उत्तरप्रदेश राज्य के जिला बलरामपुर से श्री देवी सोनी , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती है कि मान लीजिए कि जब हम बहुमत शासन की अवधारणा करते हैं या सीमाओं की अवधारणा को प्रतिस्थापित करते हैं, तो यह गंभीर हो जाता है। मैं ऐसा नहीं कहती । समग्र रूप से और लंबे समय में लोकतंत्र राजनीति या राजनीति की तुलना में अधिक हानिकारक रहा है; बल्कि, मैं कह रहा हूं कि लोकतंत्र कभी भी अल्पजनतंत्र या राजनीति जितना टिकाऊ नहीं रहा है। न ही यह हो सकता है, लेकिन जब तक यह बना रहता है, यह दोनों में से किसी एक से अधिक शक्तिशाली है। यह कहा गया है कि एक और प्रवृत्ति जो एक लोकतांत्रिक राष्ट्र के लिए चरम है, स्वाभाविक और अपरिहार्य है। विपक्ष के लिए जो बात खतरनाक साबित होती है वह यह है कि उन्हें निजी व्यक्तियों और अधिकारों का निर्माण करने और उन्हें अपने काम को महत्व देने के लिए प्रेरित करने के लिए कहा गया है। वे एक-दूसरे के सामने यह भावना व्यक्त करते रहते हैं कि लोकतंत्र सकारात्मक है या नहीं, चीजों को करने का सही तरीका सही तरीका है, जो तब भी होता है जब आप किसी पार्टी के उम्मीदवार हैं या चुनाव जीतते हैं।

उत्तरप्रदेश राज्य के जिला बलरामपुर से वीर बहादुर यादव , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते है कि वे मतदाताओं को लुभाने के लिए बहुत सारे वादे करते हैं और चुनाव जीतने के बाद वे मतदाता को उसी स्थिति में छोड़ देते हैं जिसमें मतदाता रहता है। विकास होगा, हमारे गांव का विकास होगा और हमारी ग्राम पंचायत का विकास होगा, लेकिन जो नेता इतने सारे वादे करते हैं और फिर जनता को अधर में छोड़ देते हैं। जब चुनाव फिर से आता है, तो वे फिर से आते हैं और बहुत सारे वादे करते हैं और मतदाताओं के बारे में नहीं सोचते हैं कि उन्होंने जो वादा किया उसे पूरा करना चाहिए या नहीं करना चाहिए, जैसे कि घुमन्तु महिलाएं हैं। घुमन्तु महिलाओं को केवल एक मतदाता के रूप में देखा जा रहा है, घुमन्तु महिलाओं का कहना है कि उनके पास अपने मतदाता सूचि में जुड़ने के लिए जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसे पर्याप्त दस्तावेज नहीं हैं।

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि खेत में बीज बोन से पहले कुछ सावधानियां रखनी चाहिए। सबसे पहले खेत की अच्छे से जुताई करें। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि योग करने के कई फायदे हैं। ज़िम में जाने से हमारा शरीर स्वस्थ रहता है, जबकि योग हमारे शरीर के साथ-साथ दिमाग को भी स्वस्थ बनाता है। शरीर की मांसपेशियों को अच्छा व्यायाम प्रदान करने के अलावा, यह हमारे दिमाग को शांत रखने में भी मदद करता है। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि पेड़-पौधे मानव जीवन में बहुत महत्वपूर्ण हैं।ये न केवल हमें ऑक्सीजन देते हैं बल्कि सभी प्रकार के फल, फूल, जड़ी-बूटियाँ और लकड़ी आदि भी देते हैं।घर के आस-पास पौधरोपण करने से गर्मी ,धूल,आदि की समस्या से बच सकते हैं।मानव उपभोग के लिए पौधे कई चीजें देते हैं। जैसे जलाऊ लकड़ी,फर्नीचर की लकड़ी, दवाएं, कीटनाशक आदि की आपूर्ति करते हैं। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से वीर बहादुर यादव ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि देश को आजाद हुए 75 साल बीत चुके हैं, लेकिन आज भी समाज में महिलाओं को भूमि का अधिकार नहीं मिला है। महिलाओं को संपत्ति का अधिकार नहीं मिला है। जबकि वास्तव में यह भी होना चाहिए कि जितना अधिकार पुरुष को दिया जा रहा है, उतना ही अधिकार महिला को दिया जाए। अगर पुरुष को संपत्ति का अधिकार दिया जा रहा है, तो पचास प्रतिशत महिलाओं को भी संपत्ति का अधिकार दिया जाना चाहिए, ताकि समाज में महिलाओं की पहचान और सब कुछ उनकी भी हो।

