झारखण्ड राज्य के कोडरमा जिला के कुषाण ग्राम से गुड़िया कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रही है कि जब उनकी शादी नहीं हुई थी तब उनके साथ भी काफी भेद भाव किया गया था। कहती है कि उनके भाइयों को पढ़ने के लिए गाँव से बाहर भेजा गया था पर उन्हें नहीं भेजा गया,वो फिर भी अपनी पढाई जारी रखी थी। कहती है कि गाँव के लोग बेटियों को बाहर पढ़ने भेजने से काफी डरते है उनका मानना होता है की उनकी बेटियों के साथ कही कुछ गलत न हो जाए पर यही डर उन्हें अपने बेटों को बहार पढ़ने के लिए भेजने पर ख़त्म हो जाता है। इस नए युग में ऐसी सोच हमारे देश के हर एक इंसान को बदलने की जरूरत है। आगे बता रही है कि उन्होंने हैलो आरोग्य पर चल रहे लड़कियों के हक़ पर कार्यक्रम उड़ान को सुना तथा सुनते ही वो बहुत प्रभावित हुई। कहती है कि उन्होंने अपने बीटा और बेटी पर कभी भेद भाव नहीं किया है उन्हें एक समान सारा हक़ दिया है और आगे भी देती रहेंगी। उनका कहना है कि जब उनकी बेटी बड़ी हो जाएगी तब अपने बेटे के जैसा उसे भी पढ़ने के लिए गाँव से बाहर भेजेगी। अंत में गुडिअ हैलो आरोग्य को धन्यवाद कर रही हैं।
