किशनपुर से बेबी कुमारी ,हेलो आरोग्य के माध्यम से बताती है कि इनकी गोतनी बेटा और बेटी में काफ़ी अंतर रखती थी। उनकी सोच थी कि बेटा की शादी में तिलक लेंगी पर बेटी की शादी में तिलक या दहेज़ उन्हें देना पड़ेगा। इसी कारण वो अपने बेटे को निजी विद्यालय और बेटी को सरकारी विद्यालय में भेजती थी। हेलो आरोग्य का उड़ान कार्यक्रम सुनने के बाद अब वो बेटा और बेटी दोनों का नामांकन सरकारी विद्यालय में ही करवाई है। अपने विचार को बदलकर अब वो बेटा और बेटी में फ़र्क़ नहीं करती है,दोनों को समान रूप से देखती है।