आता है, कभी कावर आता में पैसा तो पूरा पैसा और कोई का मतलब है कि आधा नशे में है, आधा अधूरा है।

उत्तर प्रदेश राज्य के संत कबीर नगर जिला से अलोक श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से हमारे एक श्रोता रिंकू देवी से बात किया उन्होंने बताया की एक महिला तभी सशक्त हो सकती है जब वह शिक्षित हो या सशक्त हो जब वह समाज में अपने मन की बात कह सके। जब वह अपने दम पर नौकरी या व्यवसाय या कृषि करती है।महिलाओं के लिए कई अधिकार हैं, इन अधिकारों पर ध्यान देने से वे पूरी तरह से सशक्त हो सकते हैं और बदलाव ला सकते हैं

यह नौकरी उन लोगों के लिए है कर्मचारी चयन आयोग के कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल के 17727 पदों पर काम करने के लिए इच्छुक हैं। वैसे उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने किसी भी स्ट्रीम से स्नातक पास किया हो , इसके साथ ही उम्मीदवार की न्यूनतम आयु सीमा 18 वर्ष और अधिकतम आयु सीमा 32 वर्ष होनी चाहिए। इन पदों पर वेतनमान नियम अनुसार दिया जाएगा।ओबीसी व सामान्य वर्ग के लिए आवेदन शुल्क 100 रुपये व अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लिए आवेदन निशुल्क है, इच्छुक उम्मीदवार अपना आवेदन ऑनलाइन भर सकते हैं।अधिक जानकारी के लिए आवेदनकर्ता इस वेबसाइट पर जा सकते हैं। वेबसाइट है https://www.sarkariresult.com/ssc/ssc-cgl-2024/ योग्य उम्मीदवारों का चयन ऑनलाइन परीक्षा के बाद किया जाएगा। याद रखिए इन पदों पर आवेदन करने की अंतिम तिथि 24/07/2024 है ।

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उत्तरप्रदेश राज्य के संत कबीर जिला से राम प्रकाश सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाएँ हमेशा आधार कार्ड, पिन कार्ड, नौकरी की सुरक्षा जैसी सरकारी योजनाओं के चक्र में आगे रहने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन आज के समाज में पीछे रह गई हैं। पता नहीं उन्हें समाज में इतना पीछे क्यों रखा जाता है, जबकि महिलाओं को आगे रखना महत्वपूर्ण है, संपत्ति के अधिकार का भी समर्थन नहीं किया जाता है। संपत्ति का अधिकार भी होना चाहिए, जबकि सरकार भी कई योजनाएं देती है।

संतकबीरनगर जिले के मेंहदावल क्षेत्र में गर्मी में शहर से देहात तक पानी की किल्लत बढ़ गई है। कस्बे में कई हैंडपंप और देसी नल सूख चुके हैं। जो चल रहे हैं, वहां पानी बहुत कम निकल रहा है।पानी के लिए लोग चक्कर लगा रहे हैं। वहीं जलस्तर गिरने से घरों में लगे मोटर पानी नहीं उठा रहे हैं।कस्बे के केवटलिया अव्वल, बहबोलिया, पुरवा मोहल्ला के लोगों के अनुसार हैंडपंप पिछले कई दिनों से पानी नहीं दे रहा है। वहीं कुछ ने कहा कि काफी देर हैंडपंप चलाने के बाद बमुश्किल एक बाल्टी पानी निकल पा रहा है। कस्बे का दर्जा तो मिल गया। पानी की टंकी बने वर्षों बीत गए। कई मोहल्लों में पाइप लाइन भी बिछाई जा चुकी है। लेकिन टोटी का पानी अभी तक लोगों को मयस्सर नहीं हुआ। पेयजल व्यवस्था का हाल बुरा बना हुआ है। हैंडपंप सूख चुके हैं। अब पीने के लिए जार का पानी खरीद रहे हैं। स्थिति दयनीय है, लेकिन जिम्मेदार बेखबर हैं। मेंहदावल क्षेत्र में गर्मी में जलस्तर तेजी से नीचे गिर रहा है। इससे हैंडपंप में पानी कम आ रहा है। कमोबेश यह समस्या हर जगह देखने को मिल रही है। मोटर के पानी न उठाने से पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में भी जलस्तर तेजी गिरने से हैंडपंप बेपानी हो रहे हैं। यहां तो लोग किसी तरह व्यवस्था कर ले रहे हैं। लेकिन शहर में विकल्प के तौर पर कुछ नहीं है, जहां से पानी की पूर्ति की जा सके।केवटलिया वार्ड के सतीश कुमार ने कहा कि एक सप्ताह से पानी की किल्लत है। अब तो नल ही सूख गया। 80 फीट गहराई वाले नल से एक बूंद पानी नहीं आ रहा है। जार खरीदकर प्यास तो बुझा ले रहे हैं, लेकिन नहाने और कपड़ा धुलने के लिए पानी की दिक्कत हो रही है। मोटर में पानी न आने से रीबोर कराने को मजबूर होना पड़ रहा है। बहबोलिया के शंशाक, विवेक ने कहा कि हैंडपंप ने पानी देना बंद किया तो लगा कि खराब हो गया। दूसरा पाइप डलवा दिए फिर भी समस्या बनी हुई है। किसलावती ने कहा कि मोटर से भी पानी नहीं निकल रहा है। जहां पानी निकलता है कई बार जाना पड़ता है। धूप में दूर से पानी लाना बड़ा मुश्किल का काम हो गया है।

