उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि ग्रामीण महिला को अपनी जमीन पर अधिकार पाने के लिए कई समस्या का सामना करना पड़ता है। जाति,लैगिंक,रीती-रिवाज,परम्परायें,भूमि प्राप्ति पर महिलाओं का ख़ास ध्यान ना देना। भारत में जब महिलाओं को जमीन का पट्टा मिलता है तो उन्हें समुदाय के अंदर परेशान किया जाता है। जिसके बाद उन्हें हिंसा और जमीन हड़पने का सामना करना पड़ता है। महिलाओं के लिए संविधान में कोई ख़ास प्रावधान नहीं है। महामारी ने भी महिलाओं के जमीन और संसाधन पर अधिकारों को कमजोर बना दिया है। बेरोजगार प्रवासी अपने गांव लौट रहे हैं। जिससे जमीन और संसाधन पर बोझ बढ़ जाता है। इससे खेती बाड़ी और खाद्य सुरक्षा में लैंगिक असमानता बढ़ गई है। विधवाओं को मिलने वाली जमीन और संसाधन को भी जोखिम है