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि रोजगार के क्षेत्र में लैंगिक असमानता का एक कारण नौकरियों का विभाजन है। अधिकांश समाजों में, यह अंतर्निहित धारणा है कि पुरुष कुछ नौकरियों को संभालने के लिए बेहतर ढंग से सुसज्जित हैं। अधिकांश समय, वे नौकरियां होती हैं जिनमें सबसे अधिक वेतन मिलता है। इस भेदभाव के परिणामस्वरूप महिलाओं की आय कम होती है। महिलाएं अवैतनिक श्रम की प्राथमिक जिम्मेदारी भी लेती हैं, इसलिए भले ही वे वेतनभोगी कार्यबल में भाग लेती हों, लेकिन उनके पास अतिरिक्त काम होता है जिसे कभी भी वित्तीय रूप से मान्यता नहीं मिलती।लैंगिक असमानता न केवल महिलाओं के विकास में बाधा डालती है, बल्कि राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी प्रभावित करती है। अगर महिलाओं को समाज में उचित स्थान नहीं मिलता है, तो एक देश पिछड़ेपन का शिकार होगा। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि क्या समाज और सरकार के समक्ष महिलाओं को यह साबित करना होगा कि वह भी 'समानता' के संवैधानिक दायरों में शामिल हैं? क्या महिलाओं को सार्वजनिक रूप से प्रमाणित करना होगा कि ‘संपत्ति और भूमि’ में कानूनन उनका भी आधा हिस्सा है? खेती-बाड़ी के अधिकांश काम करने के बावज़ूद महिलाओं को भी 'किसान' होने का वैधानिक अहसास, आखिर कब और किसके बदौलत होगा? राज्यों के मौजूदा कानून और नीतियां, आधी आबादी के भूमि अधिकारों को ज़मीनी स्तर पर स्थापित कर पानें में अब तक असफ़ल क्यों रही हैं? महिलाओं को संपत्ति में बराबरी का हिस्सा देने में आखिर सामाजिक व्यवस्था इतनी अक्षम क्यों है? संवैधानिक वायदों के बाद भी महिलाओं के अधिकारों को लेकर सामाजिक जड़ता और प्रशासनिक नाकामियां पूर्वाग्रहों से ग्रसित क्यों हैं? महिलाओं को सम्मानपूर्वक उनके भूमि और संपत्ति के अधिकारों को न दिला पाने का अभियोग समाज पर लगना चाहिये या सरकार पर? विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा जाता है। विकासशील देश में इनकी भूमिका और महत्वपूर्ण है। दुनियाँ भर में कृषि क्षेत्र में ग्रामीण महिलाओं का अहम् योगदान है, वे परिवार, समाज और समुदाय का सार्थक अंग हैं। महिलाएं राष्ट्र के विकास में पुरुषों के बराबर महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हमारे देश की सत्तर प्रतिशत आबादी अभी भी ग्रामीण क्षेत्र में रहती है, उनमें से अधिकांश कृषि कार्यों पर निर्भर हैं। यही कारण है कि ग्रामीण महिलाएं घरेलू काम करती हैं और बच्चों की देखभाल के साथ-साथ कृषि कार्य भी करती हैं। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से लीलावती ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि वे पशुपालन कर के घर चलाती हैं। गाय पालन करती है और दूध बेच कर व्यापार करती है