महिलाओं की भागीदारी देखते हैं, तो समाज में महिलाओं की भागीदारी काफी है। कुछ स्थानों पर महिलाएं रोजगार, शिक्षा, संपत्ति का अधिकार, राशन कार्ड का अधिकार जैसे अपने अधिकारों का प्रयोग करने में सक्षम नहीं हैं। केवल कुछ ही महिलाएं चुनावों में अपने अधिकारों में से एक को छोड़कर सभी का प्रयोग करने में सक्षम हैं, जिससे आधे से अधिक महिलाओं को जानकारी नहीं है। इसके लिए शिक्षा को बढ़ावा देना भी जरूरी है, शिक्षा बनी रही तो महिलाओं का सशक्तिकरण होगा, शिक्षा नहीं रही तो महिलाओं का सशक्तिकरण नहीं होगा। परिवार समाज का अग्रदूत होगा, जैसा कि आज महिलाओं, हेलीकॉप्टर, हवाई जहाज, सेना, नौकरियों, दुकानों और समाज के कई अन्य पहलुओं में देखा जाता है। पुरुषों की तुलना में कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली महिलाओं की संख्या अधिक है, लेकिन फिर भी, ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं अभी भी काफी अनपढ़ हैं, जिसके कारण वे पानी में घरेलू चौकों और भोजन और कपड़ों का खर्च उठाने में असमर्थ हैं। वे सफाई में लगे हुए हैं ताकि वे बाहरी ज्ञान का अनुभव न करें। व्यवस्थाओं को सम्मान और शिक्षा की आवश्यकता है ताकि देश का विकास तभी हो जब महिलाएं जागरूक हों।

पानी को हमेशा संरक्षित किया जाना चाहिए जबकि अगर पानी घर में आता है तो पड़ोसी से पानी लिया जा सकता है। अगर आप स्वस्थ हैं तो पानी की हमेशा रक्षा करनी चाहिए। सरकार को उस पर ध्यान देना चाहिए, सरकार को उस पर ध्यान देना चाहिए और फिर आम जनता को ध्यान देना चाहिए कि आप हमेशा पानी की खपत कम करें। अगर घर में पानी कम है तो आप दूसरे से पानी ले सकते हैं और जब पानी नहीं होगा तो आपको इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि आपको पानी कहां से मिलेगा।

चुनाव जीतने के बाद लोकतंत्र के बड़े-बड़े वादे खत्म हो जाते हैं, कोई भी इस क्षेत्र पर ध्यान नहीं देता है, न ही लोगों से कोई उम्मीद है और न ही चुनाव होने पर। भी आ जाता है तो पब्लिक में हुआ है, हम आपको जो भी सहायता चाहिए देंगे, लेकिन कोई सहायता नहीं है। महिलाओं को भी परेशान किया जाता है। आरक्षण देने के बाद भी वे महिलाओं से पीछे रहते हैं और परेशान भी होते हैं, उन्हें कोई सुविधा नहीं मिलती, चाहे वह पुरुष हो या महिला, उन्हें भी सुविधा नहीं मिलती।

भारत सरकार की योजनाएं बना हुआ लेकिन तालाब में पानी नहीं है, गड्ढे में पानी नहीं है, सरोवर में पानी नहीं है ।गर्मी इतनी अधिक है। पशु-पक्षी परेशान हो जाते हैं। लेकिन उन्हें भी पानी नहीं मिलता है। सरकार को भी इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।