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हमारी श्रोता सविता कुमारी ,हेलो आरोग्य के माध्यम से कहती है कि उनके क्षेत्र में बाल विवाह और बाल मज़दूर बहुत होते है। गरीबी के कारण बच्चे होटल ,ईंट भट्टे पर जाते है और अभ्रक चुनने का काम करते है। इसलिए महिलाओं को बाल मज़दूरी के बारे में समझाती है। बच्चों को अभ्रक चुनने का काम करने नहीं बल्कि पढ़ाई के लिए विद्यालय भेजना चाहिए। परिवार वाले पैसों की लालच में अपने बच्चों के भविष्य पर विचार नहीं करते है। अगर बच्चे मज़दूरी करते रहे तो उनका भविष्य बर्बाद हो जाएगा

हमारी श्रोता गायत्री देवी ,हेलो आरोग्य के माध्यम से कहती है कि बाल मज़दूरी बच्चों के भविष्य को बर्बाद कर देती है।18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए शिक्षा ज़रूरी होती है न की मज़दूरी। लेकिन बहुत ऐसे माता पिता होते है जो ग़रीबी के कारण बच्चों को पढ़ा नहीं पाते है और अब्रक चुनने ,गेरज,कारखानों आदि में काम करवाने के लिए भेज देते है। बाल मज़दूरी कानूनी अपराध है जिस कारण बच्चों का भविष्य ख़राब हो जाता है। बच्चे को हमें ज़्यादा से ज़्यादा पढ़ाई करवानी चाहिए। ताकि बच्चे का भविष्य अच्छा बने

बिहार राज्य के जमुनिया से पुष्पा देवी हेलो आरोग्य मोबाइल वाणी के माध्यम से बताना चाहती है की, 5 से 18 वर्ष के बच्चो से अगर कोई मजदूरी करवाता है, तो उसे बाल मजदूरी कहते है। गरीबी से मजबूर हो कर माता पिता अपने बच्चो को सही शिक्षा नहीं दे पाते है, शिक्षा नहीं होने के वजह से बच्चो का मानसिक विकाश नहीं हो पाता है और इस वजह से उन्हें अपने बच्चो से मजदूरी करवाने पड़ती है। बाल मजदूरी रोकने के लिए हमे समाज में जागरूकता लाना होगा और बच्चो को शिक्षा देना होगा

हमारी श्रोता हेलो आरोग्य मोबाइल वाणी के माध्यम बताना चाहती है की, अभी ग्रामीण इलाको में बाल मजदूरी बढ़ गयी है। 18 साल तक के उम्र के बच्चो से काम नहीं करवाना चाहिए, ये समय उनके पढ़ाई के लिए होता है। लेकिन लोग अपने बच्चो से बाल मजदूरी करवाते है, उन्हें काम करने के लिए बहार भेज देते है। माता पिता अपने बच्चो की शिक्षा पर धयान नहीं दे रहे है, उनसे बाल मजदूरी करवा कर उनके भविष्य को ख़राब कर रहे है।

मासनोड़ि से सोनू कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से कह रहे है कि शिक्षा का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। शिक्षा के बिना जिंदगी पशु के समान होता है। शिक्षित होने से सामाजिक और मानसिक दोनों तरह से जागरूक होते हैं और दोनों के बीच सम्मान बढ़ता है। शिक्षा आस पानी होने वाली चीज़ों से अवगत कराती है। बच्चे हो या बूढ़े शिक्षा एक अस्थायी प्रक्रिया है। मृत्यु के साथ ही शिक्षा समाप्त हो जाती है। शिक्षा व्यक्ति के विकास में मदद करता है

पारोह निवासी हमारी श्रोता सना मुन्नी ,हेलो आरोग्य के माध्यम से कहती है कि उनका पहले पढ़ाई में मन नहीं लगता था केवल घर के कामों में ध्यान रहता था। लेकिन रिश्तेदार के समझाने पर ये अब पढ़ाई में अच्छे से मन लगा रही है। ये पढ़ लिख कर एक शिक्षिका बनना चाहती है