Transcript Unavailable.

Transcript Unavailable.

Transcript Unavailable.

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से काजल सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि शिक्षा एक ऐसा माध्यम है। जिससे समाज में कई तरह के बदलाव आ सकते हैं। शिक्षा के द्वारा ही लिंग भेद भाव को खत्म किया जा सकता है। इसलिए यह जरुरी है की सभी को समान शिक्षा का हक़ मिले। मीडिया की भी यह भूमिका होनी चाहिए की वो महिलाओं पर होने वाले अत्याचार की नहीं बल्कि उनके सशक्त होनी की खबरें दिखाए। जिससे की समाज में बदलाव आये

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से काजल सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि अशिक्षित लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक करना चाहिए। लेकिन क्या सिर्फ पढ़ा लिखा होना काफी है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। यहां के प्रधान पढ़े लिखे नहीं होते। इसलिए इनकी सहायता के लिए सचिव की नियुक्ति की जाती है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षकों की कमी और अयोग्य शिक्षक भी समस्या का कारण है

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में जानकारी नहीं होती है। क्योंकि वो इतनी जागरूक ही नहीं है। हमारे समाज में ये सोच व्याप्त है की महिलाओं को पुरुषों के अधीन ही रहना चाहिए। महिलाओं के लिए काम के अवसर कम होते हैं। महिलाओं को विकास के लिए भी कम अवसर मिलते है। लड़कियों को लड़कों की तुलना में स्कूल से भी पहले निकाल दिया जाता है

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि लैंगिक असमानता को कम करने के लिए समाज में जागरूकता फैलानी होगी। रोजगार, वेतन सभी क्षेत्रों में समानता होनी चाहिए। समाज में फैली कुरीतियां खत्म करने के लिए सरकार को सख्त कानून बनाने चाहिए। लड़कियों की शिक्षा के लिए प्रोत्साहन राशि दी जाए। महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस कार्य किये जाए। मातृत्व अवकाश के कानून सरकारी और निजी दोनों क्षेत्र में लागु किया जाये। स्त्री शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ ही तलाक को कानूनी दर्जा दिया जाए, लड़कियों की शादी उनके पसंद से की जाए

दुनियाभर के देशों से तुलना करें तो भारत की महिलाएं सामाजिक और आर्थिक रूप से सबसे अधिक पिछड़ी हुई हैं। पिछले दिनों वैश्विक महामारी के कारण उनकी स्थिति पहले से बदतर ही हुई है। देश की अस्सी प्रतिशत महिलायें कृषि क्षेत्र में कार्यरत है। लेकिन उनमें से मात्र 13 प्रतिशत महिलाओं के पास खेती की जमीन पर मालिकाना हक़ है। महिलाओं को भूमि अधिकार मिलना उनका सशक्त होना। इस अधिकार से उनकी वित्तीय आय,आश्रय और आजीविका के अवसर प्रदान करता है

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से काजल सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि बारिश के ठीक पहले खेत में रासायनिक खाद ना डालें क्योंकि वह बह जायेगा। घास या पत्तियों को खाद में बदलें। अगर खाद में नहीं बदल सकते तो इसे सड़क पर ना डालें। हमलोग अक्सर कचरा पानी में डालते हैं। हमारी इन गलतियों से जल प्रदूषित हो जाता है। हमें अपनी गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए प्लास्टिक कचरा कम करना चाहिए। इसके साथ ही प्रदूषण कम करने के लिए पेड़-पौधें लगाने चाहिए

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि ग्रामीण महिला को अपनी जमीन पर अधिकार पाने के लिए कई समस्या का सामना करना पड़ता है। जाति,लैगिंक,रीती-रिवाज,परम्परायें,भूमि प्राप्ति पर महिलाओं का ख़ास ध्यान ना देना। भारत में जब महिलाओं को जमीन का पट्टा मिलता है तो उन्हें समुदाय के अंदर परेशान किया जाता है। जिसके बाद उन्हें हिंसा और जमीन हड़पने का सामना करना पड़ता है। महिलाओं के लिए संविधान में कोई ख़ास प्रावधान नहीं है। महामारी ने भी महिलाओं के जमीन और संसाधन पर अधिकारों को कमजोर बना दिया है। बेरोजगार प्रवासी अपने गांव लौट रहे हैं। जिससे जमीन और संसाधन पर बोझ बढ़ जाता है। इससे खेती बाड़ी और खाद्य सुरक्षा में लैंगिक असमानता बढ़ गई है। विधवाओं को मिलने वाली जमीन और संसाधन को भी जोखिम है