झारखण्ड राज्य के कोडरमा ज़िला से पिंकी मेहता ,हेलो आरोग्य के माध्यम से कहती है कि उनके तीन बच्चे है ,दो लड़की और एक लड़का।उनके मन में पहले लड़का और लड़की में भेदभाव की भावना थी लेकिन अब कार्यक्रम सुन कर उनकी सोच बदल गई है। उन्हें समझ में आ गया है कि बेटा और बेटी में भेदभाव नहीं करना चाहिए। बेटा और बेटी को एक समान दर्ज़ा मिलना चाहिए। दोनों बच्चों को समान विद्यालय में पढ़ाएगी। बेटा पढ़ लिख कर नौकरी करता है तो अगर बेटी को शिक्षा देंगे तो वो भी नौकरी करेंगी। पहले महिलाओं को घर से बाहर निकलने नहीं दिया जाता था पर अब ऐसी रीत नहीं रही। महिला और पुरुष में कोई भेदभाव नहीं रहा ,दोनों समान रूप से आगे बढ़ रहे है
किशनपुर से बेबी कुमारी ,हेलो आरोग्य के माध्यम से बताती है कि इनकी गोतनी बेटा और बेटी में काफ़ी अंतर रखती थी। उनकी सोच थी कि बेटा की शादी में तिलक लेंगी पर बेटी की शादी में तिलक या दहेज़ उन्हें देना पड़ेगा। इसी कारण वो अपने बेटे को निजी विद्यालय और बेटी को सरकारी विद्यालय में भेजती थी। हेलो आरोग्य का उड़ान कार्यक्रम सुनने के बाद अब वो बेटा और बेटी दोनों का नामांकन सरकारी विद्यालय में ही करवाई है। अपने विचार को बदलकर अब वो बेटा और बेटी में फ़र्क़ नहीं करती है,दोनों को समान रूप से देखती है।
हमारे श्रोता बसंत कुमार , हेलो आरोग्य के माध्यम से कहते है कि हेलो आरोग्य पर उड़ान कार्यक्रम सुन कर उन्हें बहुत अच्छा लगा। लड़का लड़की में भेदभाव हटाना ज़रूरी है। इनके ग्राम में पहले भेदभाव होता था ,अभी वो सभी लोगों को समाझते है कि लड़का लड़की में भेदभाव नहीं होना चाहिए। इनके ग्राम की बहुत सी लड़कियाँ अभी लड़कों से आगे बढ़ी हुई है। लड़कियों को भी हक़ है कि वो समाज में आगे आये और मेलजोल बढ़ाए। बसंत कुमार की तीन साल की बेटी है ,उनका कहना है कि वो अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। बेटी की हर इच्छा को पूरी करने की कोशिश भी करेंगे।
चिलंगिया ग्राम से शिखा कुमारी ,हेलो आरोग्य के माध्यम से कहती है कि वो एम ऐ की पढ़ाई कर रही है। आने जाने की सुविधा अच्छी नहीं है इसीलिए वो प्रतिदिन क्लास नहीं कर पाती है। लड़की है कह कर उन्हें प्रतिदिन पढ़ाई करने के लिए जाने नहीं दिया जाता है। अगर वो क्लास करने जाती भी है तो घर वापसी होते होते शाम हो जाती है , घर वाले गुस्सा करते है। घर पर पांच सदस्य है ,दो बहन और दो भाई है। वो पढ़ते है और बच्चों को पढ़ाते भी है। उनका सपना है कि वो बड़े बड़े शहरों में जाकर नौकरी करें। हेलो आरोग्य मोबाइल वाणी से इन्होने उड़ान कार्यक्रम सुना और अपने परिवार वालों को भी सुनाया। यह कार्यक्रम सुन कर इनके घरवाले बहुत प्रभावित हुए। सभी लोग हेलो आरोग्य सुने। लड़का लड़की दोनों को सम्मान और सामान अधिकार दें। कहीं भी आने जाने में लड़का और लड़की दोनों को छूट प्रदान करें। बेटियों को भी उतना ही प्यार दें जितना लड़कों को देते है
झारखण्ड राज्य के कोडरमा जिला के कुषाण ग्राम से गुड़िया कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रही है कि जब उनकी शादी नहीं हुई थी तब उनके साथ भी काफी भेद भाव किया गया था। कहती है कि उनके भाइयों को पढ़ने के लिए गाँव से बाहर भेजा गया था पर उन्हें नहीं भेजा गया,वो फिर भी अपनी पढाई जारी रखी थी। कहती है कि गाँव के लोग बेटियों को बाहर पढ़ने भेजने से काफी डरते है उनका मानना होता है की उनकी बेटियों के साथ कही कुछ गलत न हो जाए पर यही डर उन्हें अपने बेटों को बहार पढ़ने के लिए भेजने पर ख़त्म हो जाता है। इस नए युग में ऐसी सोच हमारे देश के हर एक इंसान को बदलने की जरूरत है। आगे बता रही है कि उन्होंने हैलो आरोग्य पर चल रहे लड़कियों के हक़ पर कार्यक्रम उड़ान को सुना तथा सुनते ही वो बहुत प्रभावित हुई। कहती है कि उन्होंने अपने बीटा और बेटी पर कभी भेद भाव नहीं किया है उन्हें एक समान सारा हक़ दिया है और आगे भी देती रहेंगी। उनका कहना है कि जब उनकी बेटी बड़ी हो जाएगी तब अपने बेटे के जैसा उसे भी पढ़ने के लिए गाँव से बाहर भेजेगी। अंत में गुडिअ हैलो आरोग्य को धन्यवाद कर रही हैं।
