उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि क्या समाज और सरकार के समक्ष महिलाओं को यह साबित करना होगा कि वह भी 'समानता' के संवैधानिक दायरों में शामिल हैं? क्या महिलाओं को सार्वजनिक रूप से प्रमाणित करना होगा कि ‘संपत्ति और भूमि’ में कानूनन उनका भी आधा हिस्सा है? खेती-बाड़ी के अधिकांश काम करने के बावज़ूद महिलाओं को भी 'किसान' होने का वैधानिक अहसास, आखिर कब और किसके बदौलत होगा? राज्यों के मौजूदा कानून और नीतियां, आधी आबादी के भूमि अधिकारों को ज़मीनी स्तर पर स्थापित कर पानें में अब तक असफ़ल क्यों रही हैं? महिलाओं को संपत्ति में बराबरी का हिस्सा देने में आखिर सामाजिक व्यवस्था इतनी अक्षम क्यों है? संवैधानिक वायदों के बाद भी महिलाओं के अधिकारों को लेकर सामाजिक जड़ता और प्रशासनिक नाकामियां पूर्वाग्रहों से ग्रसित क्यों हैं? महिलाओं को सम्मानपूर्वक उनके भूमि और संपत्ति के अधिकारों को न दिला पाने का अभियोग समाज पर लगना चाहिये या सरकार पर? विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