ग्राम धोड़ाकोला से डोली कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रही है कि इस नए युग में भी लड़का और लड़कियों पर भेद भाव किया जा रहा है। साथ ही कह रही है कि यह भेद भाव उनके साथ भी पहले हो चूका है। कहती है कि कई जगहों,परिवारों में यह देखा जाता है कि लड़कियों को लड़कों के समान नहीं माना जाता है उनकी शादी जल्दी करा दी जाती है और यहाँ तक की 10 क्लास तक पढाई करने के बाद उनसे पढ़ना छुडवा दिया जाता है। बहुत से गाँवों में क्लास 10 तक की पढाई करने के बाद आगे पढ़ने का साधन नहीं होता है इसलिए गाँव के लोग अपने बेटों को पढ़ने के लिए बाहर भेज देते है पर बेटियों को बाहर नहीं भेजा जाता है,इस तरह के भेद भाव से लड़कियों के सपने आधे अधूरे रह जाते है और वो अपने भविष्य में आगे नहीं बढ़ पाती है। डोली बताती है कि उन्होंने हैलो आरोग्य पर चल रहे लड़कियों के हक़ पर आधारित कार्यक्रम उड़ान को सुना,सुनते ही वो काफी प्रभावित हुई फिर उन्होंने इस कार्यक्रम को अपने माता पिता को भी सुनाया जिससे अब उनके माता पिता ने उनका एडमिशन गाँव से बाहर के कॉलेज में करा दिया है। अंत में कह रही है की पहले उनके साथ भी काफी भेद भाव होता था पर अब कार्यक्रम को सुनने के बाद उनके माता पिता भी काफी प्रभावित हो गए है और अब लड़का और लड़कियों में भेद भाव नहीं करते हैं। डोली बहुत खुश है और हैलो आरोग्य को धन्यवाद दे रही हैं।
हमारी श्रोता गायत्री झारखण्ड राज्य के कोडरमा जिला के समसहरिया गाँव से मोबाइल वाणी के माध्यम से कह रही है कि हमारे देश में कई जगह ऐसी है जहा पर लड़कियों और लड़कों में भेद भाव किया जाता है। बता रही है कि आज के इस नए युग में लोगों को अपना सोच बदलना चाहिए तथा लड़का और लड़की दोनों को एक समान हक़ देना चाहिए। गायत्री कहती है कि लोग अपनी बेटी को सही से नहीं पढ़ाते है पर लड़कों को पढाई के लिए कभी नहीं रोका जाता है इस तरह का भेद भाव अगर चलता रहा तो हमारी देश की लड़कियाँ कभी अपने सपनों को साकार नहीं कर पाएंगी। गायत्री ने हैलो आरोग्य में चल रहे कार्यक्रम महिलादिवस को सुना जिससे उन्हें महिलाओं के हक़ के बारे में काफी सारी जानकारी मिली और अब गायत्री अपने गाँव के लोगों को भी इस कार्यक्रम को सुनाकर जागरूक कर रही हैं। अंत में कह रही है कि यह कार्यक्रम बहुत अच्छा है और गाँव के लोग अब कार्यक्रम सुनकर जागरूक हो चुके हैं
झारखण्ड राज्य के जिला कोडरमा से हमारी श्रोता शकुंतला मोबाइल वाणी के माध्यम से कह रही है कि आज उन्होंने 5 महिलाओं को लड़का और लड़कियों के ऊपर होने वाले भेद भाव के बारे में जानकारी दिया
Transcript Unavailable.
हमारी श्रोता गायत्री देवी ,हेलो आरोग्य के माध्यम से कहती है कि अभी भी बहुत से ऐसे लोग है जो बेटा और बेटी में भेदभाव रखते है। बेटा को अधिक मानते है और बेटी को कम। शिक्षा के क्षेत्र में भी उनके साथ भेदभाव किया जाता है। बेटियों को सरकारी व बेटों को निजी विद्यालय में पढ़ाते है। ऐसा भेदभाव बच्चों के साथ नहीं करना चाहिए। बेटा और बेटी एक सामान है ,दोनों का एक जैसा ही देखभाल करना चाहिए।
